शनिवार, 29 दिसंबर 2018

 फ़िज़ा का   रंग अजीब था मेरे  मन में नए  नए ख्याल आ रहे थे 

अजीब से हसीं  बार बार होठो पे आ जाती  में समझ रही थी 
माँ न देख ले , इसलिए कमरे  से निकल नहीं  थी या उन्हें टाल रही थी 
राहुल , मेरे दिल  करीब है उससे देख कर मेरी दिल की धड़कन बढ़ जाती थी वैसे सबकी बढ़  जाती थी 
शायद  उम्र का असर था  दिखने में मामूली और बिलकुल साधरण रंग रूप। और आँखों पे सब बहुत अच्छा बोलते थे । 

पढ़ने में भी बहुत होशियार नहीं थी पर मन मे एक  की  चाहत तो थी ही-- अच्छा हमसफ़र मिले। 
राहुल देखने में सुन्दर नहीं थे ,पर मन मोहक थे आज के रिश्ते नहीं जो पर में बिखर जाये। मेरे ज़माने में जीवन भर साथ का लगता था 
उसकी आँखों की कशिश  उसकी तरफ खींची चली जाती थी 
सब काम साथ साथ हो रहे थे  
कभी कभी  साथ में बैठते रिपोर्ट और प्रोजेक्ट केलिए 
साथ ढूंढने लागे एक दूसरे का बस यु समझना अच्छा लगने लगा धीरे धीरे मै  करने  थी 
 इतने  अच्छे से केमिस्ट्री  पढ़ते थे 
सब कुछ अजीब लगता था
मन बहुत करता था बोल दू पर नहीं बोल पायी 
ज़िन्दगी चलती रही 
करवा गुजरता गया 
नज़र मिली और लगा वो भी मुझे उसी नज़र से देखता है पर मेरी भूल थी जीवन  हमेशा की तरह खाली लग रहता 
अजीब उधेडबुन में मन लग गया था 
हर कोशिश हर क्लास जिसमे साथ हो कोशिश चलती रहती थी 





मंगलवार, 25 दिसंबर 2018


कभी कुछ  बोलने पे रहने पर कुछ तो बोल दिया जाता है 
कभी कुछ गलत दिवार खड़ी हो जाती है  
बस  मेरी  ज़रूरत  एक  ही  समय होती   है ..उसके बाद में जियूं  या मरू तुम को  क्या ?
इतना चिलाने की ज़रूरत नहीं ....................तुम्हारे अन्दर किसी चीज़ को समझने की शक्ति नहीं .......तुमने जीवन में आज तक किया क्या .........
हाँ अब तुम्हे क्यों... मेरी काबिलियत पे विश्वास  होने लगा ....अब मुझे में बचा क्या है ...एक बच्चा होने के बाद सब कुछ पहले  जैसा  तो  नहीं होता न ...............
बस,, फालतू के फितूर है तुम्हारे दिमाग में और कुछ नहीं 
हाँ अब तो सब फालतू का होगा ........आज तक शादी के बाद से हमने कुछ ढंग की बात की है क्या ......?
कभी मेरे शौक या मेरी पसंद जाने की कोशिश के हमेशा मुझे बुरा ही ढूंडा है ..............
तुम शादी से ही ऐसी  थी ............
ओह्ह्ह !!!अब शादी सी ही ऐसी हो गयी .............सह है तुम्हारी  बेरुखी मेरी बीमारी में मुझे नज़रंदाज़  करना ......बच्चे  को अकेले पैदा करना उसे पलना उसी शुशु पोट्टी रात भर साफ़ करना बीमार होने पर दवा देना ...तुम्हे खाना , कपडे घर सब ठीक करके देना 
बस एक खाना बनती हो उस की धौस देती रहती हो .......मत बनाया करो खाना ..............इतना कमाता हूँ  की अपना खाना ला सकू .......
हाँ ...... सब काम करवा लिया करो पैसे दे कर मुझे घर भेज दो ............
हाँ........  क्या बच्चे  को पला है सब करते है बिना बोले तुम्हारी तरह नहीं, दिन रात पागल की तरह चिलाती  रहती हो 
.........हाँ, मैं अब पागल सिरफिरी सब लागुगी  ही .......................क्योंकि  तुम्हारे बारे में तुम्हारी अनुमति  की बिना बोल रही हूँ  ....................आज तक किसी ने ऐसा  नहीं बोला मेरी लिया ..............
न ही मेरी लिया ....................तुमने सिर्फ अपनी बातें मुझ पर थोपी है अगर ,अपनी बात बोली होती  तो शायद सब अच्छा होता पर हम दोनों एक ऐसा  जीवन जी  रहे है  ...जहाँ   कोई  प्यार कोई  नहीं है बस दुनिया  को दिखने और अपनी ज़रूरत पूरी करने की लिए तुमने मुझे अपने पास रख रखा है .................इतनी बुरी थी तो शादी क्यों की ...?
पता नहीं था इतना विकराल रूप है तुम्हारा ................
हाँ ,क्यों नहीं तमीज से रहना हो तो में विकराल ही लागुगी ..............तहज़ीब यह सब तुम्हारे बस  कहँ ...जब तक तुम्हारी बात मानु , सब ठीक बस ज़रा सा ,तुमसे मेरी सोच अलग होते ही घर में कलेश और  कलेश की में जिमेदार ...वाह  वाह  !! अपना पुरुषवा बरक़रार रख  पा रहे हो ...संभल के देखो बच्चो  को एक घंटे।। फिर आना मेरे पास बहुत असं है मेरी परवरिश में कमियां निकलना ..........कभी खुद के अन्दर झांक के देखना 


और  फिर आज वही  बात हो गयी हमेशा की तरह  एक दूसरे  के साथ लड़ते रहना
आज मैंने बहुत  गोर से सोचा की लड़ाई क्यों होती है मेरी इतनी लड़ाई कभी किसी  के साथ नहीं हुए क्यों इतने अलग है हमारे  विचार .
शिप्रा की शादी उसका पति कितना  हव्वा था इस बात का सबको लगता था बहुत अच्छी गृहस्थी     होगी इसकी लेकिन यहे बिलकुल  ज़रूरी नहीं , जिसकी दुनिया में हर किसी से निभे वो पति के साथ भी अच्छे से निभा ले . मैंने पूरी कोशिश की लेकिन यहे यकीन  दिलने में नाकाम रही . मैं जो दूसरो को बताती थी कैसे  निभाना चाहिए  पति के साथ आज वो ही अपने रिश्ते के साथ एक बच्चे और दुनिया की खातिर जुडी है ..नहीं यहे दो कारण बहुत नहीं है मैं  आज भी प्यार करती हूँ  या रहना चाहती  हूँ , से उतना नहीं थोड़ी से कमी आये होगी ...पर वो मुझे आज भी कहीं से भी बुलाये में उसके पास आ जाउंगी........ उससे दूर रहना मेरे वश में नहीं ..शायद   वो इस सच को जानता है इसलिए ........यह सहीं नहीं है पता नहीं पर मेरी शादी एक सफल शादी में नहीं आती जैसा  की सब सोचते थे
हम दो दिशायों से भी ज़यादा दूर है

अभी तो शरुवात  थी ....न जाने क्या क्या देखना था / सिर्फ जाने भर की बात थी और इन बावल ..बस सिर्फ देने देने की बात बाकि कुछ नहीं ....न मेरी पूछना  न मेरे बच्चे की पूछना  न ही कुछ और बस ननद को दे दो देवर को दे दो ..इतना जोर जोर से बोलते है हमेशा लेने ही लेना कभी देना नहीं  तो ऐसा कहीं नहीं होता ....इतना मांगना लेना देना और भी पाता नहीं क्या क्या
..इस वजह से मेरे और मेरे पति की बीच में कितनी लड़ाई होती है किसी को क्या बताएं ...दो दो दिन तक बात नहीं होत्ती ....मेरे बच्चे का कोई पार्टी नहीं बस अपनी ही अपनी ...वो भी ठीक है पर इतनी उम्मीद गलत है ......अगर एक कमाता है तो इतना दे नहीं सकता उसकी अपनी फॅमिली ही बच्चे है ऑफिस के हिसाब से खर्च करना पड़ता है ...जब सस्कर और रसम रिवाज़ की बात होती है ..अगर समय पर नहीं किया तो बाद में क्या करने की ज़रूरत है?अगर करना है  तो सिर्फ छट  ही क्यों बाकि सब क्यों नहीं पर आजकल लोगो को समझना बहुत मुश्किल है कुछ समझना ही नहीं चाहते ...
वैसे अगर तेरा पति तेरे हिसाब से सब करता है तो ठीक है तुझे चुप रहना चाहिए वर्ना सब जगह  हो जायेगा। वो ज़रूरी है सब टेंशन कम करने के लिए  खास तौर  पर अपने पति का टेंशन काम करने के लिए


और  फिर आज वही  बात हो गयी हमेशा की तरह  एक दूसरे  के साथ लड़ते रहना
आज मैंने बहुत  गोर से सोचा की लड़ाई क्यों होती है मेरी इतनी लड़ाई कभी किसी  के साथ नहीं हुए क्यों इतने अलग है हमारे  विचार .
शिप्रा की शादी उसका पति कितना  हव्वा था इस बात का सबको लगता था बहुत अच्छी गृहस्थी   होगी इसकी लेकिन यहे बिलकुल ज़रूरी नहीं जिसकी दुनिया में हर किस्सी से निभे वो पति के साथ भी अच्छे से निभा ले . मैंने पूरी कोशिश की लेकिन यहे यकीं दिलने में नाकाम रही . में जो दूसरो को बताती थी कसे निभाना चाहिह्ये पति के साथ आज वो ही अपने रिश्ते के साथ एक बच्चे और दुनिया की खातिर जुडी है ..नहीं यहे दो कारन बहुत नहीं है में आज भी प्यार करती हु राहुल से उतना नहीं थोड़ी से कम्मी आये होगी पर वो मुझे आज भी कहीं से भी बुलाये में उसके पास आ जाउंगी उससे दूर रहना मेरे वश में नहीं ..शयाद वो इस सच को जानता है इसलिए ........यह  सहीं नहीं है पता नहीं पर मेरी शादी एक सफल शादी में नहीं आती जैसा  की सब सोचते थे
हम दो दिशायों से भी ज़यादा दूर है 

अभी तो शरुवात  थी न जाने क्या क्या देखना था / सिर्फ जाने भर की बात थी और इन बवाल  ..बस सिर्फ देने देने की बात बाकि कुछ नहीं ....न मेरी पूजा न मेरे बच्चे की पूजा न ही कुछ और बस ननद को दे दो देवर को दे दो ..इतना जोर जोर से बोलते है हमेशा लेने ही लेना कभी देना नहीं एसा तो कहीं नहीं होता ....इतना मांगना लेना देना और भी पाता नहीं क्या क्या
..इस वजह से मेरे और मेरे पति की बीच में कितनी लड़ाई होती है किसी को क्या बताएं ...दो दो दिन तक बात नहीं होती  ....मेरे बच्चे का कोई पार्टी नहीं बस अपनी ही अपनी ...वो भी ठीक है पर इतनी उम्मीद गलत है ......अगर एक कमाता है तो इतना दे नहीं सकता उसकी अपनी फॅमिली ही बच्चे है ऑफिस के हिसाब से खर्च करना पड़ता है ...जब संस्कार  और रसम रिवाज़ की बात होती है ..अगर समय पर नहीं किया तो बाद में क्या करने की ज़रूरत है अगर करना है  तो सिर्फ छट  ही क्यों बाकि सब क्यों नहीं पर आजकल लोगो को समझना बहुत मुश्किल है कुछ समझना ही नहीं चाहते ...
वैसे  अगर तेरा पति तेरे हिसाब से सब करता है तो ठीक है तुझे चुप रहना चाहिए वर्ना सब जगह लड़ाई हो   जायेगा /वो ज़रूरी है सब टेंशन कम करने के लिए  खास तौर  पर अपने पति का टेंशन काम करने के लिए

जीवन में बहुत सी बातें  होती है जो जीवन को बोझिल  बनती है ....बहुत सी बातें  हमने ..अपनों से दूर कर जाते है ...रिश्ते में बहुत सी चीज़े पीछे छुट जाती है सिर्फ मिठास ही रह जाती है ...आपसी रिश्तों की महक बनाना 
   जीवन  में तनाव हर किसी में होता है .....हर रिश्ते में मनमुटाव और प्यार दोनों  की गुँजइश ....होती है ................फर्क सिर्फ सोच भावना समझने का होता है ...तनाव चाहे मन, तन या  समाज का हो पर जीवन में एक हद तक ज़रूरी और सहन करने लायक होता है .........काम का कभी  समर्पित करने अपने कभी अपने नज़र में

 सोच बदलती है और  सृष्टि  का नियम ..नदी, पर्वत, सागर, मन , कर्म,आत्मा,परमात्मा ,समय, कुछ भी स्थिर नहीं है     जीवन सब चलायमान   है मनुष्य के साथ में जीवन और द्रष्टिकोण   बदलता है   उम्र परिपक्वता के  साथ

किसी के साथ बिना सम्मान के साथ रहना मुश्किल है बहुत .......शादी के बाद हर जाने को दिक्कत रहती है , जो इन्सान मिलजुल कर रहता है पहले जिसकी हर बात पसंद आती फिर वही बात नापसंद हो  जाती है ..........


आज  जिस  फैसले पे हम आ गए है वो निहायती घटिया है ............
अलग रहना एक घर  में उस इन्सान के साथ जो आपका  जीवन साथी है ..कसे संभव है ....पर ..मीतु तुने यह किया कैसे  किया ?
शिखा किसी को मत बताना ..........गलती से मेरे मुह से निकल गया 
यह सब  शिशिर ने मुझसे कहाँ  सिर्फ देवन  को नहाने के लिए बोला क्योंकि हमने कहीं जाना था   ..लेकिन इतना सुना दिया मुझे भी गुस्सा आ गया इन्होने कहाँ  यह मेरे साथ नहीं रह सकते , कहाँ  .....   ठीक है हो  जाओ  अलग ..और प्री दिन कोई बात नहीं इन्हें लगा ऐसे ही है ...पर मैंने बात नहीं की देवन को डांट दिया ...फिर बोला देवन को  में ही रखूँगा में बोला रख लो ............
उस दिन  कुछ जयादा होगया था मुझे शिशिर बोलते रहे--- तुम ऐसी हो शरू से तुम वैसी हो बस मेरे बारे में सब उल्टा--- क्या करू बस आंसू निकलते रहे अब कुछ नहीं बोलती-- तुम सही में गलत तुम नहीं रह सकते जिसके साथ रह सकते हो रहो  ...न रहो ...अगर तुम इतना  ही जानते हो  तो अलग होना  ही  ठीक है ..........मुझे यही एक रस्ट्स दिख रहा था मैं सच में शिशिर को खुश देखना चाहती हूँ 
हर काम उनकी पसंद से करने की कशिश करती हूँ 
पर बिना बात की घर वालो की उम्मीद और ताने नहीं  सह पाती ..मैं बोला देती हूँ   ......उनकी बेटियों पे जब आयेग तब पता चलेगा ...........हम दोनों को अलग करना चाहते है पता नहीं अपने बेटे की ख़ुशी नहीं बर्दास्त  होती .....बेहद लोभी लोग है ......या आजका   सब बुरा लगता है ...घर के पास में नहीं बोलती वो गलत है या सही पर बहु बुरी ही होती है .....
पता है ..शिखा --मैं आज तक नहीं जान पाई की शिशिर को मुझसे क्या परेशानी है ............वो सब के साथ अच्छे से बात करते है खुल के पर मेरे साथ शब्द काम पड़ जाते है ................हमे लोगो से मिलना घूमना पसंद है ...शायद वो खुद को जानते नहीं .........या में गलत हूँ  
मीतु एसा नहीं हो सकता तुने जिसके लिए ज कहाँ वो सही है ............इतना भी अपना आत्मविश्वास मत खो .....हाँ वही ..शिखा ...मेरे आत्मविश्वास कम हो रहा है मुझे लगने लग मुझे कुछ नहीं आता अजब्की शिशिर हमेशा आखिर वक़्त बताए है कहीं जाना हो या किसको को आना हो मैंने इनके हिसाब से बनया अपने को पर यह इतना सा भी नहीं समझे कभी आखिर वक़्त इन्हें कुछ नहीं लेन को बोलती ......पर शायद अच्छे मैनेजमेंट से इन्हें की फर्क नहीं पड़ता बचपन की आदत है .घर में सामान खरीदना  से लगा रहे इन्हें अच्छा नहीं  लगता ......मुझे उसे भी कोई दिकात नहीं  है..पहले खुद ही नौकरी छुडवा दी अब ....मुझे किसी भी लायक नहीं समझते ....दांग से जेबखर्च  नहीं देते दुनिया और समाज से डरते है ...............इसलिए असं तरीका था मुझे घर में एक आया के रूप में रखना ............ताकि खुद की इज्ज़त इस समाज  और घर वालो में बनी रहे और मेरे घर  वाले तो मुझे शिशिर से प्रेम विवाह के कारन नाता तोड़ चुके  थे ....किस मुह से जाती ........नौकरी छोड़े हुए इतने साल हो गए ...पता नहीं मिलती या नहीं इसलिए मेरे पास यही एक तरीका था ...जब तक में कहीं अच्छी नौकरी और देवन का कर्चा उठा पाती ....
तुम रह रह हो ......
हाँ सारे नियम  मैंने लगा दिए और हम रह रहे है ....में सारा काम कर देती हु .......देवन का ..इनका ..इनके घर  वालो से बात नहीं करते  बिलकुल नहीं ...अपने तो अब रहे नहीं ........यह जो रुपये देते है हर महीने उससे गुज़र बसर  होता है ...........जल्दी ही में अलग हो जाउंगी ........बस दुःख है तो यह अपने लिए एक फैसला लिया वो भी गलत निकला और देवन को एक आम जीवन नहीं दे पाऊँगी ........बस.... यही सब है ..तुझे याद है जब मैंने ...स्मिता  को समझती  थी ...........अपने पति को समझ और भी बहुत से लोगो को समझया आज खुद अपनी गृहस्थी  नहीं समेट प्  रही हु खुद की नजरो में दोषी लग रही हु  











वन को  इतनी गहरायी से लेना कब शरू किया मुझे याद नहीं ....में कलम से कैसे जुडी  समझ पाए ...शायद छोटी उम्र तरह तरह के लोगो  से मिलने के कारन ...उनकी  समझने की   बातों को समझने..       की कोशिश करना जीवन के सबक  समझने में मदद मिलने लगी ....परिवर्तन और उसका चुप चाप जीवन में आना जाना लगा रहा ...मेरा खानदान बहुत बड़ा था ...आज थ लोग सुन कर भी दर जाये ...मेरे दादी दादाजी दुनिया के महान लोग थे ज समर्पण        संतुस्ठी की मूरत थे ...उनका जीवन बाकि समाज और लोगो पे समर्पित  था.....इतना विशाल दिल किसकी की कभी  बुराई नहीं........में भी उनके जसी बनान चाहूंगी ..../ चार  ताऊ, चार चाचा, दो बुआ, ........ कुल मिल कर दस बच्चो का लम्बा   चौड़ा खानदान......................दादाजी       सबसे  छोटे उनके सात  ने भाई .........जिसमे दो ने शादी नहीं की............वो भी दादाजी के साथ रहते थे.............




बुधवार, 28 नवंबर 2018

Universe has it's plan !

Universe has own plan for everyone on this planet or the existence of soul karma with time is getting more clear
I did post graduation in computers so that I can work in a big company and have own cabin .Having lovely dresses and purses leaving a blaze of perfume .
But being from Kota and parents are teachers living in the hub of coaching centers I was destined to do be where I am .
My neighbors have the coaching classes they need science and maths teacher they ask my father but my father is an government employee so, he refuse to work but I told uncle that I can do .
He told me to take class next day I said "yes "I know for the fact my father was bit upset but still I joined as there was no time to react fro anyone {reveal :- grab the opportunity}
I was in graduation I went to find good coaching classes for my sister in physics, where I met one Sir he told me to teach few maths and science classes for the kids in 9th and 10th .I have to go visit four times a week just for an hour  and make paper and that but condition was kids should accept me as teacher.I was so happy and feel confident .When my father told me not to go and focus on study ..I explained him I am very average kid and already have enough time to work everything ..this was the first time I get to know how much time a days really holds for me .
My pocket money was good and father couldn't argue more and also I get decent marks this year than previous year.{explain and make sure fulfill the promise that can be fulfilled}.
Also the benefit of living in small place
A tragedy in home made me leave everything and one day my neighbor came to me and ask me to teach her daughter I was super surprised to know that a KG kid need tut ions I was very reluctant to take but as she is my neighbor and I do nothing in evening I accept it .I hold her in my lap and teach her to my utter surprise she is awesome and followed me like anything.Also ,my handwriting was worst before but she has the best handwriting so far I am so proud of her .{I reveal :- teacher's handwriting does not matter always}.Also,My classes at home started because my father met with accident and I was more than happy to teach for sometime and get money as well .
Time was hard but I have less time to focus on it {Revelation :-problems/obstructions are part  how to deal and try to overcome will make difference in outcome}
I start doing online studies and take classes in the evening.
All sorted Life was moving and I get the chance to work with renowned people and there company was an enlightenment to me {there is always so much to learn}.The aura itself was positive and so much more to watch and learn I still have the best of habits to capture and enjoy

I evolve as a person and enjoy the money and work balance that was the key to my work .
I saved some i spend some and everything is fine
I went to States and life halt until ,y own son grown to a n age than I made a group of kids and do a day of story time ,dance they made a sweet card for me .I feel blessed {I am so much in peace and totally a different person when it comes to make them teach}
Again, I establish my own classes or learning center in India .I run it successfully for five yrs that again a new journey calling me to start fresh .
 I feel blessed and thank GOD!for whatever I have I know I have angel looking out for me to solve my obstructions .
I am very satisfied and accomplished in the content I am doing my part.


खोकला

पता नहीं क्यों आज बहुत मनं उदास था । ऐसा  लग रहा था की क्यों हमेशा उसके साथ ही ऐसा
होत्ता है। क्यों , कोई उसे समझ नहीं पता उससे अपने होंने होने का एहसास करना होत्ता है । यह चौथी बार है, जब उसे अपना छोड़ कर नया बनाना पड़ा रहा है आज तू उसे सांत्वना  देना के लिए भी शब्द नहीं है सही है यह मन किसी  के वश में नहीं होत्ता और जब किसी के वंश में आता है तू कुछ नहीं कर पते ,बस देखते रहते है दूर से तमाशा फिर वह पुराने दिन याद हो आए जब हम दोनोए सहेली मज़े से घुमा करते थे  अपने  जीवन के रंगीन सपने बुनते थे उसके पास तो रोज़ बातों  का पिटारा  होता था क्योंकि वह निरल से बात करते थी मुझे उसकी बातें सुनाने में मज़ा आता  था पर वह , उससे दस साल के प्यार को ठूकरा  कर चल गया उसकी ही की सहेली रिया के साथ ,वो तीन साल तक इस गम  से नहीं निकल पाई  वो  लड़का जिसके लिए उसने अपने परिवार ,पढ़ाई  सब उसके मन के हिसाब से किया वो  उससे छोड़ के चल गया उसका अपने  पे कोई वश नहीं था पागलो की तरह अपने  कर्तव्य निभ रही थी माँ पिताजी की देखभाल अपनी बड़ी  बहिन की पढ़ाई सब देखना था उसे ,निरल ने   बस कहाँ  दिया अगर उससे शादी करी तो  उसकी माँ जाने से मर जानने की धमकी दे रही है ,यह धमकी  शीतू भी दे सकती थी ,पर नहीं वह नहीं क्योंकि  उसने कभी उसके साथ  बुरा बर्ताव नहीं किया सब सीममें रहा
फिर जैसे  तैसे  जीवन को सही रहा पर लाइ की सके पड़ोसी ने ही उसी घेर लिया .और  महीने बाद वो  भी कहीं जॉब के लिए चला गया और वही के लड़की से सगाई कर मोहित ,शीतू से छोटा  था चार साल पर इतना प्यार था  शायाद शीतू सारी उम्र  नहीं  भूल पाएंगे एक  दूसरे को  पर जसे उससे निकला जीवन से की कभी मिला ही नहीं कोई जन पहचान नहीं मेरा दिल करता था गलिया दे कर मरू पर शीतू सब को माफ़ कर देत्ती थी
सब को शादी की चिंता बड़ा रही थी ,लड़के देखे जा रही थे पर उससे कोई पसंद नहीं आता जो आता उससे मिलने का बाद शादी नहीं करना चाहती  जैसे तैसे एक अच्छा लड़का ढूंढा   ने सगाई हो गई रोज़ फ़ोन पर बत्तें शरू हो गई 
पर अपनी बहिन के यहाँ  रहने गई तो उसके देवर का दिल आगया इस पर ,और यहे भी उसी पसंद करने लगी ,और  सगाई तोड़ दी
जब अजय से शादी की बात की तो उसे माँ पापा राजी नहीं हुए और वो  भी मुकर गया ,यहे शीतू  का तीसरा झटका  था ,अब उसका सब पर से विश्वास उठा गया और उसके घर वालो का उस पर से पर यहे सब मन है जो बावरा होत्ता है ,उसका प्यार जैसी चीज़ से मन उब गया सब छोड़ कर दुसरे शहर  चली गई साल भर  बाद उसकी माँ ने एक जगह उसकी सगाई कर दी , उसने भी चुप चाप बिनकुछ  पूछे शादी कर ले बढ़िया घर अच्छा लड़का सब कुछ अच्छा था इस बार उसकी माँ ने होने पे बात नहीं करने दी ही शीतू ने कुछ  कहाँ शादी से दस दिन पहले बात की सब सही लगा ,धूम धाम से शादी हो गई
शीतू राम गई सब भल गई पर होंनी को कुछ मंज़ूर था उसका पट्टी साल बहर की बेटी हनने के बाद बोला व्हो किस्सी और को छठा है ,शीतू फिर अप्पने बच्चे के साथ अकली हो ली
कभी पलट कर किसी  से नहीं  पुछा उसकी क्या गलती थी हर रिश्ता इतनी ईमानदारी के साथ निभाया  , पर आज उसके  पास क्या था ? कभी किसी  जिमेदारी से मुँह नहीं मोडा पर सब ने उससे मुँह  मोडा लिया लेकिन आज वो  बड़ी लेखिका है और कालेज में अपने डिपार्टमेन्ट की हेड है कोई कमी नहीं आज भी कई लोग उसके पास आते  है शादी के लिए पर इतनी मज़बूत हो गई है की सब का सामना करती है फिर हसीं के साथ ज़िन्दगी जीने लगती है मुझे ख़ुशी  है आज में उसके पास गई आज  शहर  में जहाँ हम साथ थे पर उसका अकेलेपन कोई नहीं समझा सकता कोई नहीं जान  सकता इतनी ईमानदारी से कोई जीवन नहीं  जी  सकता आज उसकी माँ को दुःख है की बात क्यों नहीं करती पर तब सबको लगता था इसका कोई इमां धरम नहीं है
आज सब उसके घन घन  करते है  पता नहीं  खोकला  क्यों  समझा है