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रविवार, 27 मई 2012

एक ख्याल ..

 मुझे हमेशा "ख्याल" अपनेपन का एहसास देता है . में यहे जान नहीं पाती हर ख्याल मेरे मन में उथल पुथल मचा के जाता है और में हर बार उसे एक तरफ रख कर कुछ नया बनाने के सोच लेती हु .इस बार इसे मैंने कुछ हद तक पकड़ने की कोशिश की है .....

बदलो की तरह  आते जाते मिटते ख्याल 
हर ख्याल पे ध्यान दो और  वो प्रश्न बन कर
 कटघरे खड़े करते 
 खयालो को मायने न दीजिये  इनकी गति  न पूछिए 
इनके बहकावे में आ कर मन और दिमाग की कसरत हो ही जाती है 
कभी प्यार से सरो बार करते कभी गम को सागर में डुबो जाते यह ख्याल 
सतयुग  से कलयुग तक ख्यालो के महल बन गए 
छोटा सा लगने वाल ख्याल पूरी ज़िन्दगी नाचता रहता ..
कभी इसका ख्याल  कभी उसका ख्याल
 विचारों का रूकना और हमारा उन पर हमेशा ध्यान  देना
 जरूरी तो नहीं
कभी इनकी गंभीरता को भी अनदेखा  करना चाहिए
 मज़ेदार लगते यह ख्याल
अच्छे  ख्याल का ख्याल भी  गुदगुदाता है
 बुरे का ख्याल को चलता कर देना चाहिए 
खुश रहना ही ख्यालो में होंना चाहिए ...

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