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सोमवार, 30 जुलाई 2012

अजीब

 दुनिया में हर पल कुछ नया पुराना होता रहता. हम एक ही जसी बातें होती रहती है हर पल कोई आता जाता है ..एक एहसास बनता है एक बिगड़ता है जीवन चलता  है और हमेशा चलता है .....हमारी दुनिया हमारे सपनो कभी सजते और सवारते ...परिवर्तन जीवन का नियम है उम्र और अनुभव के साथ यह भी होता ही है .....

उम्र  और मौसम के बहुत से पड़ाव ऐसे  होत्ते है
 जहाँ अकलेपन और नीरवता खलने लगती है 
एक्साम  वाल मौसम मन को  भारी करता है 
सब कुछ बुरा और अकेला लगता है
पेड़ के पत्तों के गिरने से हमे भी कहीं दुःख पहुंचता है
 पर उससे समझ नहीं पाते  मन  महसूस कर लेता है
दोस्त बेहद करीद आर अपने लगते है
माता पिता से बहत नहीं बन पाती
कभी चुप तो कभी खटपट हो ही जाती
कुछ काम सब ही करते है
कालेज से बंक  मारना ,थडी पे चाय पीना
पैसे बाँट के पिक्चर देखना ,पार्टी करना
सुन्दर लड़के लड़कियों  को छेड़ना
बुरी आदत को डरते डरते अपनाना
फिर जीवन एक नए मोड़ पे आता है
एक नौकरी आती है जो कभी मनमाफिक होती है
कभी मज़बूरी जीवन एक रहा पकड़ लेता है 

 जीवन में किसी की दस्तक हज़ार सपनो को जनम देती है
 और अपने सपनो के गुलफाम नए रस्ते पे निकल पड़ते है
जो बात माँ पापा हमसे बोलते थे वही हम बोलते नज़र आते 
अपने बच्चो के ईन समझ एक बार अपना जीवन फिर जी लेते है 
इस समय कलम ले कर लिख  नहीं पाते
हर काम से बेरुखी सी रहती है
 कुछ करने का मन नहीं होत्ता है यह सब  के साथ होता है ......

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