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मंगलवार, 5 जुलाई 2011

दिल



































मन बहुत उदास है शायद तुम्हारे पास है
अब सपने पूरे नहीं होंगे इसका एहसास है
छोटा सा सपना था बिखर  गया
छोटे  टुकड़े रह गए सपनो को 
अर्थी तो खुद दी थी उन सपनो 
जब बुनने का मतलब ही नहीं था
 क्यों उनकी याद इतना सताती है ..?
जब  कुछ मायने नहीं थे क्यों बुन जाते है यह सपने 
आँखों के नीर  को बहाना  मिल जाता है 
दिल को टूटने का एहसास होता है 
हर एक जवानी की साथ यह नइंसाफी  होती  है 
बिखरे  दिलो के टुकड़े ढूंढे केलिए कई दिल  उठने व्वाले मिल जाते है 
पर कुछ टुकड़े चुभ  ही जाते है
बेमेल टुकड़े भी मिलकर नया आशियाना  बना ही लेते है
कभी अच्छे के लिए कभी बुरे के लिए
मिल जाते है
जोड़ी तो ऊपर से भी बनायी जाती है
कोई अपनी बीच में लगये तो  क्या करे ......


8 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 30/08/2011 को आपके दिल की बात नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

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ana ने कहा…

बहुत ही सुन्दर भावों को अपने में समेटे कविता....शानदार

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति ....

चोट्टे की जगह छोटे कर लीजिए ..टाइपिंग मिस्टेक है ..

Ritu ने कहा…

Sangeeta ji ana ji and yashwant ji baht bahut dhyanwaad ......meine comment verificaition hata diya hai ....choota kar diya truti ke liye shama ..........behad accha manch hai appka

Ritu ने कहा…

I did it ...thanks for visiting the page

Ritu ने कहा…

dhanywad ...

Ritu ने कहा…

dhanyawad

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