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शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

Tom n jerry of couple started
So the world should have enough laugh no matter they do same behind doors ... 



Deal become my deal n your deal hugged bugged relatives gets there teams 
Bitching backbiting 
strength become weakness 
beauty become beast 
The faith is convineance
Temper is specified 
Culprit is one 
Blame game begins 
Cheat, shatter, hurt ,pain ,agony depression is same 
No guilt ,no respect ,no love ,full lust 
Hate is must 
Hate in relation relatives n sight 
Anger,frustration n aloof of the world 
If u donot earn  ur gone 
Ur judged , insulted ,ruined but work 
Be the tag of being married not impotent not looser ...
Have a maid , anger spitter, kids to prove potency, one sided orgasum 
Bear the crap have a fight for relatives whom u rarely met ...effect ur kids 
Waste your time energy n money get ready for the next day with same thing find new topic 
Bribe to take away kids or home 
 Happy anniversary 

बुधवार, 30 नवंबर 2016

प्रश्नचिह्न

कुछ याद  से में  जुदा होती नहीं
इस तरह मुह मोड़ के चले जाओगे कभी सोच न था
हमारी  दिवार  थे हर लम्हा बहुत याद आता है
हर मुश्किल हर  आपको  साथ पाया है
हमारी बहुत सी तकलीफ में  आपको पास पाया
बड़ा  सदमा है आपके  होने का
कभी सोचा न था
इतना सा  साथ होगा
बस यह सोचा न  था

अर में फिर

थोड़ा थोड़ा छोटा छोटा मेरा सपना था
आज बिक्र हुआ एक  पन्ना है
बड़ी उम्मीद से घर में आये थे
आज तिनका तिनका बिखरा है
थोड़ा थोड़ा गम तो बदरदस्त भी था पर यह गम तो
न पी सकते है जी सकते है
ज़रा सोचा होता मेरे बारे में
क्यों इतना बेकार बना दिया

जीवन का कोई मतलब होता तो अच्छा होता
आज हर मोड़ पर पलटवार कर देते हो
क्या कर क्या सोचु क्या बनु
शायद एक प्रश्न चिन्ह है मेरा जीवन
जिसमे जब मोड़ पर रुकने लगती हु
 आगे खाई आ जाती है
 में फिर धकेल दी जाती हु
इतनी कठिन डगर  होगी सोचा था
 जीवन प्रश्नचिह्न  माँगा न था

मेरे हर निर्णय पर कभी में  प्रश्नचिह्न बन गयी
जब जवाब माँगा  तो  उत्तर में  प्रश्नचिह्न बना दी गयी
न्याय है या अन्याय ऊपर वाले से पूछो
में तो एक निर्णय हु जो  प्रश्नचिह्न की तरह घूमता है





गुरुवार, 24 नवंबर 2016

Perfect Road trip

For me the perfect road trip will be when my kids and husband also the other friends enjoy it to the fullest.I love to travel also drive but I have  limitation when my kids are there the weather , there holidays and company and health are the main consideration before planning a trip .But still my passion for travel is nonetheless but I have a big list always ready to travel. Most of my trip are planned after kids even a day before but before that I have many random trip too.Trust me the fun is same in both just the company matters a lot . Some time alone sometime with the company both are fun .
I have a so much of the love  the trip was from SFO to LA in  USA .We just decided to move a day before.We pack everything. It  was summer but weather was just awesome and perfect for drive. My son was 1 and half @that time .We do not have to stop @rest area so many time just 2 halts in the 6 hr drive is sufficient .

बुधवार, 23 नवंबर 2016

एक सपना था शादी का


एक सपना था शादी का जो सपना होता तोअच्छा हो था
शादी केअच्छेपन को लेकर बहुत कुछ सोचा पर समझ न पाये
दोनों एक ऐसे रिश्ते में है पर एक बोझ सा लगता  है
खुश रहना बहुत मुश्किल लगता है
सालबिते।। दिन बीते। बच्चो की आपाधापी में जीवन बीता
पुराने सारे लड़कियां  की पोथी बन आई
न तुम सुधरे न मैं
न तुम अपना पाए न मैं 
जो सच्चाई के फेरे थे वो गुम हो गए
सच्चे मन से न तुम थे न मैं
जिसकी है यह कीच कीच झिक  झिक
का  मतलब समझ  न आया
न यहे तेरे घर  न मेरा घर होता है
 हमारा घर भी न बन पाया एक कोने में तुम रह गए एक में मैं
बिखर है हर पल हर पलछिन

 छोटी किलकारी में बीत  रही है रात
कभी हालात ठीक नहीं होते
बस एक कोना होता है
कभी बिस्तर का, कभी घर का ,कभी साडी के कोने का
माँ भी सिसकी समझ नहीं पाती ,
जिसकी वजह से लड़ाई  होती  वो तो होता ही नहीं
कभीमेरे रोने कीबात नहीं दिल को छल्ली करने की बात है
जो मैंने किया वो कम था ,जो करता वो ज़्यादा था ,
काश ऊपर वाले का हाथ मुझ पर भी होता , यह भी एक रंज है
तेरे हर आंसू की कीमत देनी पड़ी
तेरी हर दर्द का हिसाब करना होगा
इसकी कीमत लगाई नहीं जाती

उससे जवाब देना
तेरे दर्द की डोर को में न  समझ पाई
उन आंसू कि कीमत कोई नहीं लगा पाया
काश में इस दर्द को मिटा पाती
तू भी एक औरत है में भी एक औरत हु
तू भी तनहा है में  भी  तनहा हु
फ़र्क़ है तुझे तनहा किया जानबूझकर  कर
साजिश के तहत

आज कहाँ है जो  धूम धाम से डोली ले गए थे
बड़े गर्व से बहु बेटी का नारा दे रहे थे
बहुत आसान था बोलना छोड़ दो
 आज छोड़ दिया तोह कही के न रहे

जो निबाह गए वो हैरान क्यों यह हो गया
आज जो आसान था कहाँ से मुश्किल हो गया
एक कदम चले एक में खुद बा खुद दो हो गए
थोड़ा तुमने सोचा  थोड़ा मैंने सब हम हो गया
कभी विचार एक नहीं थे पर चलते चलते
कभी तुमने मिला लिए कभी मैंने
और रास्ता मिल गया

आज कोई मतलब नहीं कोई वास्ता नहीं
न दोनों का एक रास्ता सही
तुम भी बहुत गलत हो गए और में भी
आज सब की राहे  अलग है
मेरे तुम्हारे अलावा
हमारी चाल एक है
मन एक है
पर हम तुम एक नहीं











बुधवार, 19 अक्तूबर 2016

मैं

छिप छिप के में जीती हु
कभी घूम हो जाती हु कभी फिर जी उठती हु
कुछ बिखरे  पन्नो सी  खुद में गुम  सी
बदहवास इस हालत को समझते अपने अंश को खो कर
जीने के कोशिश में हु

अपने को भूल कर नयी खोज में
बहुत से नयी उम्मीद पर फिर जीने को हु
किस दुर्भाग्य की छाया  के तले  हु
अपने अक्ष को भूल कर
जीने की कोशिश में हु

बहुत समझया पर समझ न आया
आज फिर एक बार ऊपर वाले पर बहुत गुस्सा आया
दीवार  पे सर मर कर कुछ हुआ है कभी
हम कठपुतली थे कल आज भी
कलयुग में सब उल्टा पलट गया  उसके हाथ में डोर दे
जीने की कोशिश में लग गया

छिप छिप  कर जीना चाहती हु
कोई देख न पाए
कोई छू न पाए उस जगह जाना चाहती हु
बस बहुत हो गया
फिर से नयी जगह छिप जाना चाहती हु मैं
बड़े अरमानो से लिखे थे गीत कुछ पन्नो पर
बेहरहमी से कुचल डाला  है उनको
किसी की आस में इतनी मजबूती नहीं
फिर भी अपने अक्स को नहीं पहचान चाहती  हु मैं
कोशिश  जीने की कारण चाहती हु मैं

तोडा तो बहुत है दुनिया में
खुद को जोड़ना चाहती हु मैं
कभी मेरे लिए जो दरवाजे ढूंढ  
आज किसी का रास्ता बनाना चाहती हु मैं
जीने की कोशिश करना चाहती हु मैं
बुनने तो बहुत कुछ सपने
आज उन सपनो पर गाज बनाना चाहती हु मैं
फिर जीने की कोशिश करना चाहती हु में

हर बार उठ कर चली तो हु
आज बिखर  गयी हु मैं
छोटी सी उम्मीद से कुचल  दी गयी हु  मैं
थोड़ा थोड़ा तिनका तिनका जोड़ा था
फिर तूफान से घिर गयी हु मैं
कोशिश छोड़ कर सां गिनाने लग गयी मैं



शनिवार, 24 सितंबर 2016

फिर में दीये की बाती बन जल कर रह जाती

औरत को मदद करने के लिए बहुत से हाथ उठते ,बहुत हाथ भी उस पर 
उठते है। पर औरत ने किस पर हाथ उठाया है? 
कौन कौन हाथ उठते है?पर हमेशा नाकामी का सेहरा औरत के 
हाथ होता है। 


फिर में  दीये की बाती बन जल कर रह जाती। 

ज़रा थोड़ा ठहर कर मेरी तरफ भी देख लिया होता 
मेरी निरिहि आँखें  एक आस से तुम्हे देख रहे थे 
दिमाग ने बार बार कहाँ नहीं होगा 
पर मजबूर दिल तुम्हारे तरफ चलता जाता। 

क्या माँगा था ?क्या  चाह  था ? 
तुम समझ नहीं पाए ?

या जानभूझ कर मुझे नज़रअंदाज़ कर गए?
कुछ है नहीं इस जीवन में 
बस उस दिन का इंतज़ार है जब में भी तुहारी इन बातों को नज़रअंदाज़ कर पाऊँगी 
नहीं ह तुम्हारा हिस्सा नहीं तुम मुझे में हो 
क्यों  बंधे है ?कैसे बंधे है? 
काश सब छोड़ के चल दू 
नहीं कर पाती। 

फिर में  दीये की बाती बन जल कर रह जाती। 

माँ से बतलाया ,उसने अपना दुखड़ा  सुना दिया 
अपनी जीवन के पलों को गिना दिया। 
सखी ,से की मन की  बात 
उसकी परतों ने मुझे हिला दिया। 

हर औरत ने यह देखा है किसी रूप में 
क्यों अपनी बेटी को कोई रोक नहीं  पाया ?
 
एक जीवन में अपना धर्म सिर्फ  औरत  ने ही किया 
बस बेटी के लिए अपना धर्म भूल गयी 
उससे अपना दुखड़े की मिस्साल सुनाइए और चुप करा दिया 
बस यही और कुछ नहीं.... 

शनिवार, 19 दिसंबर 2015

मेरी आत्मा तो मर गयो बस में जी रही हु
क्योकि में मर नहीं सकती
मुझसे मेरी हसी छीन  ली
मुझसे मेरी जिन्दगी छीनने की कोशिश की
और अब तोह मेरे संसार पर बुरी नज़र डाल  दी
क्या कहु दुनिया  से बहुत खुश थी अपनी ज़िन्दगी से
अरमान सजा डाले थे दुनिया में
एक झटके में मेरे संसार को मिटने की साज़िश कर दी
मैंने भी अपनी आत्मा मर दी
अब कभी नहीं जी पाऊँगी सब से मुक्ति प् ली
न कुछ अच्छा है न बुरा न कुछ ज़रूरी है न मायने
न कुछ स्वर्ग है न नरक
न दोस्त है न दुश्मन
बस हम अकले होते है अकेले रहते है
न मोह है न माया
बस कुछ बेड़ियां है छोड़ के चले गए है
अपने जीवन में न चाहत होती है न वो मरती है
बस हम जीते रहते है क्योंि हम मरते  नहीं है
रिश्ते बंधन सब बन जाते है अपनी ज़रूरत से काम आ जाते है
सब एक साज़िश है दुनिया केनियम को मने के उससे ऊपर उठ जाओ
अपना अस्तित्त्व सिर्फ दूसरे की सोच से नहीं स्वय  से है
उस स्वय  को हम बनाकर बहुत कुछ करना होता है


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