यहे एक अलग ही सुख है जो यदि जीवन में हो तो जीना असं होंने लगता है । क्यों ? इसका मतलब और प्रश्न का औचित्य वोई बता सकता है जो इसे अनुभव करे , चार औरत की मजलिश सुनिए .......इतना हेअमोग्लोबिं बढेगा की बस दवा से भी काम नहीं होगा .........
अपने दुश्मन का काम अटक जाए , ए़से ठंडक कलेजे को मिलेगी जसे की तरबूज गर्मी में । यहे ज़रूरी नहीं दुश्मन मतलब आप जिससे बात न करे ...दुश्मन मतलब आप बात तो करे बहुत प्यार से और मन ही मन में जलन के करना एसिडिटी हो जाए वोई बस दुश्मन मिल गया आपको ।
पड़ोसी ने टीवी ले लिया ,उसका बच्चा मेंरित मरीं आ गया ,नौकरी लग गई ,दिवाली के ज़यादा सामान आ गया ..........इसके बाद जो आपकी बीवी ,बच्चे का चिचिदापन होगा वो तो झेलना ही पड़ेगा... उनकी मनोस्थिति आप को समझनी चाहिए ठीक वसे ही होगी... जेसे आपकी ऑफिस के दोस्त का प्रमोशन होंने पर या अच्छी बीवी मिलने पर , अच्छा दहेज मिलें ,घूम आए ,बीवी रोज़ खाने में पकवान रखे ,बॉस ज़यादा भाव दे, लेडी स्टाफ ज़यादा आए ....जो तकलीफ आपके मन में होत्ती है ठीक वैस ही होत्ती है ..अब आसानी होगी उनके जस्बात समझने में ...
पि.न.एस यहे सुकून हर किसी को नहीं मिलता इसके लिए आपको थोड़ा जस्बाती औरो दूसरो से ज़यादा जुड़ना पड़ेगा ....उनके सुख दुःख की हर ख़बर रखना .......अपना कन्धा हमेशा देना और पीठ पीछे बहुत बुराई करनी होगी ।
अगर यहे सब करने से आपको अच्छा लगता है तो बस आप यहे सुख भोग सकते है ।
बचपन से इसके लक्षण आपको बच्चे में डालने पड़ते है ....आपको सीखना पड़ता है जसे अगर किसी बच्चे के पास अच्छी चीज़ दीखे तो उसे तोड़ दो , घर आ कर उसकी जिद करो ,जिसका जो सामान अच्छा लगे बाकि बच्चो को बोल कर उसका वो सामान तुड़वा दो उससे तंग करो बाकि बच्चेओ को साथ मिलकर मजाक बनायो वगेरह -वगेरह । बस बड़े होकर वो आपकी उम्मीद पर खरा उतरेगा और पि.एन .एस का आनंद ले पायेगा । और यदि लड़की है, तो एकता कपूर के सारे सीरियल दिखा दीजिये सब ठीक हो जाएगा घबराने की कोई बात नहीं ...ससुराल में आपका बहुत नाम करेगी ..तुलसी या कुमोलिका यहे आप उसके ख़ुद चुनने दीजिये ..वसे में जानती हु माँ का दिल बेटी को परेशां नहीं देख सकता इसलिए आप उससे कुमोलिका ही बनाना चाहेंगी ..बाकि आपकी मर्ज़ी ।
पि.एन .एस हर तबके के परिवार में पाया जाता है ..आमिर गरीब,मध्यम वर्गीय । बस तरीके अलग होत्ते है
...गरीब में -- तेरे पास खोली /चाल/झोपडी है,खाने को भर पेट खाना है, सरकार से दो बार फ्लैट मिला है जो बेचा है , तेरी बीवी भी चार में काम करती है कमाती है, बच्चे कूड़ा बिन कर लाते है , अच्छा गता है तेरा बच्चा, तेरे चार बच्चे है भगवन तेरे साथ है , तेरे पास शराब जुआ और पिक्चर देखने के पैसे है ............
आमिर का पि.न.एस --तेरी बीवी की शौपिंग,क्लब के मेम्बरशिप ,अख़बार में नाम आना , बच्चो का बिगड़ना ,गाड़ियों की संख्या ,शोव्बिज़ का हिस्सा ,जल्दी जल्दी पार्टी देना, घुमने के लिए फॉरेन ट्रिप , माँ बाप को हॉस्पिटल में रखना साल में एक bar मिलना ,एक बार पहने हुए कपड़े दोबारा नहीं पहनना , अफैर होना ,स्पा पार्लर का खर्चा उठाना , शराब जुआ खेलना ,बड़ा बंगला होना,छोटे छोटे कपड़े पहनना , डिजाइनर कपड़े और हर सामान (जूते ,बटुआ ,स्मिले ,नाक ,पति/पत्नी ,बच्चे) ,कित्ती पार्टी ,चैरिटी के नाम पर कोई भी संस्था राम भरोसे खोलना और पब्लिसिटी करना, प्रेस्स्कोंफेरेंस करना ,औटोग्राफ देना ॥
यहे सब करना होत्ते है पि.एन.एस के लिए वसे अगर घर वालो का पि.एन.एस हो तो मज़ा आजाये ...पर शर्त है की घर बादहोंना चैहिये और कमरे काम ॥ एक बहु जाए तू दुसरे की बुरे दूसरी जाए तू तीसरी की .....और बस तृप्ति पि.एन.एस की मिल जायेगी ...सका बच्चा हमारा कह्र्चा हमरे घर वाले में लाडली बहु hu ,मेरे anne के बाद पसिसा आया .......यहे लिस्ट कभी ख़तम नहीं होगी ।
यही होत्ता है पर निंदा सुख (पि.एन.एस )
बस ,चलते चलते कुछ ख्याल अपनी छाप छोड़ जाते है। कभी कविता कभी कहानी बन जाते है , यह कला है ,मुझे आयी नहीं पर विचारो ने मुझे लिखने पर मजबूर कर दिया। इस गुस्ताखी के लिए माफ़ी
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मंगलवार, 8 सितंबर 2009
बुधवार, 15 जुलाई 2009
पति पत्नी
एक पति ---काश एसा न हो
1। अपने हिसाब से मुझे बदलना क्यों चाहती हो तुम? मैं डार्क ब्ल्यू ट्राउजर के साथ क्रीम कलर की शर्ट पहनना चाहूं तो क्यों अड जाती हो कि लाइट ब्ल्यू शर्ट ही पहनूं? साथ में आरोप कि मुझमें तो कलर सेंस है ही नहीं?
2. टीवी पर क्रिकेट चल रहा हो तो साक्षात यमलोक की दूत बन जाती हो। जब-तब आंखें तरेरकर यूं जताती हो, जैसे मैंने गुनाह कर दिया हो। तुम्हारे सास-बहू वाले सीरियल देखने पर मैंने कभी एतराज किया क्या?
3. मेरी मां आएं तो तुम्हारे चेहरे से इतनी बेचारगी झलकती है मानो दुखों का पहाड टूट पडा हो। तुम्हारी मां आ जाएं तो खुशी रोके नहीं रुकती। मैं ही घर में मेहमान बन जाता हूं।
4. करवाचौथ का व्रत क्या रखती हो, साल भर उसी का ताना देती रहती हो। मैं जो खाना समय पर न बनने, जल जाने के कारण रोज दफ्तर भूखा जाता हूं, उसकी कोई परवाह नहीं!
5. टीवी वाली कुसुम या कुमकुम ही तुम्हारी आइडियल हैं। उनकी जैसी साडी या ज्यूलरी ही चाहिए तुम्हें। फैशन पर तुम्हारी डिक्शनरी फादर कामिल बुल्के को भी मात कर दे। शुक्र है खुदा का कि लेटेस्ट स्टाइल का पति नहीं चाहिए तुम्हें, वर्ना..।
6. सुबह मेरे अखबार पढने पर कितना नाक-भौं सिकोडती हो। चाय की प्याली ऐसे देती हो गोया एहसान कर रही हो। दोबारा चाय मांगने की हिमाकत तो मैं बेचारा कर ही नहीं सकता।
7. मेरा तो संडे भी तुम्हारे चक्कर में शहीद हो जाता है। उसी दिन तुम्हें सारी शॉपिंग करनी है, रिश्तेदारों के घर जाना है, फिल्म देखनी है, बाहर डिनर करना है। बाहर डिनर का तुम्हारा प्रोग्राम रूखे-सूखे भोजन के आदी हो चुके मेरे पेट पर कितना भारी पडता है- तुम क्या जानो।
8. जरा सा वजन क्या बढ गया कि अदनान सामी को दिखा-दिखाकर मुझे आत्मग्लानि से भर देती हो कि देखो उसने कितना वजन घटा लिया और एक तुम हो कि..उंह?
9. तुम्हारे लिए तो बहनों-सखियों के पति ही परमेश्वर हैं, मैं नहीं। वे कितनी महंगी साडियां अपनी पत्नी को गिफ्ट करते हैं, बर्थ डे पर डायमंड रिंग देते हैं। मैं जो तुम्हारी फरमाइशें पूरी करता रहता हूं, उसकी कोई कद्र ही नहीं।
10। माना कि मेरी मैथ्स कमजोर है, लेकिन इसका फायदा तुम खूब उठाती हो। हर बार भारत सरकार की तरह तुम्हारा बजट घाटे में जाता है, हर बार मेरी पॉकेट में सेंध लगाकर तुम मुझ गरीब जनता पर कहर ढाती हो।
एक पत्नी --काश एसा न हो
1. वाकई तुम्हें कलर सेंस नहीं है। अपने सहकर्मियों को देखो, कितने स्मार्ट दिखते हैं!
2. चौके-छक्के वाला क्रिकेट! खुद तो दिन भर सोफे पर लेटकर तालियां बजाओगे या सिर पीटोगे, मैं दिन भर किचेन में घुसकर चाय-कॉफी की फरमाइशें पूरी करूं। इंडिया हारे तो मेरी गलती, सारा गुस्सा मुझ पर ही उतरता है।
3. तुम्हारी मां! आती हैं तो पूरे घर को आसमान में उठा लेती हैं। बहू, जरा चिल्ले बना देना, गर्म सूप बना देना, बडी सर्दी है..। मेरी मां आकर पूरी किचेन संभालती हैं, मुझे आराम देती हैं तो क्यों न रहूं मैं खुश!
4. करवाचौथ का व्रत तुम्हारे लिए ही रखती हूं, लेकिन तुम्हें तो उस दिन भी दफ्तर में देर तक रुकने का बहाना मिल जाता है। तुम भी कभी करके देखो इतना त्याग मेरी खातिर।
5. चित भी मेरी और पट भी मेरी। अछी न दिखूं तो मुझे फूहड कहोगे। फैशन में दिलचस्पी लूं तो फैशनेबल हूं? चाहते क्या हो तुम?
6. घर के नून-तेल की चिंता हो न हो, अखबार पढकर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मसलों पर बहस जरूर करोगे। दुनिया के बारे में सोचते हो-कभी मेरे बारे में भी सोचकर देखो।
7. रोज तुम्हारे और बच्चों के लिए ही काम करती हूं। संडे को मेरा भी मन होता है कि बाहर घूमने जाऊं, लेकिन तुम्हें कितने बहाने याद आ जाते हैं। हां, अगर अपने दोस्तों से मिलना हो तो तुम्हारे पास खूब समय रहता है।
8. उफ! कितनी शिकायतें हैं तुम्हें मुझसे। शादी से पहले मेरी कितनी तारीफ करते थे, इतनी जल्दी बदल जाओगे, मुझे मालूम न था।
9. आज तक कभी एक फूल भी तुमने दिया? जीजाजी और सहेलियों के पतियों के गुण गाती हूं इसलिए क्योंकि वे अपनी पत्नियों का खयाल रखते हैं। एक तुम हो, बर्थ डे, मैरेज एनिवर्सरी तक याद नहीं रख सकते, मुझे गिफ्ट क्या दोगे!
10. तुम्हें लगता है मैं फिजूलखर्च हूं। किसी तरह इतने कम पैसे में घर चलाती हूं। मुश्किल वक्त में मैं ही छुपाकर रखे गए पैसे तुम्हें देती हूं, अपने ऊपर तो खर्च नहीं करती।
1। अपने हिसाब से मुझे बदलना क्यों चाहती हो तुम? मैं डार्क ब्ल्यू ट्राउजर के साथ क्रीम कलर की शर्ट पहनना चाहूं तो क्यों अड जाती हो कि लाइट ब्ल्यू शर्ट ही पहनूं? साथ में आरोप कि मुझमें तो कलर सेंस है ही नहीं?
2. टीवी पर क्रिकेट चल रहा हो तो साक्षात यमलोक की दूत बन जाती हो। जब-तब आंखें तरेरकर यूं जताती हो, जैसे मैंने गुनाह कर दिया हो। तुम्हारे सास-बहू वाले सीरियल देखने पर मैंने कभी एतराज किया क्या?
3. मेरी मां आएं तो तुम्हारे चेहरे से इतनी बेचारगी झलकती है मानो दुखों का पहाड टूट पडा हो। तुम्हारी मां आ जाएं तो खुशी रोके नहीं रुकती। मैं ही घर में मेहमान बन जाता हूं।
4. करवाचौथ का व्रत क्या रखती हो, साल भर उसी का ताना देती रहती हो। मैं जो खाना समय पर न बनने, जल जाने के कारण रोज दफ्तर भूखा जाता हूं, उसकी कोई परवाह नहीं!
5. टीवी वाली कुसुम या कुमकुम ही तुम्हारी आइडियल हैं। उनकी जैसी साडी या ज्यूलरी ही चाहिए तुम्हें। फैशन पर तुम्हारी डिक्शनरी फादर कामिल बुल्के को भी मात कर दे। शुक्र है खुदा का कि लेटेस्ट स्टाइल का पति नहीं चाहिए तुम्हें, वर्ना..।
6. सुबह मेरे अखबार पढने पर कितना नाक-भौं सिकोडती हो। चाय की प्याली ऐसे देती हो गोया एहसान कर रही हो। दोबारा चाय मांगने की हिमाकत तो मैं बेचारा कर ही नहीं सकता।
7. मेरा तो संडे भी तुम्हारे चक्कर में शहीद हो जाता है। उसी दिन तुम्हें सारी शॉपिंग करनी है, रिश्तेदारों के घर जाना है, फिल्म देखनी है, बाहर डिनर करना है। बाहर डिनर का तुम्हारा प्रोग्राम रूखे-सूखे भोजन के आदी हो चुके मेरे पेट पर कितना भारी पडता है- तुम क्या जानो।
8. जरा सा वजन क्या बढ गया कि अदनान सामी को दिखा-दिखाकर मुझे आत्मग्लानि से भर देती हो कि देखो उसने कितना वजन घटा लिया और एक तुम हो कि..उंह?
9. तुम्हारे लिए तो बहनों-सखियों के पति ही परमेश्वर हैं, मैं नहीं। वे कितनी महंगी साडियां अपनी पत्नी को गिफ्ट करते हैं, बर्थ डे पर डायमंड रिंग देते हैं। मैं जो तुम्हारी फरमाइशें पूरी करता रहता हूं, उसकी कोई कद्र ही नहीं।
10। माना कि मेरी मैथ्स कमजोर है, लेकिन इसका फायदा तुम खूब उठाती हो। हर बार भारत सरकार की तरह तुम्हारा बजट घाटे में जाता है, हर बार मेरी पॉकेट में सेंध लगाकर तुम मुझ गरीब जनता पर कहर ढाती हो।
एक पत्नी --काश एसा न हो
1. वाकई तुम्हें कलर सेंस नहीं है। अपने सहकर्मियों को देखो, कितने स्मार्ट दिखते हैं!
2. चौके-छक्के वाला क्रिकेट! खुद तो दिन भर सोफे पर लेटकर तालियां बजाओगे या सिर पीटोगे, मैं दिन भर किचेन में घुसकर चाय-कॉफी की फरमाइशें पूरी करूं। इंडिया हारे तो मेरी गलती, सारा गुस्सा मुझ पर ही उतरता है।
3. तुम्हारी मां! आती हैं तो पूरे घर को आसमान में उठा लेती हैं। बहू, जरा चिल्ले बना देना, गर्म सूप बना देना, बडी सर्दी है..। मेरी मां आकर पूरी किचेन संभालती हैं, मुझे आराम देती हैं तो क्यों न रहूं मैं खुश!
4. करवाचौथ का व्रत तुम्हारे लिए ही रखती हूं, लेकिन तुम्हें तो उस दिन भी दफ्तर में देर तक रुकने का बहाना मिल जाता है। तुम भी कभी करके देखो इतना त्याग मेरी खातिर।
5. चित भी मेरी और पट भी मेरी। अछी न दिखूं तो मुझे फूहड कहोगे। फैशन में दिलचस्पी लूं तो फैशनेबल हूं? चाहते क्या हो तुम?
6. घर के नून-तेल की चिंता हो न हो, अखबार पढकर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मसलों पर बहस जरूर करोगे। दुनिया के बारे में सोचते हो-कभी मेरे बारे में भी सोचकर देखो।
7. रोज तुम्हारे और बच्चों के लिए ही काम करती हूं। संडे को मेरा भी मन होता है कि बाहर घूमने जाऊं, लेकिन तुम्हें कितने बहाने याद आ जाते हैं। हां, अगर अपने दोस्तों से मिलना हो तो तुम्हारे पास खूब समय रहता है।
8. उफ! कितनी शिकायतें हैं तुम्हें मुझसे। शादी से पहले मेरी कितनी तारीफ करते थे, इतनी जल्दी बदल जाओगे, मुझे मालूम न था।
9. आज तक कभी एक फूल भी तुमने दिया? जीजाजी और सहेलियों के पतियों के गुण गाती हूं इसलिए क्योंकि वे अपनी पत्नियों का खयाल रखते हैं। एक तुम हो, बर्थ डे, मैरेज एनिवर्सरी तक याद नहीं रख सकते, मुझे गिफ्ट क्या दोगे!
10. तुम्हें लगता है मैं फिजूलखर्च हूं। किसी तरह इतने कम पैसे में घर चलाती हूं। मुश्किल वक्त में मैं ही छुपाकर रखे गए पैसे तुम्हें देती हूं, अपने ऊपर तो खर्च नहीं करती।
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