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गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

Silent Speech ’’ – my entry to the GetPublished contest’’

‘' Silent Speech ’’ – my entry to the GetPublished contest’’

   the main protagonists.
  Rahul --who met with an accident went in comma and lost his ability to walk.

The Story 
An introvert person  "Rahul "with an emotional heart -- see his life changing every moment and get stabilize for years to wait for death .He debar to show his right on his feelings,movement,tears smile and speech. Reflection of silence was just a touch away. I touched and a pain ponder more intense then any tornado or tsunami .I had shaken up for my whole life still have goose flesh with a thought. Can relate it why he like the song "kasme vadde pyar". Only one record or the joker movie whole day.Empty eyes are searching for his love.His zest made him live but seems practically he lost loved once. Children --there responsibility,education now his health ..where the finance will go -he is in comma  but alive by heart :each injection made him think the cost rather then the recovery he want to open eyes and run but ..what is stopping him..? . He is not unhappy with his situation but surely the environment and those sympathizing eyes gazing and questioning him why you are alive?
Still the search of his love his wife "karuna "and his question to GOD  why him? In all three months he search for  the intense love of a wife so that he can ignore those eyes .Life was tough he is getting closer to instinct better be dead.

  • What Makes This Story ‘Real’ 
 No matter those eyes are always there for all the handicapped people.May be suffers and there  relatives can feel more intense then anyone .But why ?movies /serial/ life/philosophy all show us many faces but again we do the mistake when we saw handicapped person.Our gazing eyes make the person think why he is alive?
  • Extract from the story
 Was that the real touch of my love ?I think.. yes that was the real touch no one can love and care for me so much...
I am nurse ..nurse ? "He was of my father age .he look like my father I know he was close to death but he seems alive even in this comma stage"
nurse how could she be nurse ..where are you karuna?
Sir if u can hear me-- ur in ICU and critical u are under observtion.All ur family members are waiting for you outside .they are really worried and concern about you 
Oh okay...I am happy to hear it
Sir your survival chances are least 
I can't go yumraj ji I have so many responsibility  ...I can't  zzzzzzzzzzzzzz

PS: If you like my stroy plz promote it @ this link
http://www.indiblogger.in/getpublished/idea/319 TIA 

This is my entry for the HarperCollins–IndiBlogger Get Published contest, which is run with inputs fromYashodhara Lal and HarperCollins India.

बुधवार, 19 दिसंबर 2012

Ravan of kalyug

I wrote a poem on dusshrea and feel that the rapist, abusers,killer etc have the ravan in them Keeping them in mind I compare Ravana with it but now I realize  that Ravan got punished for his deeds by God . We aren't that capable to give them the kind of punishment these tragedy doers deserve. Is the death really be a nice punishment for them or there pictures should be in public and hey need to abuse public ally ...I know everyone have a gr8 anger for them but when will it stop it is an individual thought process when these ravan will work up never know .......in how many it is prominent this is so difficult to tell. They should be made impotent or they must be tortured  whole life .........death is an easy way out for them.
Also,I feel more worst for the victims who are innocent but somehow they lost respect and love from near one .The person who recognize the girl and parents they make there life hell.The dilemma of victim to stay alive and zest of life ended in a deep agony.......the mental and emotional imbalance keep them killed form the core of heart...media buy the information and make  it public or obvious to recognize the person.It is  just and addition to the torture .
Will there parents be enough strong to face it and help her come out?
Will her friends and relatives accept her whole kindheartedly?
Will she ever smile lively?

बुधवार, 28 नवंबर 2012


करुना ,मुझे बहुत काम है । आज कुछ और मीटिंग मत रखना ।
पर रीती , ..आज अरुण को आना है ..............
जाते जाते रुकी .....आज .......ठीक है तुम उसे उठा के भेज देना ....
रीती सुनो ...........अरे मेरी बात तो..........चली गई ..........भाग रही है अपनी ज़िन्दगी से। पता नहीं कभी किसी को बोलेगी भी या नहीं ।
हाँ वो भागती है अपने अस्तित्व से अपने दुखो से अपने प्यार से ...इस काम के बोझ में उसने इंतना घूम कर दिया के सब भूल जाना चाहती है हर रात सोने से पहले वो सब याद करती है .नहीं उससे याद आता ही होगा .......आज भी उसकी पूजा करती है और अपने को एक सादे रूप में रख कर दुनिया के सामने अपना दुःख आसानी से छुपा लेती है ।

आठ साल पहले वो अमरीका छोड़ के अचानक आ गई यहं। शादी को साल भर भी नहीं हुआ था उसका ....किसी से कुछ नहीं कहा नागपुर में जाके एक कॉलेज ज्वाइन कर लिया । किसी को ख़बर नहीं की वो आ गई है । निरल पैदा होंने वाला था । समझ में नहीं आता अकेले उसने यह सब किया । जब निरल २ साल का था तो अचानक हम एक कांफ्रेंस में टकरा गए । में उसे यहं देख कर हैरान थी......... वो बिल्कुल शांत स्वभाव से मिले । और मेरे बारे में सब पूछ कर चलने लगी ...२ दिन की कांफ्रेंस थी १ दिन था तो मुझे कुछ एहसास नहीं हुआ यहे क्या हुआ उसने कुछ नहीं कहाँ मैंने उसे अपनी पूरी दास्ताँ सुना दी ॥उसने हमेशा की तरह सुन ली और फिर उस दिन वो मुझे नहीं मिले में रिसेप्शन से पूछ कर उसके कमरे में गई रात के ११ बाजे थे मुझे देख कर उसने आराम से बुलया और वो मेरे लिए चाय और परले जी बना कर बेठी थी .................मुझे लगा जसे कुछ बदल ही नहीं है बस उसका इरंदा और मजबूत और पक्का हो गया है ।

मुझे देख कर बोली मुझे पता था तुम ज़रूर आओगी ..
.मैंने बोला तुझे तो हमेशा सब पता रहता है ......एक प्यारी से मुस्कान दे दी मैंने बोला तू तू बहुत सुंदर हो गई है एकदम मस्त बहुत रूप चदा है तुझे अमेरिका का इतनी फीकी हसी देख कर में डर गई समझ में आ गया कुछ टूट गया है कुछ छुट गया है ...............हिम्मत ही नहीं हो रही थी कुछ पूछु आगे .........बात आगे बदने के लिए मैंने पुछा यहे तेरा बेटा है ....उसने फिर सँभालते हुए कहाँ हाँ यहे मेरे निरल है ........बहुत क्यूट है एक दम अमेरिकन बच्चा ..............फिर प्यारी हसी ......अरुण कसा है ? यह चहरे के भाव बहुत अलग थे ...........पर वो संभल गई
 बहुत अच्छा है ...
 तुम लोग यहं कब आए .........
...२ साल पहले .......
क्या? मेरे चौकने के बारी थी मैंने झूठा गुस्सा दिखाते हुए बोला ..और मुझे बतया तक नहीं ...तू तो बोलती थी शादी के एक साल तक सब भूल जाते है फिर सब याद आता है ............ पर तुने तो मुझे याद नहीं किया ..मुझ से सब ने मुह मोडा लिया ...............तुने भी क्योंकि मैंने अंकित को छोड़ दिया था ।

 तुने क्यों छोड़ अंकित को ...?
क्यों क्या मर्द के नाम पर धब्बा था ...न उठाना बैठाना न खाना पीना किसी चीजे की तमीज़ नहीं थी ...........और कोई सुख नहीं बस पैसा इतना था की बस .........उसके माँ पिता की सारे दिन देखभाल करो उनकी सुनो ५-६ नौकरों को संभालो और रात को १० बाजे पति के दर्शन । यहे भी कोई जीवन था । मैंने पैसे से शादी नहीं की थी । चलो अगर वो.... नहीं तो कोई बात नहीं पर उसके अलवा तो मेरी परवाह करो ...में नहीं कहती दिन रात पीछे रहो पर .....मेरे ज़रूरत का ख्याल तो रखो .....कुछ नहीं १००० रूपये की मगज़िने ले आयेंगे पर कोई २० रूपये की सहेली फेमिना नहीं कए जाती .....इसे इतनी बातें थी की ...एक किताब लिख दू .............झट से बोली ..
..लिख दे न रोयल्टी में ले लुंगी अगर तुझे नहीं चाहहिये तो ..........
.....दोनों इतनी ज़ोर से हस्से .....पुराने दिन याद आ गए कितने अच्छे दिन थे
कोई फिकर नहीं ...खुले आकाश की तरफ़ देख कर झूम उठते थे । खूब घूमते थे ..हर नया रेस्त्तारेंट हर नई जगह मन्दिर से ले कर पार्क में जाना किसे भी छुट्टी वाले दिन घर पर नहीं रहते थे । सब अपनी अपनी गाड़ियों पर बेठ कर उड़ते थे रहते थे ......एकदम आजाद पंछी की तरह ............किसी का भी मजाक उड़ते थी और फिर जंगली की तरह हस्ते थे ................सब की मम्मी  बोलती थी कोई तो लड़की वाली आदत रखो पता नहीं ससुराल में जाके क्या करोगी । हम बड़े मज़े से बोलते थे उससे तंग करंगे .....................हस्ते हस्ते अचानक दोनों की आंखे भीग गई .................और एक खामोशी ..डरने वाली खामोशी ने जनम ले लिया .........इतनी मासूम है यहे रीती ..............में उसकी तरफ़ इसे देख रही थी मुझे लग रहा था चटान पिघल रही है लावा फूट सकता है ..................इतनी मासूमियत से पूछ एसा क्यों हुआ करुना ............?मैंने कहाँ क्या ? हमरे वो दिन कह चले गए .......हम हमेशा ऐसे क्यों नहीं रह सकते ? हमे किसी बात की चिंता नहीं थी बस माँ बाप को हमारी चिंता थी हमारी शादी की ..................वरना वो ज़िन्दगी भी क्या बुरी थी ...........
बुरी नहीं बहुत अच्छी थी .............पर कोई माँ बाप बच्चो की खुशी नहीं देख सकता ........पता था रीती को अच्छा नहीं लगेगा वो कभी माँ बाप की बुराई पसंद नहीं करती ...वो बोली क्यों ? मुझे लगा नहीं बदली है यह ..................क्यों का मेरे अलग होंने से खुश नहीं थे ........उन्हें लग रहा था में ग़लत कर रही हु । मेंउन्हें छोड़ दिया .......तो जीत गई ...........?में केसे ?
रीती ने आश्चर्य से पुछा तुने कहा था न की ...तू अलग होने का निर्णय यह सोच कर लेना की तू अकेले है कोई तेरे साथ नहीं बिल्कुल सच था में अकेलेरह गई पर मुझे लगा में सही बात पर थी पर तुने कहाँ तह माँ - बाप भी नहीं ......वो सही में नहीं थे मेरे साथ .में कसे रहती ? फिर नागपुर में आगयी ..आज तेरे ज़ोर देकर किया गया पीएचडी काम आगया ......रीती क्या हुआ ......?कहाँ खो गई ?
पता नहीं करुना में सब भूल गई केसे ................?
कोई नहीं रीती बहुत टाइम हो गया ....?आंटी अंकल कह है ?
वही होंगे अपनी जगह .........तू मिलते नहीं वो मझसे बात नहीं करना ..........उनके हिसाब से उनकी नाक कटा दी .मैंने .....?
क्या ......?
हाँ,शोभा कहाँ है ?अपने पति के साथ आस्ट्रेलियन में सही है ? सब मतलब की दुनिया है ......
...मैंने घर के लिए सब किया अपना प्यार छोड़ दिया अपनी पढाई अपना जॉब में सब को सब दिया आज मेरे पास क्या है ...............करुना ................रीती हा कंधे पर हाथ आते ही में छोटे बच्चे की तरह रोंने लगा गई पता नहीं कितने दिन का गम था जो बह रहा था....हमेशा तेरे हाथ की गर्माहट ने मुझे सहारा दिया है रीती ...तू सोच में कसे बिन बच्चे के रह पाती ........बता मैंने क्या ग़लत किया ? मैंने हु जो मैंने सगाई तोडी वो ग़लत थी पर ...यहे भी मानती हु की मुझे 3-4 लड़के पसंद थे मेरा अफ्फैर रहा है ..पर में अपनी मर्यादा जानती थी ...में कोई भूखी ...........रीती ने मेरे मुह पर हाथ रख दिया ...जानती थी वो ऐसे बात पसंद नहीं करती मुझे अच्छा लगा आज कुछ ग़लत नहीं है
आज फिर हम एक साथ मुश्किल मोड़ पर मिल गए ........
आज भी नहीं जानती एसा क्यों हुआ ......क्या हुआ रीती (इतनी तड़प थी )मैंने प्यार नहीं अपनाया छुटने के डर  से लेकिन शादी भी मुझे बांध नहीं पाई ..
पर रीती वो बहुत अच्छे थे
मैंने कब कहा बुरे थे पति एक बेरहम बाप और पति थे .....
क्या ...?
हाँ , आज भी सब मुझे ही दोषी मानते है ....लेकिन में नहीं मानती ......
पर क्यों .....?
तुझे पता है मुझे अपने रिश्ते बिंदास और प्यार से परिपूर्ण पसंद थे पर तुझे यहे  जान कर हैरानी होगी उन्हें नहीं मेरे मुह से गलियां निकलती थी इन बीते साल में बेहद गुस्से वाली,निर्बल और निस्तेज हो गयी थी मेरी उमंग मर गयी थी  मुझे वो हेवन लगते थे ..सच ....एक बहरूपिया  जो सब के सामने अच्छा है वो अच्छे भी थे लेकिन दुनियां के लिए ...उन्हें परिवार नहीं चाहिए था ...जिम्मेदारी नहीं साम्राज्य चाहिय्र था।। में नहीं देना चाहती थी ... वो सब इसलिए मैंने थोडा बर्दाश्त किया फिर छोड़ दिया ...अपनी बीवी को जूते  की नोक पे रखो दूसरो की बीवी बच्चो को सब कुछ दो .....मुझे लगा उनका जीवन कभी परिवार को नहीं समझ पायेगा ...वो दुनिया के  लिए पैदा हुए है। .....बच्चे को घुमाना,पढना ,सुनना,चाहत को पूरा करना उनकी ज़रूरत नहीं थी  .....अपनी प्रेग्नेंट बीवी पर गुस्सा दिखना हर जवाब गुस्से से देना कभी प्यार से कुछ नहीं पूछना ,हमेशा अपना खाना,पीना,सोना में और मेरे बच्चे क्या कर रहे है कोई मतलब नहीं .......जितना प्यार सब के लिए उतनी ही बेदर्दी बेरुखी हम सब के  लिए ........मुझे यह महसूस होता था अगर में कुछ बोलती तो में गलत हो जाती किसी भी बात को बात नहीं करते ..बस फालतू के तर्क वितर्क ......... मेरे दम घुटता था .....मुझे नीचा  दीखने के लिए हमेशा मेरी बात काटना ...जन बुझ कर मेरे और घर वालो के बीच मतभेद   करना ..फिर मुझे दोष देना ...सब अच्छे के साथ पर लगते थे ..... सब लूटते थे पर बुरी सिर्फ में थी क्योंकि में उनके कहने पर नहीं करती थी ..... नहीं करके आइना दीखती थी .....मेरे बच्चा हर बात चार बार बोलता तब सुनानते मुझे मंज़ूर नहीं था .......उनका जीवन ही अनाथ बच्चे और गरीब महिला का जीवन पर लगने के लिए हुआ था ...फिर वो उनके घर की हो या बहार की .......जब मुझे घर वाले पसंद करने लगे तो मुझ से क्या बेर ...उन्ह खुश होंना चाहिए था पर वो नहीं थे ...बेवजह चिलना रोज़ लड़ना ,हर छुट्टी पे बच्ची के सामने बकवास क्या था एसा जीवन में ..........वो पुरुष नहीं मह्पुरुष थे उनका जनम एक परिवार नहीं दस परिवार के उदार के लिए हुआ था 
इसलिए उन्हें उनकी रहा पर छोड़  दिया।
क्या तलाक ...?
नहीं ,मुझे शादी नहीं करनी और वो करे उनकी मर्ज़ी ......
रिश्ते के दायरे भूल गए मुझे अबला नारी  समझ लिया और बना दिया
अमरीका में रखा लेकिन न गाड़ी चलना न कभी पढाई की बात करना न ही मैंने जसी घर संभाला उसके बारे में बात करना ...बस मेरी बुराइया  ढूँढना  और दूसरो में तारीफ
तुझ में बुराइयाँ .........
हाँ ..बहुत थी मेरे अन्दर ...........
मुझे बोलते तुम ढंग  से बात नहीं करती .........
क्या ..........?....
मैंने  अपना 200% दिया इस रिश्ते को प्यार से लड़ाई से बच्चा करके लेकिन सब बेकार ...........
ऑफिस से आके  कुछ पूछना नहीं अपने घर बात करना ...न बच्चा न बीवी कोई मतलब नहीं किससे मिले या कभी नहीं सुना मुझे ....मुझमे कमियों का भंडार  बना दिया आज मुझे बेहद तनहा कर दिया ...........वासे तो मुझे पता था न साथ खाना न घूमना न प्यार कुछ नहीं सब एक दिखवा था में अन्दर थे निरल के बाद टूट गयी थी ...पर उसके लिए जीना था ............इसलिए जी रही थी ...पर जिस प्यार के लिए मैंने बरसो इतेंज़र किया वो बेहद तकलीफदेह था
आज भी आंसू निकलते है ...............सबसे बद्दी बात जब इन्सान सब की नज़रों में अच्छा होता है तो गलती मेरी हो दिखती पर मेरे और मेरे बच्चो को अच्छा भविष्य के लिए यहे ज़रूरी था ........हर छुट्टी वाले दिन लड़ना, चिलना, चीखना ,तंग करना  मैं उब गयी थी या तोह बिना बात  की दिवार ...........जो आशियाँ टूटता है तो बहुत दर्द होता है ........इतनी तकलीफ है पर मुझे पर पछतावा बिलकुल नहीं अपने बच्चो पे इसे बाप का साया न पड़े कुछ नहीं होता .......
इसे बाप हो या नहीं कुछ नहीं फर्क पड़ता ............
मेरा दर्द मेरा है ......पर मुझे कुछ ख़ुशी तो है ही .......जीने जनम दिया उन्हें एक अच्छा इन्सान बनाउंगी चाहे बाप ख़राब ही क्यों न हो .........
एसा नहीं की गलती मेरी नहीं थी मेरी भी गलतियाँ थी ....मुझसे बर्दास्त नहीं होत्ता हर  बात मैंने प्यार से और लड़ के बतायी पर कोई असर नहीं ...मेरे बच्चे होंने में जो मेरे साथ व्यवहार था वो कभी नौकरानी की साथ भी नहीं करेगा अरुण .......... मेरा सामान और विश्वास उठ गया ...जसी सोच मेरे लिए थी और दूसरो की बीवी बच्चो को दस सलाह देते थे .......अपने लिए कुछ नहीं बेहद छोटी सोच का घटिया आदमी ............पहले मुझे लगता था आज बस और नहीं लेकिन नहीं उसकी हरकत बढती हा रही थी ...जब मेरे बच्चो को लेन लेजाने में आनाकानी की अपने आनंद के लिए तब मेरा सब्र का बांध टूट गया।।मैंने  छोड़ दिया .......जब निरल कुछ कहता और वो नहीं सुनते  मेरे तन बदन में आग लग जाती .........उसको किसी क्लास में डाले पर कंगाल हो जाता ...रहे अब उस मकान  में कभी घर नहीं बना सकते अरुण ओछा चोट्टा और घटिया .....सोच लगती थी .......
रीती तू ठीक है ..........
मैंने हर रोज़ एक कमरे में बेठ  कर पूरी रात छत से सिर्फ यह पूछती हु मेरी क्या गलती थी ..?मैंने क्या बड़ा चाह ..?सब छोड़ने से पहले सोचती थी अनसु के साथ सोचती थी क्या करू की कभी तो एक छुट्टी अच्छे से निकले ..........?पर में असफल थी  .....और असफल हु .. बहुत विश्वास था की मेरा प्यार कभी  इतना कमज़ोर नहीं होगा ........ पर मैं गलत थी।
बस पहले भी यही सोचती थी छत देखते देखते क्या हो गया ?
मेरी गलती थी की मैंने एक समाजसेवक  में घरेलू पारिवारिक इन्सान ढूंढा .............वो औरो के बच्चो और बीवी के लिए सब कर देते लेकिन मेरे और मेरे बच्चो के लिए इतनी घटिया सोच .......की निरल को बोलते बेटा लायी तो मम्मी है पर पैसा पापा  का है ............
क्या ...?
क्या तू एसा सोच सकती है ...?
रीती उसने तुझे अपनाया नहीं
नहीं कभी नहीं  ......में घर बस रही थी या जंग लड़ रही थी यह बताना मुस्किल थ मेरे लिया ............
कोई बात नहीं समझ में आती ........कैसे भी ....इतनी जिद और बदले की भावना ..कोई आमिर आदमी मिल जाता तो जल जाता किसी के अच्छे मकान  में जाता तो काम्प्लेक्स हो जाता .......किसकी की मदद करता तो सोचता वो इसकी जी हुजूरी करे अपनी तारीफ सुनना चाहता ........इतनी insecure की जॉब बदलता कहीं चैन नहीं क्योंकि मन को कभी नहीं जाना बस हवास, आग,  बदला ,जिद, मन में चोर ,बचकाने फेसले उन पर पछताना कोसना ,मरघट सा मुह बनाना। और भी न जाने क्या क्या ...?
मैंने घर नहीं तोडना चाहती थी पर इस जिद्दी इन्सान के सामने टिकन नामुमकिन था ...हर काम के लिए धमकी आया ........ रोना पीटना ज़बरदस्ती अपने को नीचा दीखना और जब लोग बोले तो चिड जाना ....कोई स्टेबिलिटी नहीं कोई परिपक्वता नहीं बेहद बेवक़ूफ़ और कमतर हरकत ...मुझे उससे गाली देना पसंद था वो असली दर्जा था ..........
वो किसी हरकत को नहीं सुधरता बल्कि बोलने पर ज़यादा ज़यादा करता जाता मुझे कसे भी चलेगा लेकिन मेरे बच्चे को नहीं ............
मैंने जानती थी वो कहाँ कमतर है उससे खुद से भागने की आदत थी इसलिए सच का सामना नहीं कर पता उससे कोई भी चीज़ संभालनी नहीं आती थी ...में क्या खो रहो हु मैंने जानती थी पर मेरे बच्चो और मेरे लिए ज़रूरी था ...  रोज़ उसको मच मच करनी होत्ती थी में तंग आ गयी थी बात तो हमने कभी नहीं की बस अपनी अपनी बात ...............जब में बोलती थी मेरे मुश्किल दिन होत्ते हो मूड उखड जाता है ..वो ज़रूर मुझे ठेस पहुंचता एक बार नहीं बार बार जब मुझे उसके प्यार की ज़रूरत होती वो मेरे मजाक बना रहा होता ..............कसे रहती इसे आदमी के साथ अगर उसे इस बात का एहसास नहीं तो वो जीवित नहीं ...उसमे सिर्फ फालतू विचारो का पुलिंदा है .............उसमे जीने की कोई चाहत नहीं है न वो तंदुरुस्त रहने कहते है न सेहत न अपने दिखने के लिए कुछ करते है बस चिलना लड़ना और अपनी तारीफ करना बड़ी अच्छी तरह करते है ..............

बस जीवन चल रहा है ...............
हम दोनों एक ही रास्ते पर थे ...लेकिन  वजह अलग अलग है ..........
सोचती  हु एक संसथान खोल लू  .....
मैं उस अन्दर के द्वन्द को इतनी गहरायी तक महसूस की है ........किसी को संभालना बहुत ज़रूरी है ...

Rose गुलाब

गुलाब की खुशबू में इतना खो गए भूल गए की कांटे भी  है 
खुशबू में इतना गुम  थे की कांटे का एहसास ही नहीं था 
जब हुआ तो खून सुख चूका था आंसू  बहते बहते सुख गये थे 
ज़रा सा झटका लगा तब कांटे का एहसास हुआ ..
में बहुत आगे जाना चाहतो थी पर अकेली ही थी 
सोच था एशिया होगा खुशबू  सा लेकिन खुशख था 
में जी रही थी मरने के लिए मेरी आस जा चुकी  थी 
पावन  गुलाब कभी भगवन को दिया है 
कभी किताब में छुपा कर रखा अपने अनदेखे प्यार के लिए 
पर अपने प्रेम का प्रतिक नहीं बना पाया 
आज उसकी सुखी पट्टी मुझे चिदाती है 
मेरे प्यार का मजाक  बनती है 
 कभी आखिरी पाती में प्यार ढूँढना 
गुलाब मेरे साथी था कभी टीचर को देने का 
कभी राजीव  गाँधी से मिलने पर देना 
मेरे बाग का राजा  मैंने मुस्कुराना सीखा था 
कभी उसके खिलने पर मेरा मन नाच उठता था 
आज उसके कांटे अपने से लगते है 

गुरुवार, 15 नवंबर 2012


रितिका  ..अभी का फ़ोन है 
इस वक्त  ..?
हेल्लो अभी ........क्या ..
क्या कॉलेज  नहीं गए ...अभी तक 
..नहीं ....गया था ......आ गया
आवाज़ इतनी बुझी बुझी क्यों है.......की परेशानी टी नहीं
हां रीती , में पागल हो गया हु 
क्यों इसमें नयी बात क्या है...?
में पढाई  पे नहीं ध्यान नहीं दे पा रहा हु
पर क्यों ? देखो तुम्हारा MBA का आखिरी साल है परसेंट कम  नहीं होनी चाहिए है 
जानता  हु ?
फिर भी .........में तुमसे मिलना चाहती हु
अभी फिर वही बात होगी ..मेरा जवाब वोही होगा तुम क्यों अपने आप को परेशां करते हो.........
रीती प्लीस  एक बार ......
ठीक है... शाम को घर आ जाओ 
क्या हुआ रीती...?वोही नाटक  ...................सब दौराहेयिंगे 
पर हाँ कह दे .............
पर  मीता  मेरा रिसर्च  आधा रह जायेगा 
क्यों ..?उसको एतराज़  है
पता  नहीं...
पसंद करती है न 
सारी दुनिया को पसंद करती हु.............
अच्छा प्यार करती है..............
शायद ....अच्छा लगता है टाइम बीतना ......................पर वो वैसा तो नहीं होगा..............जैसा अभी है............
वो तो किसी  के लिए एसा ही  होगा ..........................
मुझे  अभी से सुरुचि ने मिलवाया था..................
वो पहले सुरुचि सुरुचि करता था अब ..................
इसमें तेरी कोई गलती नहीं है
क्या पता  कल कोई मिले और .............
इसलिए रिसर्च  ख़तम हो जाये ...फिर जायदा .............
बात तो सही है.................४-५ महीने में फ्री हो जाएगी ...फिर असं होगा.................हम काफी समझदार हो गयी हो
में कोई एसा फैसला नहीं कर सकती .....वो मेरी रिश्तेदार है ...और एक उम्र  के तो आपस में कोमप्रिसों तो
होगा ही...............वसे भी हम साथ नहीं रही तो वो बुरा मान गयी है..................ढाई साल की बात थी ...कसे हाँ करती.............
हे कसे गुजर गए यह साल पाता ही नहीं चला .......
कितना कुछ  सिखा रीती थे कोउन्सेल्लोर से............क्या कैसे कितनी बात करनी है...................पैसा का हिसाब  मुनीम रही होगी .................
अरे .....लड़की और पैसा लड़ाई के दो ही कारण  होते है
कमाल है आप रीती जी .....................
अच्छा इतना  मक्कन क्यों.................?
 पूरे घर छिप कर अपना खर्चा  उठाना कोई असं काम नहीं है..................जो जीवन में सफल होते है ज़रूरी नहीं वो गृहस्थी ..में भी 
पर आप होगी....
अच्छा जी.................वो तो................
अभी जी ..........आ गए खोलिए ..............
अभी ...तुम एक घंटा पहेले आ गए
हां बठो में काफी बना कर लाती हु.......................
हाँ लो भाई ..........काफी... अच्छा में रूम से बाहर
नहीं मीता... एसा नहीं वसे भी रीती तुम्हे बता देगी सब 
तुम बातें करो में अपना presentation पूरा करने जा रही .हु.............
काफी तो पी लो 
वही  पी लुंगी .
हाँ अभी बोलो ............
देखो रीती में सब समझ रहा हु .....पर तुम नहीं समझ रही .............
अच्छा ठीक है में सब समझ रही ही बस समय की नजाकत को समझो
नहीं में अब हर तरह से तैयार हु और तुम भी बस .........
अच्छा ठीक है ......

शनिवार, 10 नवंबर 2012

मुझसे हर पेड़ अपना सा लगता है

मुझसे हर पेड़ अपना सा लगता है
कभी मेरे पास कभी मुझसे दूर लगता है
 कभी आसपास  कानाफुस्सी 
मुझसे  गले लगता कभी मुझसे  दूर जाता
हर पेड़ कुछ कहता है !!!

कभी मेरी चुगली कान लगा के सुनता कभी दोस्तों के ठहाकों में साथ सा
कभी  मिलता सा कभी उनकी उदासी में साथ
कभी क़तर में कभी तनहा  सा मासूम सी  
अंगड़ाई  लेते बेहद मासूम  कभी बच्चा   कभी बड़ा धुप छाव  से लुकाछिप्पी
बड़ा अपना सा लगता है हर पेड़ कुछ कहता है

मंगलवार, 6 नवंबर 2012


निशब्द सा   होता  जीवन
रिश्तों में आत्ती  खटास 
मुश्किल में पड़ते बंधन 
नासमझी की दीवार
तारतार होती मर्यादा
जाने कौन सी है वो सोच
प्यार के बदलते  मायने 
 अकलेपन सी आफत
दुनिया को दीखने के रिश्ते
कुछ हसी के पीछे बहुत से गम
किसी की निगाह में  काली  बदली
प्यार में बेरुखी है
नज़र में बेदर्दी  है
जाने किस दिशा में बन रहे या रिश्ते
पराये अपने है अपने पराये है
सिकुड़ते जीवन में लम्बी ख्वाइशे

जाने किसी दिशा के रिश्ते है
टूटने और दरकने का एज्सस है
कोई प्यार का साहारा  नहीं
बड़े बदनसीब थे
बेआबरू हो कर ज़िन्दगी चलते रहे है
आज लुटने पर गुनहगार बने  कटघरे में है


शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

बड़े फ़िल्मी है तुम्हारे सनम --शुभ करवाचौथ !!

अपने उनके साथ  जीवन निकलते निकलते इतनी  आदत हो जाती है जब पीछे मुड  कर देखो तो प्यारी सी मुस्कराहट हर शिकवा गिला धो देती है।हर बड़ी बात छोटी ख़ुशी में बदल जाती है। आ एक और दिन युही साथ चलते चलते निकल गया प्यारी सी याद बन कर ..........

हमे तुमसे प्यार कितना हम नहीं जानते
पर तुम्हे परेशा बहुत करते है ,अधिकार  है
तुम्हारे प्यार को हमारी बकवास से मात देने का हक़ है 
तुम्हारे दिए फूल को फिसूल भी करार देने का हक़ है 
हम तुमसे बहुत प्रेम करते है इसलिए  यह हक़  है ।।

कभी देर से आने पे ,कभी तेरे रूठने मानाने पे
कभी मुझे रुसवा करने पे, कभी अपनी जान न समझने  पे
कभी मेरी बात की हाँ-न कहने  पे
कभी मेरी तारीफ न करने पे
हम गुस्सा होत्ते रहंगे , जब तक है जान।।

तुम्हे पे अपना हुकुम चलने पे
हमारे अच्छे आईडिया पे इतराने  में
हमारे बिना कारण  रोने  पे
कही का गुस्सा कही उतरने पे
माँ की याद आने पे
तुम्हारा शर्ट गिला करेंगे क्योंकि मैंने प्यार किया।।

तुहे मानाने के लिए अच्छा खाना बनाने के लिए
अपनी  पसंद के कपडे पहनाने के लिए
अपने दिल की बात खुल के बताने में
दिवस को मानाने में
 मज़ा तुम्हारे कपडे धोने  और प्रेस करने में
क्योंकि तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो।।

तुमरे लिए व्रत रखने में
तुम्हे अच्छे से खाना खाने  के लिए
बच्चो के बातें सुनाने में
घर की बातें सुलझाने में
 तुम्हारी आँखों  में अपनी तारीफ देख कर
कुछ कुछ होत्ता है।।

हम युही रेह्नेग सदा
बहुत कुछ बहुत ज़यादा
दर और दंबंग बनके
ख़ुशी और दुःख मे
क्योंकि तेरा मेरा साथ अमर।।

शुभ करवाचौथ !!

मंगलवार, 30 अक्तूबर 2012

क्योंकि ............

क्योंकि  तुम आदमी हो
   आज मैंने एक बड़ा निर्णय ले लिया ..तुम से अलग  होने का ...हम श्याद साथ नहीं चल सकते .क्योंकि एक बहुत गहरी खायी है दोनों के बीच में ...जो कभी नहीं भर  सकती  इतना लम्बा है फैसला है ...हम कभी भी एक दुसरे  के साथ सुखी नहीं रह सकते /मैंने बहुत कोशिश की तुम्हे साथ तुम्हे हिसाब से कभी मेरे हिसाब ...आज मैंने हर मन ले और तुमसे दूर रहने का फैसला कर लिया।..
मैंने उतनी सही नहीं हु ..जसा की तुमने सोचा था। पर  क्या तुमने कभी सोचा, तुम तो बिलकुल भी वसे न थे जसा मैंने सोचा था। लेकिन एसा कभी नहीं होता की किसी को   मनचाह वर या वधु मिली हो।
लेकिन क्या वो कभी साथ मिलने का नहीं सोच सकते ? सिर्फ इसलिए क्योंकि में एक नारी हु और मुझे तुम्हारी हर बात मनानी चाहिए।लेकिन आज में हार गयी हु.......
 केसे तुम्हे अपने मन की बात बोलू कसे अपना दर्द, अपनी ख़ुशी  तुम्हे बताऊ।मेरी तकलीफ तुम्हे पसंद है मुझे दुखी देखना तम्हारी आत्मा तुम्हारी अहम्  की विजय होती है।तम्हे परिवार नहीं तुम्हे अपना साम्राज्य बनाने के लिए दासी चाहिए ..जो में नहीं बनाना चाहती।
 तुम्हे लगता है तुम मुझे रख  कर मेरे साथ रह कर ...मुझ पर एहसान किया है लेकिन एसा नहीं होता में तुम्हारे लिए काम करती हु क्योंकि में तुमसे प्यार करती हु।लेकिन तुम्हारे इस अहम से भरे तुम्हारे मन के सामने मेरा प्यार छोटा पड़  जाता है ..
मेरी पसंद मेरी चाहत तुम्हारे लिए मानना मतलब तुम्हारे  अहम पे सीधा वार है। में परिवार चाहती हु।रोज़ की लड़ायी नहीं।चिलना चीख़ के बातें करना तुम्हारी आदत है एक पानी  का गिलास शायद तुम बाई से ज़याद्दा तमीज से मांगते होगे। मैंने अपनी चाहत तुम पे कभी थोपनी नहीं चाहिए  थी हमेशा बताना चाहती  थी।
यह सब मैंने कभी  नहीं देखा कभी समंज्यास  के आभाव में आज यह रास्ता मझे इख़्तियार करना पड़ा आज नहीं लेकिन आज जब मेरा बच्चा अपने पेरो  पे खड़ा  हो गया तो लगा सही वक़्त है।
और मुझे तम्हारे बिना जीने के आदत हो गयी अब तुम्हारे साथ पूरे दिन तुम्हारे अहेम से टकराने का दम नहीं है न ही इम्तेहान देनें की ताकत ....
आज भी तुम्हे मुझ पर  उतना यकीन  नहीं जब तब मझे इम्तेहान देना पड़ते  है।
आज भी तुम  "में"  के पुजारी हो हम के नहीं  आज भी में यह कहना चाहता ह जाना चाहत हु मेरा घर ...एसा कौन  सा मोड़ था जब तुम्हे लगा मैंने तुम्हारे घर वालो  को अपना नहीं माना ..?उन्होंने मझे पर हमेशा शक शुभ रहा कुछ भी बोल फिर मैंने जवाब देना शरू किया ..लेकिन अपने कर्म  से कभी मुह नहीं मोड़ा उन्होंने भेद भाव किया मैंने नही।
मेरी यह चिठ्टी तुम्हे शायद समझ न आये लेकिन ..मेरा पास कुछ और नहीं था ....तुम मुझसे बहुत दूर  रहे  आज तुम्हे मैंने दूर कर दिया।
एसा नहीं मैंने सिर्फ एक मुस्किल समय बिताया तुम्हारे साथ .........काफी अच्छा समय भी बिता है हर जगह घूमना फिरना नयी जगह रहना तुम्हारी इतनी बड़े रुतबा की धौस रुपया पैसा और सब कुछ .....सब लोग मेरे जसी मामूली  लड़की की तुमसे शादी होने से बड़े परेशां थे।आज वो सुकून महसूस  करेंगे और में भी .........

बुधवार, 24 अक्तूबर 2012

कितने रावण है

कितने रावण है जो न तोह जले है न मरे है
क्या  एक रावन जला देने से दशहरा  हो जाता है
अपने मन के रावण को कब हम जलाएंगे
कब बुरे और बुरा करने से हम बाज़ आयेंगे
हमेशा हमने किसी का दिल को  दुख देते है
कभी किसी की अच्छाई   नहीं देख  पाते
आगे बड़ते  कदम को रोक देते है किसी का दिल दुखते है
छोटी छोटी खुशियों को अपनी अहेम  और जिद में पिछे  छोड़ देते
 कभी कुछ खट्टी  मिट्ठी यादिएँ याद करके हमने हमेशा मुस्कुराना चाहिए
हमेशा एक जसा समय नहीं रहता दुःख ख़ुशी  एक चक्र होता है
पंचतत्व  में विलीन होंना ही अतिम पड़ाव है

 शुभ दशहरा!!



ज़मी की सख्क्त  परतों ने 
एक बार फिर खोल  ही  दिया 
मुझे बोल ही दिया क्यों छिपी  हु
निकल आओ मुझे भी परिवर्तीत  होंना है
और यही समय की मांग है
बरसो से बंधी थी आज फिर बहार हु
कल फिर दबी होगी पर तुम क्यों आ गए ?
परेशां न हो अपनी ताकत को पहचानो
बच कर निकलना नहीं सामना करना सीखो
 अपनी   अंगुली को अपना सहा बना लो
 निकल फेंको अपने डर को
 फिर से नयी मंजिल बनो अपने
 मन अपने के अंध तमस में सफ़ेद लकीर खीच दो
 मिटटी में शक्ति और सोने की ताप को पिघला 
मत सुनो इस अंधी लूली लगड़ी  दुनियाँ की
 आस्था रखो अपने ऊपर प्रतिभा की कवच को
  कल कर नयाअवतार लो

गुरुवार, 20 सितंबर 2012

I miss him

......I thought I will be happy I have my so called MY Time but .......Nothing happen like that ..
I was just sitting in front of laptop with a 10,000 thought and face of my son in front of me ...really...I am blank and  even write a single word .Got up and do the cleaning chores but in that even if he ia @home we must be doing this that ...I am missing him..so much ..
Its been 2.9 years+9 mths of togetherness made me nostalgic and feel of emptiness in life.. it is tough. I am obsessed with him .. I reach school before time to pick him .and watch him from the window ...When  entered in the classroom he ran and the smile that he showed up I am a soaked and ...I have tears in my eyes I am missing him
I hate schools when I was kid because of homework getting up early and going there is tough task buses n all.Now I do not want my little one get exhausted ...........I mean I miss him ....I love home schooling I can be best teacher for him totally dedicated and devoted but his father is not yet convinced .
The mommy factor is working now .I am into his life so much he is now saying me bye with smile but i am still a criby mom .........
My all my time is in-vain of just ended up in making stuff for him I love you sweet pie ...(if he is @ home he must be saying I am Advit.)

शुक्रवार, 7 सितंबर 2012

I am soaked in motherhood............

I am soaked I a short of  words but my heart is filled with the --words of expression,childhood memories and best motherhood time .I am all soaked from the bottom of my heart to the core .Life has given me one of  the best gift  , my son -Advit. Daily we do new activities and his new exploring things make me feel out of the world. Even, I adore his tantrums.He copy my expression,my words,activities and what not ..It will be three yrs in nov but first when I experience him till date life has the biggest mood swing and I became what I can never imagine of myself to be ...He let me learn so many things, yes ..I learn from him ..his coming make me a new person- I crochet , blog, Bake, cook, polite,patient and lot of positivity..He is my buddy ..but I a mommy and that to a typical dominating mom and he is as cute as all son are..
  • I am so much thrilled when he learn what I say( I like to dominate ;))
  • If I put a medicine on my feet(as I got hurt ) he came and said ohh u r hurt mommy U need hug .
  • .sometimes he get hurt say ..I need Icepack (ohh really u know so much)
  • If I have tension on my face he release in a minute by saying are you okay mommy ?(awww..that means a lot)
  • If I am angry he says ....mommy ur so cute (flirt ..)
  • If he is crying for says I am cranky ..हम बहुत रोते  है/ 
  • Saying ...I can help you in whatever work I am doing
  • If anything happen against his wish he says  he/she is not cute ..
  • He greets elders  by touching there feet
  • Say Namsthe to his grandparents on phone
  • He says thanks and when he does something for me Before I says he says mommy say Thanks
  • In the park he just make a mess 
  • with Paint he make his dress and shirt in a new manner ..
  • I am soaked in love and affection of my child 
  • These days are some time is tiring and exhaust sometimes but these things are for 10 yrs only (may be even more or less)then there will be no more soak
  • I treasure them in collage/ hard drive/online and much more.Above all in the eyes n heart all things went like a movie .
Future is hidden but the present is so beautiful.I am not only mother, doing this but I am only mother for my son doing it  .I am ideal for him--this feel drench my heart and make me feel expressionless.The  trust love and affection of a child  on mother is so much I still need my mom I know her and love her even more .

शनिवार, 1 सितंबर 2012

बाबुल तेरी छाव को छोड़ चली में

Today is 1st September papa it's your B'day .Happy B'day papa ...I miss you I wan to be there for you ...but..Papa I write a poem for you ..this is what I can give it you ...with all the best wishes from the corner of my heart.

बाबुल तेरी छाव  को छोड़ चली में
बचपन की अठखेलियों  में साजी यादिएँ साथ लिए
तेरे प्यार की खुशबु को एक नयी दुनियां में फेलाने के लिए
 तेरी कहानियों की सीख से परये घर को अपनाने के लिए
हर कदम तेरी याद  मेरे साथ है
तेरे ही अक्स की हर शख्स में तलाश है
तेरी देहरी ने करा  मुझे पराया है
फिर भी  न जाने क्यों  तुझे ही पास पाया है
आँखों में तेरी छवी की कोई मिसाल नहीं
तेरी बिना  मेरी कोई  अगुवाई नहीं
आज इतने बरस बाद भी नेहर की याद से भीगा है मन
बरस बीतने पे असर गहरा  होत्ता है
न  तेरे पास थी  जब तुने मझे बुलाया
क्यों कर दिया मुझे इतना पराया ?
 अरसे से नेहर की याद  मन में छुपी है
नहीं कोई ठोर तेरे आस की बिना कोई नहीं इतना प्यार दे पाया
तेरे निश्चल प्यार ने बचपन की लड़ा ने-- नहीं होने देता है मुझे बड़ा
आज तेरे किस्से से मेरा  घर  महका है
मेरे जन्मदिन को कितना यादगार बनाया है
आज तेरे जन्मदिन मैंने सच्चे   मन से याद किया है
न जाने यह नमकीन आंसू  क्यों निकल गए
तेरी मीठी यादों को ही केक बना के सुखं पा लिया है
जो तुने दिया उसके बदले हमेशा के लिए दूर जाना मांग लिया है
इस रीत की दिवार में अपने प्यार को रोक लिया है

बाबुल तेरी छाव  को छोड़ चली में
बचपन की अठखेलियों  में साजी यादें  लिए//

मंगलवार, 21 अगस्त 2012

AM Turned LM

Marriage marriage Ahem!! ahem!! ahem !!

All things seems different and no matter its love or arranged marriage you are just the one same married person even the same dialogues and  same fight same grudges and same not any more single tag but wann be hot dude ..Present fashion is to keep the divorce letter ready for the first love and find the second love to get understand and them keep going till you are not able to understand ...........its like this because the married person is clumpy,itchy,insecure,cheap,complex,non talented,worst person on earth ever seen by the S(spouse) and incomplete from the perception of  S @the time of fight .During love time this that's why we are married HONEY(so much honey on tongue too )ILU for the time we see each other as love ......
hehehehehe Yes my fiend that's a summary of married life.
But still we are together we love we care and we fight .......
We reminded the best part of life when we met our S and then feel love and care for that moment and just say Alas!! That time is gone .....Reading the mails/sms/ of love times seems to be the most funniest thing ever done :D.
Any ways we get married LM even the insecurities are same might be less as compared to AM .But surely the "TANA" level is the same in both ...
Important thing is marriage not the LM or AM . AM are going to extinct soon as now kids have GF's/BF's .Never tell you kids or children then you have an AM, else you are outdated :( .So watch a movie and plan a love story covert your AM into LM.Keep your kids out of reach from those attend and can explain the details else see some tv serial and get any twist fitted in the AM turned LM.You are all set .I am waiting for a contest where I can post my AM turned LM Watch for it guys . We are so superb happy perfect couple Because of LM(I am trendy ;))


सोमवार, 20 अगस्त 2012

कलयुग की सीता सतयुग के राम

यही  मेरा मानना है भाई/बहिन  !!! कोई भला माने या बुरा पर यह सच है , राम कल भी वही थे उतने ही -शक्की,दुसरे के लिए भगवन पर बीवी के लिए ...दोस्त ही उनकी बीवी के मदद करते थे ..आज भी वही है ......:P कुछ नहीं बदला है बस ...जब सतयुग सीता थी ...जो दुनिया के सामने बोल नहीं सकती थी वो चुप चाप धरती में समां कर अपनी पवित्रता बता दी/ आज यही बदला है आज की नारी (सीता )  बस आदमी को उसके रूप में न अपना कर हटा देती है /
आज भी सीता माता पिता के घर  बड़े नाज़ से पाली जाती है उससे आज़ादी दी जाती उसकी सोच को घर का हिस्सा बनाया जाता है (यह मेरे मानना है।.) अपने पैरो पर खड़ा  होने देते है सोच दी जाती है अपनी अस्मिता की रक्षा और देखना सीखाया जाता है .वो लड़ पाती  है .शादी में उसकी सोच को तवाजो दी जाती है .लेकिन ......

शादी के बाद राम ही मिलते है... सतयुग वाले ..सबके सामने अपना प्यार का इज़हार आज भी नहीं कर सकते ,न ही अपनी गलती मान  सकते बीवी के सामने ,दूसरो पे बीवी से ज़यादा भरोसा, अपने गहर के अच्छे बुरे के बारे में कुछ नहीं सुन सकते ,अपने विचार आज भी बीवी पे थोपने होते है ,में को हम नहीं बना पते ,हर अहम्  की अड  में लिए अपने निर्णय पे  पछ्तावा आदत होती है ,आज भी अहम में बीवी पैर की जूती ही है  .......बस सीता को आवाज़ दे दी मन वो हमेशा सही नहीं होती ....पर ज़यादातर सही होती है आर परिवार के हित में होती है /

 आज भी दादी नानी सीता राम की जोड़ी बोलती है शादी के बाद .........लेकिन क्या सच में सीता चाहिए जो धरती में समां जाये ? जब मेरे बेटे की शादी होगी तभी पता चलेगा ......वसे मेरी छोटी कोशिश है कलयुगी राम न सीता

वसे किसी को मेरे विचारो से बुरा लगा हो में हाथ जोड़ के शमा चाहती हु ...यह नजरिया है मेरा ....(यह like करने वाली मेरी माँ होगी  )



शनिवार, 18 अगस्त 2012

Golden Rules to Start a Bussiness

  • Small Capital Investment   The capital investment should be according to the financial position of besides liabilities we should have some more
  • Work Hard  There is no shortcut of success . Work hard with a real good plan.
  • Prepare you mind   you should have a determination and adman to do it else leave it if yo have one percent doubt in it .Definitely the doubt/dilemma is going to win over you
  • Be Patience Speak less and hear more welcome as many suggestion as you can then sit relax and analyses .writing is the best practice you can do  to analyze your thing.
  • Small Level the level of the business does not depend on your confidence but it depends on the practical viewpoint
  • Do not Dump Your Product that means have a safeguard and planning to 
  • Make your passion your Hobby Hobby as your passion because the zest will make you work more intensely 
  • No Compromise with The Quality  The plan and the quality will not be compromised then only it will be more developed
  • Ready For the Competition  the competition in every field is very tough you will have the infrastructure
  • Work Out For the Quantity of the Product 
  • Intelligent Expenses Handling  The account
  • Be Confident and Clear about the 
  • Professionalism  May be you wish to involve some relatives but the things should be done on the professionalism of it.No matter who the person the policy and term should be clear and straight.
  • Work is work No compromise is needed when it is work time no casual and take it for granted thing should be there.
  • Get Set Go Plan bear and ready to go ahead.
Here are some of the ideas I can suggest : 
  • Hobby Classes 
  • Home food (pickle making, snack supplier in canteen,Masala Powder )
  • Jewelery Making 
  • Craft and art work 
  • Tailoring, stitching  and Embroidery
  •  Teaching Tutor
  • Baby Sitting
  • Writer
  • Iqebana 
  •  STD PCO and Xerox Shop 
  • Bakery 
  • Interior Design 
  • Event Management
  • Agent (Insurance,RD,FD etc)
  • Beauty Parlour and product making 
  • Packaging  
  • Event management
  • Mehandi
Chose yourself What you like and where you wish to go for before choosing just remember you need to make a strong and financially safe plan and mentally ready for all the work forget the word

बुधवार, 8 अगस्त 2012

कौन कहता है की वो हमसे प्यार करते है

कौन कहता है की वो हमसे प्यार करते है
हर लव्ज़ में एक शिकायत होती है
नज़र में नाराज़गी रहती है
कभी समय की शिकायत
 कभी काम का बोझ
न कोई छुट्टी न कोई धूम
बस एक नाखुशी सी रहती है
एक शिकवा रहती है जिसका कारण  नहीं ढून्ढ पाते  है
सब कुछ रहते हुए कुछ नहीं होता
सब  छुटा   छुटा  लगता है ..

कौन कहता है की वो हमसे प्यार करते है
हर लव्ज़ में एक शिकायत होती है
बातों से दिल तोड़ देते है
कभी मुह मोड़ लेते है
अकेले में हम घुटते रहते है
 ख्वाइशों  को नकार देते है
बात बोलने से पहेले चुप कर देते है
 सब टुटा टुटा लगता है ....

कौन कहता है की वो हमसे प्यार करते है
हर लव्ज़ में एक शिकायत होती है
दिल के गिला दिमाग नहीं मिटा पाता  है
मन के  द्वन्द छंद बन कर मंडराते  है
तुम्हारे प्यार में भीगने  के सपने थे
आज हम  बोझ  से लगते है
कोई  मौका नहीं छोड़ते हमसे नाराज़गी जताने का

कौन कहता है की वो हमसे प्यार करते है
हर लव्ज़ में एक शिकायत होती है
शादी की सालगिरह याद होते भी नहीं याद आती
अपने तोहफे काम सदा संपूर्ण हो समय पर यहे अस नहीं जाती
अपने गुस्से को भी प्यार का नाम दिया जाता है
प्यार जतना नहीं आता कभी नारी  का भी प्यार देखो
कपडे प्रेस करने से डब्बा बंधने में बंधे प्यार को देखो
गुस्सा करते खाना   बनाते देखो
बच्चे के  साथ पूरा दिन खाना ,कपडे,रिस्तेद्दर
सब निभना  असं तो नहीं
 बदले में क्या माँगा दो प्यार के बोल
क्या इसके भी काबिल नहीं हम

कौन कहता है की वो हमसे प्यार करते है
हर लव्ज़ में एक शिकायत होती है
काश मेरी बच्चा इस दोगले  पन   में न रहे
 नहीं फर्क वो जोर का गुलाम ही क्यों न कहलये
इज्ज़त देना और सम्मान बहुत ज़रूरी है प्यार के लिए
 जीवन में प्यार के बोल भी बहुत काम कर देते है
प्यार   प्यार चिल्ला कर तो  मिलता वो खुशनसीब होत्ते है 
महसूस  तो हो ही जाता है  एक बार कह दो तो रह आसन  हो जाती है

सोमवार, 30 जुलाई 2012


 दुनिया में हर पल कुछ नया पुराना होता रहता. हम एक ही जसी बातें होती रहती है हर पल कोई आता जाता है ..एक एहसास बनता है एक बिगड़ता है जीवन चलता  है और हमेशा चलता है .....हमारी दुनिया हमारे सपनो कभी सजते और सवारते ...परिवर्तन जीवन का नियम है उम्र और अनुभव के साथ यह भी होता ही है .....

उम्र  और मौसम के बहुत से पड़ाव ऐसे  होत्ते है
 जहाँ अकलेपन और नीरवता खलने लगती है 
एक्साम  वाल मौसम मन को  भारी करता है 
सब कुछ बुरा और अकेला लगता है
पेड़ के पत्तों के गिरने से हमे भी कहीं दुःख पहुंचता है
 पर उससे समझ नहीं पाते  मन  महसूस कर लेता है
दोस्त बेहद करीद आर अपने लगते है
माता पिता से बहत नहीं बन पाती
कभी चुप तो कभी खटपट हो ही जाती
कुछ काम सब ही करते है
कालेज से बंक  मारना ,थडी पे चाय पीना
पैसे बाँट के पिक्चर देखना ,पार्टी करना
सुन्दर लड़के लड़कियों  को छेड़ना
बुरी आदत को डरते डरते अपनाना
फिर जीवन एक नए मोड़ पे आता है
एक नौकरी आती है जो कभी मनमाफिक होती है
कभी मज़बूरी जीवन एक रहा पकड़ लेता है 

 जीवन में किसी की दस्तक हज़ार सपनो को जनम देती है
 और अपने सपनो के गुलफाम नए रस्ते पे निकल पड़ते है
जो बात माँ पापा हमसे बोलते थे वही हम बोलते नज़र आते 
अपने बच्चो के ईन समझ एक बार अपना जीवन फिर जी लेते है 
इस समय कलम ले कर लिख  नहीं पाते
हर काम से बेरुखी सी रहती है
 कुछ करने का मन नहीं होत्ता है यह सब  के साथ होता है ......

शनिवार, 28 जुलाई 2012

Tribute to rajesh Khanna

Eternal,endless and real stardom of the hero ...superstar of India ..his natural acting give the new heights  to Indian Cinema. His memories and movies are remembered always with due respect ...

गुरुवार, 5 जुलाई 2012


क्यों हम चाहते हुए भी मन की बातें बोल नहीं पातें .गुस्सा किसी  और पे ..उतरता कहीं और है ...अकेले में बैठ  कर सोचते या पन्नो पर उतरें तो किसी की कोई गलती नहीं होती ...या दोनों लोग गलती के भागीदार होत्तें है .....

बहुत सी अनकही बातें  की मायने तलाशना  चाहती हु 
एक परिवार को खुशियों  से लबरेज़ रखना चाहती थी
 सोचा तो बहुत कुछ  था  पर सब मिलता तो नहीं 
पाना और खोने की चाहत तो बहुत थी सब कुछ आया गया
तमनाये  तो बहुत थी पूरी होने की शर्त नहीं थी
आस पास की मशगुल ज़िन्दगी में दो पल कोई दे तो ख़ुशी होती है
 जो मिला वो  मेरी उम्मीद से  कही जयादा था
 चंद  ख्वाब  की तामीर का आसरा  है
उम्र का फासला दिनों में लम्बा लगता है
सालो में गिनने को काम पूरा करना मुश्किल हो जाता है
 तम्मना  तो अधूरी रह जाती है सबकी
असमान भी काम पड़ता है खवाइश  समटने के लिए
सब कुछ कहने के बाद भी अनकही रह ही जाती है
हर बार कुछ नया कहने के लिए ....

Its Fun ..to learn personality number ...

Personality Number 
Add the number in the day of month you are born .
Ex. 28 =2+8=10=1

Life Path Number :- Add your date of  birth
Ex : 28 nov 1979
1+9+7+9 = 26

Karma or  Wisdom Number :- Add your name and number
Ex :- R+I+T+U   K+U+L+S+H+R+E+S+T+H+A
         9+9+2+3    2+3+3+1+8+9+5+1+2+8+1

These are the number for each alphabet ...
1    A        J           S
2    B        K          T
3    C        L          U

4    D        M          V    
5    E        N          W
6    F        O          X

7    G        P          Y
8    H        Q         Z
9    I          R

Personal Year Cycles :- One birthday to today's day
Ex: 28th nov 1979 to today's date

सोमवार, 25 जून 2012

OMG--- Married

OMG the words meanings and sense is same in all the successful marriage relation in the world ...the level of satisfaction and depth of expectation is endless...its not me... its not u its us ..;)
" We are either alone or have the wonderful friend forever.. since the day we r married .. u miss ur life .. ur choice ..u are made for a thing that to be worth or not there is no one to decide for that ,even ur are clear to ur point but u can never explain it to any one ,where he/she is wrong.. having the feel of it, u know u get different opinion ....u start choosing and find there path most probable for u …..But still dialogue are same
I will give one year for the thing to happen the way they should ,I know I could never be understood by him/her ……………I know he do not even try to go for it ……………my work my feelings are not understood by him/her …he/she  has no interest in my interest …………. He/She never understood the time when I cry ………when I need a hand when I need help …we r same in choices but have different taste ……………I know I understand him/her but he always have complaints our intensities r different I m matching it but I can expect same support ………he/she is supportive he/she is very nice .I do not know how I m going to handle this .we r same but still different …………in many ways …………but I know one thing we love them firm the deepest corner of our heart ………."

Life is bundle of surprises ……
The turn u decide change its direction just by one action
U r turned by your own u r mold by ours
U r choices and arguments r use less
The bearing and baring of the part had been given in the particular formats
The style and the perfection have revealed inside one
The diplomacy and the simplicity merge in it
Swiftly fly the wings in the sky u see u r gone
Break the limits and shift to the part ur heart says .
Ur tears r always in vane ,u r work, ur  feelings r always vague
U r smile is fake  ,u r doing have no matter u r no where
Ur standings r exceptional,
Never unleash ur thought they have no respect no hearing
U r presence is ignorant ur bonds might go stronger
Both ends  they r compromising they sacrificing they r working on relation but all fake.....

सोमवार, 18 जून 2012

Eight years of father's day ---my papa

""Still If I need to say something to GOD is just Thank you for giving you ..It means a lot to us ...An ideal dad Who forget his pain when look at us ..May God take your pain away Forever ..... We know we are bhagwan ji's favorite childeren""

Eight years before --  a second had turned our life in the new zone .Never expected not heard not prepared .But by the grace of God we get the most precious thing back into our lives ---Yes My papa
A miracle after no sign of life,head injury,3 months of comma,excessive bleeding,delay in treatment,diabetes much more was beaten by the blessing and mercy on us .We have no word to thank and when Bhagwan want to keep things good and straight for you he did it.HE make ways and give the strength and choices .But the realization of this thought was now.. when we have passed the tough time .At that time the second seems to be like an hour and every day we wish we can hear something good but doctor had never given us positive answer till an year....today dr is happy to see him like this ..we were  in the hospital for 3 months and not seen a person survived head injury...it is scary and painful. we learn t lot of lessons we met the worst and best of life ..this is place where we are handicapped where nothing works and everything looks in vain..
There is a super power that work and capture the mind by building and aura over it.
I was neutral my mom was crying ..my sister and bro are shocked and everybody too..My tauji  with report carry reports all possible places for best treatment...we do all pooja and  consult best possible astrologer. I still remember face of fear in eyes of  my tauji and chacha the efforts they put.... the emptiness in there eyes  still remember when they look at my papa face as if pleading please say something........... we are not looking at each other we are hiding the pain from each other ..my mother hold me n said get me papa......I had those word is echoing in my ears till my father get back his voice. We have closed the gates to take papa else we are ready to go with him....
There are people who  came and said get married your daughter ...do not send your son to college (.....can you Imagine father is struggling with life and death) ...he was comma can he walk eat or do exercise
we get angry n annoyed  but mom n taiji  says may be we also react if it happen to someone else ...she was so true ...........yes may be ...!!
All elders have BP and diabetes they forget it ...my taiji she make 40 paranth and come to hospital at 8:00am (bravo!!)tauji awake till late night to switch the duty .My mom had sever pain of spondilites and BP and joint pain but she sleep on floor till papa was in ICU   My mamaji cancel his very important trip to Canada....everybody forget there pain .....people are flooding in the hospital to see papa .....Every day till 3mths I put tilak from different temple .his students are coming to see him.
I can see what my papa earned in his life.........I am so satisfied and confident that yes My father has to recover.We pray for opening and eye God Listen to us ..HE is just delayed to give power back in his left hand and leg I believe HE will.
My papa strength,positivity,healthy routine  and will power works miracle .A person on bed from so long must leave hope and get negative but My daddy strongest he respect life ..before accident he get up @ 5 and go for walk make morning tea (amazing taste)then evening walk. So fit exempt from bad habits.Teach student so that he can understand better..loving and caring husband and super dad .Can't see us working at all.still when we need peace and solution he is the best person to go with.Very practical and amazing sense of humor.Nurture with simplicity, grace and values.No fights ever but straightforward. He get so much love and give so much love .....
 My sis was in bathroom and my father called her she is coming and skipped on floor my dad forget his pain and ran to hold her and fell down get minor hurt on head but still asking my sister she is okay or not .....(do anyone can understand this love)
When I was getting married 4 days before my marriage he called and ask me "Ritu as soon as you r free come to me I want to talk to you" ..I was surprised ...Then he put hands on my shoulder and said   ""you are going to different place love them, respect them, do nicely whatever they ask for ..if you go to other country remember to spend accordingly.Know about the currency converter.Be happy n make everyone happy " These words always echo in my ears always.
We had a person who said what is the see of living life this but ask we don't explain them anything

Celebration and father's day means so much to me ever in my life.. I never thought for .. I gift my mother on women day mother day and her b'day as I want her to feel special and happy ...I do it for papa(that's what I call him ) on his b'day sometimes on father's day too .....My daddy strongest and very brave, healthy happy go lucky,early riser(get up @5 when I love to dream) and love us(my bro and sis too) so much.....that he cannot see us working instead he will work for u whether making chapati or cleaning utensil making early morning tea getting up early for revision and giving us tea was his job..ready our bottles and let us finish our breakfast....ironing our skirts .as he make better crease then my mom....respect women my mother my granny and we daughters.....really rare in those type papas but my papa help my mom in all her work my mom is working and he  help her and pamper her as needed also my mom never disappoint him @ any level the perfect couple so far I have seen  ..life was moving and all things are going with its pace ...suddenly the thing happen to us ...........
18 th JUNE 2004 early morning @ 6am  he has to rush for the train my father was had to catch the train ..he went and met with an accident and ..@ 9am  he was in comma .......his life chance are 1 % according to the doctor...we r stunt and shocked ..my mom was crying I lost my tears being local we have around 50 person at that time my chacha and tauji all with us and all are not prepared for it ...my  tears went off I do  not want to cry as I do not accept it at all ..I ask God if this happen I will be no more too.....My sister exams r on for graduation Ist yr....My brother got selected in good engineering college want to drop for IIT after 12 the ...my mom school is about to open my groom search was paced ......all things  stop for us the moment we heard the news we r insanely dumb and blank to react but definitely not ready to bear the loss....oxygen ,ryles tube,catherder, one more tube for blood pass through nose, blood ,dns ns etc.A normal human body turn into a machine shape
 19 th june 2004  early morning our relatives started coming to our place.We have close knitted big family at maternal and paternal side we r so many people at that time without words we r sitting My mom was crying holding  and telling me to get the papa back .......I am suddenly feeling ...my irresponsible brother gets big very big ..my innocent sister never touched kitchen work is cooking and entertaining guest in addition to her studies for exam..all relatives are helping to cook food .papa was not showing anything doctor look insane and adamant on 1 % issue .who bring the medicine from where no one knows
20th june 2004 .He went critical on 3rd days his pulse and body is not reacting he has continuous blood release and his body temperature want o cross 105 bt my chacha and his friend do his continuous ice cold packs for a complete one day in rotation ...my chachu gave him 2 bottle blood ..life seems to stop...the happening of ICU is puzzling all of us outside but I am not telling anything to my mother but she can make out from chachu working and the small window of ICU and my mother I can never forget it.I took charge of the medicine and all bills .I told the local medical shop to make an account for my father and we will pay at the end of the day
21st June 2004  papa open his eyes .we r happy but doctor was neutral.We have to sent the medical leave for my father.My gather her all power to meet the doctor(she is afraid the doctors,blood and injections) and this is first interaction of my mother and me with the doctor we are nervous,and blank..we three are there in the cabin then my mom said to sign the paper and for how long he will be recovered ...........he was so straight and said "recovered .......his life is in danger any minute he can.......he is comma may be whole life may be a week or may forever ..right now he is very critical only 1 % chance "............my mom and I was freeze he said this things.... my mom is not ready to believe   that there is something like this thing in the world I do not know where and what I am hearing God shielded me with dryness and neutrality...I am holding my mother ..all eagerly eyes r waiting for us to know what doctor said ...I am not crying my mother was in tears ...shivering and when we said whole thing all person were in tears and trying to support us ....
22nd June 2004  I told my brother sister whole situation .They are shocked but I need to prepare them I know we had grown 20 times the age we are God has given us strength and support of friends and relatives has given us confidence that we can face the situation well .
23th June 2004 God has mercy on us.. Struggling 3 months from comma we get our papa ...at least opening his eyes..on .papa condition was getting stable but it need to be stable for 2 weeks at least.Knowing the fact the comma situation all relatives decide to leave and come turn by turn to face the difficult situation.
28th June 2004   His oxygen was removed .but he was in ICU.we have accepted the situation .Things r so unpredictable we r around 6-7 person at a time but all are quite we r holding his hands all the time .My tauji speak OM every morning.Almost everyday I am using prayers and parshad for my father by his friend and family.
2nd July  He was shifted to room ...we have our personal room ..We  are still loaded with visitors whole day .My mother tears r now cause of concern he is getting really unstable.We tell or relatives to come in shift so that we can manage things well.They took turn
5 July 2004 My brother has to go for conselling .We went ...he just said my papa even he was in comma we r going to Delhi for conselling and touch his feet ......his whole body shake and respond it ..we r amazed .and he was confident he will get the good admission .
 20th July 2004 Me and my brother are sitting near holding his his hand I had pen in my hands .He took open and just move it in the as if he is writing now we believe he was listening to us.We are excited and tell it to our DR but he was so neutral.Just as if he do not care.He said as the swelling came down things will be better.
20August 2004 We r back home. As we enter in home papa had tubes I learn how to feed from ryles tube..then catherdarl he was still in comma .Lifeless eyes .....As we enter the gate he open his eyes ..My positivity grew up I am super happy my believe that he will be fine grow more strong
1- 5 sept 2004 we start to work with the homeopathic doctor Lokmani gupta Change in papa is quick he can see and recognize us ...1st was papa  b'day .We wished him....
29th September 2004 it was a blessing month 29th he recognized my mammiji ..he lost his voice so give him pen and paper to write .The homeopathic medicine did wonders .
 2nd October 2004 we appoint the physiotherapist still continued for him.
15 November 2004 Cathedral was removed
29 Jan 2005 He get the focal czar .I guess I skipped his medicine .As I use  give him medicine at that time.
16th May 2009 He was taken out of town for my sister's marriage  .He was happy and we are more happy and insecure for his acceptance social .We are happy .
Now ,we take him to the places which are convenient and easy to go my supermom take care of him we just visit them vacation.
 29th September 2004 he started recognizing and reacting towards us but he lost his speech.
So, far in this journey the life has shown me the various colors .We have the best and worst positive and negative of everything.To accept the person who is disabled it is still difficult in or country.
We have so many people to thank for.
Dr.Mamraj Agarwal
Dr Krishna Hari Sharma
Dr Lokmani Gupta
All nurses and staff of Baheti(Now Mattri) 
Hansraj Mehra
Physio Khan
Physio Rk Agarwal
Physio Khan
Mr Porwal n family
Mr Tiwari n family
Dr Tarey n family
Mr Jain n family
Mr Sharma n family
KV Staff for there generous support and  help.

All our Kulshrestha Relatives  for there kind support and help which is actual strength beside all work
These  thing we cannot ever return you ...but always respect and remember the work , help and concern confidence they had given us in the toughest n challenging part of our life .

I want to die before I see the day when my father thing he is burden on us.my ma is super ma ............you r doing which I can't believe I can do @ this stage ...

I request you all please when you a disable person and family always be positive they don't need your sympathy they need your positivity and appreciate them for what they did ..I have seen the fit people who are dying for sympathy keep it safe for them.........

शनिवार, 2 जून 2012


क्यों कोई किसी की उपेक्षा का शिकार होता है ?क्यों इतने मबुत रिश्ते की नीव हिल जाती   है ? क्यों  सच्चे प्यार को एक इम्तहान देना होता है ?क्यों आत ही क्यों है इन रिश्तों में.........इस "क्यों" को  हर जगह देखना इतना आम हो गया  है  ....? हम किस ख़ुशी को पाने की लिए अपने अस्तित्व को खतरे में डाल  रहे है ........

उस उपेक्षा की परिभाषा को कैसे समझू कसी
 किसी के अस्तित्व को सहलाऊ बहुत से लिबास है
बहुत सी आस है एक कोटे पे लिखी दास्ताँ है
 हम याद करते है जो पल हमारे  थे
आज  से पहले  सब कुछ अच्छा था
 कसे यह समझू तुम्हे   जो कभी मेरे थे
आज किसी और के हो
इस टीस  को कहाँ छिपाऊ
कभी  हम आपके विश्वास के पात्र थे
आज आपकी की नज़र के तलबगार है
क्यों कसे इस मोड़ पे आ गया जीवन नहीं समझ  पा  रहे है 
क्या  हम कमज़ोर  थे  या प्यार में लबरेज़ थे
आपकी आह!! को क्यों नहीं पढ़ पाए .
मेरी इस उम्र के लिए आपकी यादें काफी है ...
आपके इंतज़ार में पलके र हमेशा बिच्छी  रहेंगी  ...

रविवार, 27 मई 2012

एक ख्याल ..

 मुझे हमेशा "ख्याल" अपनेपन का एहसास देता है . में यहे जान नहीं पाती हर ख्याल मेरे मन में उथल पुथल मचा के जाता है और में हर बार उसे एक तरफ रख कर कुछ नया बनाने के सोच लेती हु .इस बार इसे मैंने कुछ हद तक पकड़ने की कोशिश की है .....

बदलो की तरह  आते जाते मिटते ख्याल 
हर ख्याल पे ध्यान दो और  वो प्रश्न बन कर
 कटघरे खड़े करते 
 खयालो को मायने न दीजिये  इनकी गति  न पूछिए 
इनके बहकावे में आ कर मन और दिमाग की कसरत हो ही जाती है 
कभी प्यार से सरो बार करते कभी गम को सागर में डुबो जाते यह ख्याल 
सतयुग  से कलयुग तक ख्यालो के महल बन गए 
छोटा सा लगने वाल ख्याल पूरी ज़िन्दगी नाचता रहता ..
कभी इसका ख्याल  कभी उसका ख्याल
 विचारों का रूकना और हमारा उन पर हमेशा ध्यान  देना
 जरूरी तो नहीं
कभी इनकी गंभीरता को भी अनदेखा  करना चाहिए
 मज़ेदार लगते यह ख्याल
अच्छे  ख्याल का ख्याल भी  गुदगुदाता है
 बुरे का ख्याल को चलता कर देना चाहिए 
खुश रहना ही ख्यालो में होंना चाहिए ...

शुक्रवार, 18 मई 2012

एक चरित्र

कोई कुछ भी बोले हम कितनी ही सदियों आगे निकल जाये लेकिन बहुत ज़रूरी अहम् भूमिका और सरथी को चलने वाली  की  इज्ज़त मान मर्यादा हमेशा कभी उसके द्वारा कभी किसी और की कारन उछाली जाएगी .तकलीफ इस बात की यह किसी भी देश या जगह की नहीं सोच की बीमारी है इससे हटना और मिटना किसी एक की नहीं सब की सोच की परिभाषा है ...इंतज़ार है जब यह सोच नयी दिशा में होगी ..

एक बार फिर बलि चढ़ी -लड़की की
उसी देश में जहां
दुर्गा  माँ की पूजा की जाती
पर सीता माँ तो  बदनाम हुई
अग्नि परीक्षा की लालसा में फिर एक बार बलि चढ़ी
यही तेरा इंसाफ है--- इश्वर
नारी को सिर्फ  एक चरित्र दिया
और उसके नापने के पैमाने औरो के हाथ में सौप दिए
 क्यों नारी को महानता  का गुण दिया जब इतनी नीच सोच बनायी 
 या तो नारी दी होती या यह सोच
ऐसे लोगो की बलि तो कभी नहीं दी
हर परीक्षा सिर्फ नारी के लिए रची
तुम भी स्वार्थी हो गए --भगवन
कलयुग की भेट तुम्हारी सोच चढ़ी
उस माँ को पुकार सुनानी ही होगी
कुछ नीच लोगो  को सबक देना ही होगा
कलयुग के साथ इन्टरनेट भी है तो जवाब तो देना ही होगा  
 निर्दोष नारी को आग में चलना नहीं उसके आंसू  ही बहुत कुछ बाय करते है
 क्या चरित्र दोष में नारी के कदम ही डगमगाते है
उस आदमी काकोई  क्या कसूर नहीं ......
क्यो इतना महान बनाकर नीच के बीच भेज दिया
कुछ तो इंसाफ किया होता
टक्कर तो हमेशा  साथ वाले के साथ होती है
नर मादा का खेल नहीं एक सोच तो दी होत्ती 
हनन और दोष के चक्र के नहीं डाला होता 

शुक्रवार, 11 मई 2012

रात प्यारी लगती है ...........

 रात में जब सारा संसार सोता हैकभी नीद कोसो दूर होत्ती है सिर्फ एक अनसु कभी जीवन की रफ़्तार कभी आपाधापी से तकभी तेज़ चलती ज़िन्दगी कभी धीरे चलती ...से शिकायत सी होती है .एक कोना थोड़ी सी तन्हाई  में बेठे रहना अच्छा लगता है . तब कुछ एक आईना  सा जीवन सी मुलकात लगती है दिल को सुकून रहता है ..

रात के सन्नाटे में अपनी तन्हाई  से कुछ यु  बात हुई
मन के गुबार और उफान में अफरातफरी ढेर उथलपुथल  के
बाद एक सुकून और तृप्ति आ गयी
जाने क्यों यह अँधेरा  अपना सा लगता  है
सुनी रात में नल के टपकने का एहसास भिगो देता है
सुई की आवाज़ से मन कही छुप जाता है
इन्टरनेट के ज़माने में भी कागज़ कलम  की रफ़्तार  को मात नहीं दे पाती
टाइपिंग को याद नहीं रखना चाहती वो तो बस बहना चाहती है

 भटके विचारों  को  शब्द  में पिरो कर कविता को जनम देती
सुर्ख स्याही में कितने  पन्ने लिखे जाते है
बिखरती सूरज की किरणे जब जगती है
तो जीवन की एक शांत  और दिल के करीब की सुबह होती है
 मन के गुबार और तन्हाई से मिली तृप्ति
पन्नो  पे उतारे अक्षर सुबह को जादुई बना देते
ऐसी  रात के सार्थकता नया अनुभव होत्ती है
जाने क्यों रात बहुत अपनी सी लगती है
बिखरी चांदनी तारों की छाव  में मद्धम रौशनी
मन के जज्बत्तों को बाया करना असं हो जाता है
 सूरज की किरण  में  मन खो जाता है
लम्बे इंतज़ार के बाद तृप्त नीद और सुकून की सुबह नसीब होती है
न जाने क्यों यह रात  अपनी सी लगती है

कुछ खट्टे मीठे पल बटने में बहुत होती है
अपने अक्स सी मिलवाती सुबह का चोला नीचे होता और सुहानी धुप का स्वागत
के बाद इसी रात प्यारी लगती है 

जीवन की आपाधापी मे इतना  खो गए 
अपनों से बातें करना भूल गए 
स्याह रात कभी  नीद चुरा लेती है 
अपनी बाँहों में  लेकर नयी दुनिया में ले जाती है 
में उस अकलेपन को पसंद करके खिल जाती हु 
 रात  को  सहेली मान लेती हु 
चंचल मन को बांध की चाह  नहीं रखती  यह रात 
अपनी समझदारी पे हंसती और  पे रोती  
हमेशा साथ बना ही    लेती यह रात 
रात भर एक सिलसिला चल जाता 
फिर सुबह को नया बनाने के लिए 
जीवन का एक फलसफा बन जाता है 
यह इतना हँसी  नहीं पर हर रात आंसू  के बाद सुबह रंगीन हो ही जाती है 
काले स्याह हो बादल  भी होते है  पर उनको भी छाटना  होता ही है