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सोमवार, 20 अगस्त 2012

कलयुग की सीता सतयुग के राम


यही  मेरा मानना है भाई/बहिन  !!! कोई भला माने या बुरा पर यह सच है , राम कल भी वही थे उतने ही -शक्की,दुसरे के लिए भगवन पर बीवी के लिए ...दोस्त ही उनकी बीवी के मदद करते थे ..आज भी वही है ......:P कुछ नहीं बदला है बस ...जब सतयुग सीता थी ...जो दुनिया के सामने बोल नहीं सकती थी वो चुप चाप धरती में समां कर अपनी पवित्रता बता दी/ आज यही बदला है आज की नारी (सीता )  बस आदमी को उसके रूप में न अपना कर हटा देती है /
आज भी सीता माता पिता के घर  बड़े नाज़ से पाली जाती है उससे आज़ादी दी जाती उसकी सोच को घर का हिस्सा बनाया जाता है (यह मेरे मानना है।.) अपने पैरो पर खड़ा  होने देते है सोच दी जाती है अपनी अस्मिता की रक्षा और देखना सीखाया जाता है .वो लड़ पाती  है .शादी में उसकी सोच को तवाजो दी जाती है .लेकिन ......

शादी के बाद राम ही मिलते है... सतयुग वाले ..सबके सामने अपना प्यार का इज़हार आज भी नहीं कर सकते ,न ही अपनी गलती मान  सकते बीवी के सामने ,दूसरो पे बीवी से ज़यादा भरोसा, अपने गहर के अच्छे बुरे के बारे में कुछ नहीं सुन सकते ,अपने विचार आज भी बीवी पे थोपने होते है ,में को हम नहीं बना पते ,हर अहम्  की अड  में लिए अपने निर्णय पे  पछ्तावा आदत होती है ,आज भी अहम में बीवी पैर की जूती ही है  .......बस सीता को आवाज़ दे दी मन वो हमेशा सही नहीं होती ....पर ज़यादातर सही होती है आर परिवार के हित में होती है /

 आज भी दादी नानी सीता राम की जोड़ी बोलती है शादी के बाद .........लेकिन क्या सच में सीता चाहिए जो धरती में समां जाये ? जब मेरे बेटे की शादी होगी तभी पता चलेगा ......वसे मेरी छोटी कोशिश है कलयुगी राम न सीता

वसे किसी को मेरे विचारो से बुरा लगा हो में हाथ जोड़ के शमा चाहती हु ...यह नजरिया है मेरा ....(यह like करने वाली मेरी माँ होगी  )

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