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मंगलवार, 1 सितंबर 2009

जीवन जोड़ी

प्यार का खुमार भी अजीब होता है
सहेली ,परिवार ,के अथाह प्यार के बाद भी
एक खास प्यार की चाह होती है
हर पल उसकी तलाश रहती है
प्यार सच्चा या छोटा नहीं होता
सिर्फ़ सच्चा होत्ता है
इसे सीचना पड़ता है
प्यार ,मर्यादा, श्रधा से
भक्ति करनी होती एहसास दिलना पड़ता है
नाजुक डोर को पक्का करना होता है
अपने सपनो को बुनने से पहेले
उन्हें ज़मीने सचाई से मिलना होता है
उसके बाद सपनो को आकार देना होता है
प्यार कर्म होता है
विचारो,खामियों को अपनाना होता है
जो नीव बनते है
आगे के स्तम्भ तो ख़ुद बा ख़ुद बन जाते है
प्यार इबादत है जिद समय आशय सन्दर्भ नहीं होता
आँखों ,स्पर्श और ध्यान से बात हो जाती है
इसलिए जोडिया उलटी होती है उपर से बन कर आती है ।

सोमवार, 31 अगस्त 2009

जीवन भगवन

मन की गुथी खोल रे भगवन
कसा है यह मन
यहे चंचल मन कभी अटके कभी भटके
कभी सवाल करे कभी जवाब दे
कभी हसाए कभी रुलाये
कभी भलाई कर पछताए कभी कपट
कभी जलन दिखाए तो कभी प्यार ।

क्या है यह मन ,गुथी खोल रे भगवन
कभी ऊँचे सपने दिखाए
कभी धरातल दिखाए
अपनों को करे पराया
परयो को अपना
कभी मरने को चाहए
कभी जीवन जीने की चाह जगाये।

महके सारा जीवन
में रोऊँ टीओ सब हसे
कसे है यहे जीवन
सब फसे मोह माया में
मन तो चंचल है
इसकी गुथी खोल रे भगवन ॥

जीवन वरदान है

आज नहीं तो कल सबको जाना है
जीवन चक्र को निभाना है
खाली हाथ आना और जाना है
खुशियों को गम से क्यों दबायेंगे
कल की चिंता में आज भी गवाएंगे
कल को आज होना ही है
समय चक्र को चलना है
शरीर ख़राब नहीं मन में व्याधि है
सच है जीवन एक पहेली है
जो जीवट है वो खुश है
जहाँ दुःख है वो मरघट है
किस्मत को रोना बस खोना ही खोना है
असफलताओ पे रोना नहीं उससे सीखना है
रोते हुए आना और हस्ते हुए जाना है
पाप पुण्य झमेला है
जो पाया वोही खोना है
आज कल की तस्वीर है
कुछ भी करो समय को नहीं रोक पाओगे
लिखा है तो होना ही है
क्यों मर्त्यु की दरख्वास्त है
जबकि जीवन ही वरदान है ।

जीवन की आस

मेरे मन की गहरायिओं का फ़साना हो तुम
मेरे जीवन का गुरुरु हो तुम
मेरे अक्स की परछायी का सुरूर तुम
तुम्हारा मेरे प्यार हो तुम ।

सपनो के भवर में ,मुझे ले जात्ते हो
कभी खयालो में गुनगुनाते हो
मेरे मन की बात को बिना कहे समझ जाते हो
मेरे जीवन की नईयां के खिवायिया हो तुम ।

अंधेरे मन के उजाले तुम
सुने जीवन के सहचर तुम
खुशियों के पुंज से महकती रहे यहे जीवन संध्या
तुम्हारे हमकदम सदा है हम ।


मेरे मन्दिर के देवता हो तुम
मेरे हर काम की खुशी तुम
मेरे संकल्प के ताकत हो तुम
मेरे सपनो की ताकत हो तुम ।

मेरे अरमानो का प्रकाश हो तुम सिर्फ़
तुम से बहुत प्यार यहे इज़हार नहीं इकरार है
,एक जीवन बंधन का
जिसमे प्यार,सम्मान ,खुशी और शान्ति
हो अनकहा रिश्ता हो संस्कारो का सम्मान हो ।

जिसका कोई सहारा न वो तलाश हो
तुम थक गए थे अकेले इस जीवन में
आज वो रास्ता तुम
अरमान जगा न करना हमे हताश तुम
इस डोर का आखिरी किनारा तुम ,
जीवन की आस हो तुम ।

जीवन की उड़ान

आकांशा की ऊँची उड़न ने कहा
मत जगाओ मुझे सुप्त ज्वालामुखी हु में
लावा रिस्ता है गरम है
नुकसान न पहुँचा रहा किसी को
सिर्फ़ पुकार रहा निकल जाने मुझे
आकंशाओ की ऊँची उड़ान ने रास्ता दिया
रहा दूर थी जब उमंगो ने जनम लिया
समय की धारा के साथ मिलाप हो गया
टूटी डोर से नाता बरसो का हो गया
बन गई नई राहें जिनसे कोई वास्ता न था
इस उड़ान को कलम ने सहारा दिया
किताबो ने बनाये नींव अभिलाशाओ की झड़ी लग गई
जिन्दा लाश में ज़िन्दगी बस गई
आंसू खुशी बनके छलक गए
गम के साये मंदिरा में डूब गए
वक्त की रफ्तार बदल गई
धरती ने अंचल दिया
अस्मा ने समेत लिया
कहाँ मत छोड़ो इन आकंशाओ को
यही जीवन की सबसे ऊँची उड़ान है ।

जीवन सार

जीवन एक कशमकश है
इसी में छिपी कहानी जीवन का सच है
तुम आए हो ,तुम्हारा मकसद है
तुंहारा लेखा जोखा है
तुम्हारी किस्मत है
पर इसको जीना तुम्हारी फितरत है
अच्छी बुरी किस्मत नहीं नजरिया है
जिससे बनेगी तुम्हारी दुनिया
निराशा ,दुःख असफलता तुम्हारी है
आशा ,खुशी ,प्यार दूसरो का है
तुम नहीं फेसला करना वाले
क्या तुम्हारा है
यह तो इन्सान का जाना और माना है ।

जीवन यात्रा

जीवन बिन मर्त्यु नहीं,हार बिन जीत नहीं
पानी बिन जगत नहीं, माली बिन बाग़ नहीं
भगवन बिन भक्त नहीं , रात बिन दिन नहीं
शक बिन विश्वास नहीं , समस्या बिन समाधान नहीं
किसान बिन खेत नहीं , जन बिन देश नहीं
मन बिन कार्य नहीं , गम बिन खुशी नहीं
कृष्ण बिन राधा नहीं , सूर्य बिन चाँद नहीं
लय बिन गीत नहीं , झूठ बिन सच नहीं
कमल बिन कीचड़ नहीं , स्त्री बिन पुरूष नहीं
पतझड़ बिन वसंत नहीं , बरखा बिन सावन नहीं
खुशी बिन गुन नहीं, बीमार बिन दवा नहीं
राही बिन पथ नहीं , पथ बिन यात्रा नहीं

चोला बदल कर नए भेष में आना है जाना है
यहे जीवन तो अंतहीन यात्रा है ॥

जीवन से मुक्ति

ध्यान की अन्त्प्रेक्षण , मूल का भाव
कर्म की प्रतिष्ठा ,कार्य का योग
विचार का द्वार ,हार का परिष्कार
जीता का परिष्कृत , सत्य का चैतन्य
पदार्थ की मिथ्यता,जीवन का स्वरुप
स्वरुप का बंधन , बंधन से रिश्ते
क्योंकि रिश्ता धरम है ,धरम ही कर्म है
कर्म ज्ञान है ,ज्ञान शक्ति है ,शक्ति ही युक्ति है
इससे ही जीवन की मुक्ति है ।

जीवन का सिद्धांत

आज फिर नई सुबह ने ली अंगडाई
जगा रही उमग तरंग को
याद दिला रही कल की खामी को सुधारो
विश्वास जगा रही नई सुबह
सुबह कभी नहीं दोहराती
हर सुबह नई किरण के साथ ढेरो पैगाम लाती
बना लो इस जीवन का सिद्धांत रोज़ करो एक नया काम ।

रविवार, 30 अगस्त 2009

जीवन चाहत

सुर्ख खाक होती ज़िन्दगी में
फूल की चाहत नहीं
बूँद के मोती में बदलने की आरजू नहीं
सिर्फ़ एक चाहत है
चेन की एक सास चाहिए
रात की सुकून भरी नीद
ताकि कल को नई नज़र से देख पाए
सिर्फ़ सुकून के दो पल बहुत है
लम्बी से जिंदगी के लिए ।