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रविवार, 30 जनवरी 2011

यु तो













मज़िलो को कई  बार पुकारते देखा है ,करीब  से जब पुकार वो बहुत दूर निकल गई
बड़े अरमानो के महल खड़े  किये ,एक ईंट भी नहीं रख पाए
कदम को उत्सह से बढाया , एक  निशान ही नहीं छोड़ पाए
खुद को उड़ने  के लिए तैयार  किया है , हवा से रुख ही नहीं मिला पाए
कभी पिंजरे में बंद किया , कभी कोई दरवाज़ ही नहीं खोल पाया
छटपटाय पंखो को झड दिया है ,हवा के काम तो आएगा
आंख खोल नहीं पाए ,बंद आंख से सब अच्छा लगा रहा था
थोड़े थोड़े  में बहुत किया है बहुत  में नहीं कर पाए
समझदार से तोह निभा गए ,नासमझ के सामने टिक नहीं पाए
मुर्ख समझा तोह कमाल  दिखा गए ,होशियार होकर  दब गए
आज विपरीत शब्द के मतलब सही माये में समझ पाए ..................
Aakhiri Manzil (Novel in HINDI)

मंगलवार, 25 जनवरी 2011

यादें











कितनी खुबसूरत सी होती है यहे यादें
कभी दादी की यादें
कॉलेज की मस्ती की वो मीठी यादें
कभी किसी के जाने की कडवी यादें
आपस में गढ़माढ होती यादें
आज घूमते हुए जगह के सुन्दर द्रश्य की बनती यादें
 इन्ही लम्हों  को याद में पिरो कर ,कल की  बनाने  वाली  यादें बनाने के लिए
जीवन एक फ्ल्मि में कैद हो जाता
हर बार हर वक़्त के साथ  समय का परवर न होता
जीवन सी सीढ़ी चड़ना असं लगता है
उतरती उम्र में यह  यादें असं कर देती है
फर्क तो बस कभी यह रुला देती है कभी हँसा देती है
कभी धुंधला  जाती है  कभी हीरे सी चमकी रहती है
रह रह के बढ याद आती है
हर पड़वा पर किसी न किसी की ..........................................


बुधवार, 19 जनवरी 2011

यह रास्ते













यह तक से वह तक का  रास्ता है
कैसे  सवरेगा जहँ से चले हे वही के वही है
न जहँ बदल  पाए न खुद को
एक ही रास्ते पर रहकर सड़ गए
बहुत  कुछ सोचा  खुद के लिए पर कुछ कर नहीं पाए
आज भी तनहा है कल भी तनहा थे
कुछ भीड़ से भरे  रास्ते  भी सुने लगते है
तनहा चलने की आदत हो गयी भीड़ में भी अपने पराये  लगते है
अपने पराये के मुख नहीं  मिला पाते सब एक भीड़ ही  लगते है
बहुत सोचा था एक जहाँ के लिए आज तो सब सपने लगते है
शायद ख़ुशी के मायने और परिभाषा समझने में जनम लग जाते है
किस्मत को क्या कहें अपने मन पर ही विजय नहीं पा  सकते
सोचा तो बहुत कुछ था पर उसको ही अमल में न ला सके
इसको अपनी हार कहे या अलस या किस्मत इसका भी जवाब न दे सके ...............

शनिवार, 15 जनवरी 2011

कुछ कुछ कभी कभी











तुम मिलो तो ही तुम्हारा निदान चाहती  हु  --मेरी परेशानी
सब  मिटना चाहती हु -- बुराई, दुःख. गरीबी ,अनाथ
सारी दुनिया को दिखाना चाहती हु --- अपनी काबिलियत
हमेशा  बाटना चाहत हु -खुशियाँ ,यादें,हँसी
जीन्ददिली से जीना चाहती हु -- जीवन
सुधारना चाहती हु --  गलितियाँ खामियां
रंगना चाहती हु -- सपने ,दूसरो  का जीवन
सम्मान करती हु -- देश का ,इन्सान का ,चाहत का

सोमवार, 10 जनवरी 2011

माँ की कल्पना

मेरी सारी दुनिया तुझ में समयी
तुने ही  जीवन के एक खूबसूरत पहलु से मिलवाया 
नहने कदम के आहट से तेरे आज तक के सफ़र ने मुझे भिगोया
अपनी माँ को भी हर बार प्रणाम  किया
तेरे बिन मेरा जीवन था अधुरा
तुने कर मुझे सपूर्ण
मेरा प्यार बेटा मेरे आँखों का तारा
तेरे बिना मेरे कोई अरमान नहीं
जीवन में तुझसे भी  मेरी अब  पहचान  हुई
अपना अक्स अपनी  चाहत को तेरे में देखा है
अपने सपनो को तुझ मैं समेटा है
तेरी मुस्कान ने दी है नयी  परिभाषा
माँ के अस्तित्व की कल्पना भी सोच से परे है
बिना  इसका सुख भोगे नहीं समझ  पाओगे 

सोमवार, 3 जनवरी 2011

यह रिश्ते


पल पल के नाते है हर मर्ज़ के बाद बदलते नाते
कभी आगे बढ़ते कभी छुटे जाते है यह  रिश्ते !!

थोड़ी थोड़ी खुशी  गम से लुकाछिप्पी  करते
मुस्कराहट  आंसू के बीच जंग  छेड़ते आगे चले जाते यहे रिश्ते !!

पीछे मुड कर दिख  जाते है पर पकड से छुट जाते
कभी किसी को देख ताज़ा होते  यह रिश्ते !!

पल  में बिखर  के जुड़ जाते है
नाजुक सी डोर  से बंधे यह रिश्ते !!

मन मफिख निकल पढते है यह रिश्ते !!
कितनी बार ढूंढा है गलियों  में इन्हें  तब नहीं मिलते

अनजान मोड़  पे टकराते यह अनोखे रिश्ते !!
उम्मीद से बढ कर है यह रिश्ते

जीवन की तरंग जागते यह रिश्ते !!

उम्र के साथ बनते बिगड़ते
अजनबियों में बनते जन्मो  की रिश्ते !!

क्यों  टूट/छुट  जाते है  रिश्ते ?

शनिवार, 1 जनवरी 2011

नववर्ष की हार्दिक शुभकामना २०११

नववर्ष की हार्दिक शुभकामना  २०११

आते जाते पल में झपकते  साल को हर बार देखते है
अच्छी यादें  संजो लेते है बुरी से कुछ सीख लेते है
मन में भगवान और इस तन को कुछ लोगो  के काम में आये एक जतन कर लेते है
सुख शांति और समर्धि रहे
देश आगे बड़े और जीवन के कार्य सुचारू चले और क्या मांगू में भगवान से
सदबुधि  दे !!
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