संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

रविवार, 8 दिसंबर 2013

Wedding Anniversary Celebration

Hey this is the awesome days for some (mostly ladies) and awful for some .... mostly men that is how we have been forced to grow and be a part of it .All jokes all movie and everything indicate that men does a lot to get married and is so called " poor guy ".......
Seriously you need  spend alone time for anniversary celebration ....All my friends  does this ..Me and my DH decide to go alone this time we leave our kids to  day center  ..
we decide a good romantic dim light and sea side high end restaurant.I buy a costly dress so do my DH
We sit in our HE SUV
We sit give with kids to drop them @ day care
I just gave then a 10 min hugs and bye ..and a sheet of instruction to the nanny  bag of dresses and blankets with favourite toy for both my kids a big lunch pack and again a sheet for what to give and what not....(She was looking me furiously and I was furious why ..heartless women?)
then say bye
15 minutes of drive to our i just remember I forgot to tell her to click the picture just in case if my kids do something unusual... so I called her for 20 minutes to tell if they do something "unusual "(how she knows unusal ?)please click it .
We r already there ...I m just looking at my dh
with love and thank and meeting first time just want to sat his phone ring ...
he just pick up and said I will call u later ..he is with me and celebrating anniversary alone
We sit they give us mineral water (my heart was beating high with price thought )
I again look at him want o thank for lovely evening .......but
we got a band people around me with some unheard song they r playing
I just love it ....but my dh can't hear it ..light id so dim that he can't even look in my eyes
I am about to hold the hand of my dh waiter brought the menu card and ......
They give us a menu I saw and ask 25 questions to what oil ,spices (i am lactovegan )...
Now I just almost  jumped to hold his hand and ..............
Manager come with a complimentary deal of tonight ...my dh talk to her for 10 min...
I started missing my kids and thinking what they are doing !!
Soup is served we eat it ..........and my dh said I love(you too but ) when my son eat with him (aww he is missing him) ..let me pack one for him too ..
I smiled and thought we think so much alike :)
We eat main course with a music aside and look in eyes hopefully with a smile exchange why we choose it ..?
As the waiter ask for dessert he said no (I was so happy third time we think alike )
He just pay the bill and warm hug before sitting in the car .....
Took few seconds to collect them and rush too our favourite coldstone to have family favourite  ice cream shop to celebrate the occasion our way ..we share hugs we dance and sing and look each other clearly walking hand in hand wishing happy anniversary aloud ...
That day was our freedom to express our way ........
We enjoy the dinner but  if not then this is also cool way ......to celebrate ......
I just up with the dream sequence (lolllllllzzzzzzz) and big smile
I called the favourite dinner of our and nice candle light in my little patio and kids sleep early hopefully ...
Gifts ..".Love no matter what "





.




शनिवार, 30 नवंबर 2013

Life is really different

My marriage was fix superquick I have less than  a month to get hitched.I have one of my best friend with me rest are out of town we have the major places to go and enjoy the fun .As I am moving out of country so I have lot to do in short period of time.We decided to go to the local  place we hang out .Being foodie we have to go all shops from thela to big name restaurant in the city .
We have our favourite starting from chatwala to pastry shop to every food place in town ..:)

I still remember we are like free birds .We work six days and then on weekends we go to movies.. every fair in town like crazy..our horns are known by our mothers
...These are sweet memories ..just treasure it on our hearts..Life is different and priorities are different I am grateful that I had that life

Thanks for reminding me the craziness once again
Love
Ritu
http://www.dove.in/en/Products/Bar-Body-Wash/Bar/Cream-Beauty-Bathing-Bar.aspx

गुरुवार, 28 नवंबर 2013

मेरा जीवन का अब तक का सबसे महत्वपूर्ण  संसस्मरण जितना रोचक इसका शीर्षक है उतना ही दर्दनाक प्रेरणादायक है यह.....
 कैसा हो अगर जीवन के कुछ पल हमारी ज़िन्दगी से गायब ही जाये या हम उन्हें कटवा सकते  हटवा सकते ......काफी बचकानी सोच है पर यह सच है ..मै  एसा दिल से चाहती थी उस पल को हटना ,तो  नहीं पर वैसा जैसा पहले जैसा  सब कुछ ...दोबारा वैसा .........उस के लिए बहुत मन्नत मांगी ............पूरी भी हुई --पर आधी ........मैंने चाह की १८ जून २००४ की सुबह के ६:०० से ६:०५ का समय मेरे परिवार के  जीवनचक्र से हट जाये ...... क्योंकि इस समय पापा का एक्सिडेंट हुआ और हमारी दुनियाबदल गयी.. आज अगर यहे पल न हो तो हमारा जीवन कैसा  होता ..इसका ख्याल आते ही जीवन की मायने और अंधकार का डर सामने आ जाता है शरीर में सिरहन हो जाती है मन बेचैन हो उठता है ...............पापा  को घर से जाना था सुबह उनकी पोस्टिंग असम   में थी  ..वो सुबह ६ बजे निकले घर से निकलते ही ६.०५ पर भाई का फ़ोन आगया पापा हॉस्पिटल में है आ जाओ .में माँ को लेके गयी और रास्ते भर उन्हें समझा रही थी  कही दूर दूर तक विचार था की फ्राक्टरे और दर्द होगा .........अब पापा को जाने मत देना ..हॉस्पिटल जाके देखा तो पापा बेहोश से थे वो कोमा  में जा रहे थे .........हम कुछ नहीं कर पा रहे थे आज भी वो पल में आँखों के सामने है........ कभी नहीं भूल सकती ..मेरे भाई ने पूरा किस्सा बताया की कैसे यहे सब हुआ ..पापा को ऑटो तक छोड़ने के बजाये वो लोग आगे चले गए...... पापा ने घर से ही भाई को बोला में चलाता हु ,तू पीछे बेठ सड़क पर लोहा और वो सब था पापा का बैलेंस बिगड़ गया वो गिर गए और सर वहां बन रही नाली में पास गया पास के लोगो की मदद  से निकला सर निकल भी गया पर पापा की हालत बहुत नाजुक थी डॉक्टर थोड़ी देर बाद आया और बोला सिर्फ एक परसेंट चांस है...... हम सब ठन्डे हो गए सारी  दुआ   मांग ली उस ...२० मिनट में ५० से ज़यादा लोग थे हमारे साथ ...पास वाले अंकल तो हमारे साथ ही गए थे........ मेरी माँ अपनी सुध बुध खो बेठी थी ......इतनी बेबस इतनी लाचार हो गयी थी ...मुझे एसा सुनते ही लगा में गिर जाउंगी---एक मिनट के लिए सब गम -- पर नहीं मुझे भगवान ने हिम्मत दी और दिमाग को शुन्य में पहुंचा  दिया ताकि में जीवित रहू-- मुझे पता था अगर पापा को कुछ हुआ तो हम भी कोई  नहीं बच पाएंगे ..
तईजी  ताउजी चाचा मामा अगले दिन सब आ गए . ..पापा की हालत पूरे २ वीक गिरती गयी रोज़ डॉक्टर को आस की नज़र से देखते पर कुछ नहीं हांसिल होत्ता ...पापा को बुखार हो गया जो उनके लिए बहुत घातक था चाचा और उनके दोस्तों ने बर्फ के पट्टी रखते रह और फिर ठीक किया पापा को बड़े ताउजी पापा की रिपोर्ट लेकर जयपुर गए की कुछ हो जाये वह पर डॉक्टर ने कहा की जो तुम्हे देख राह है वो मेरा ही स्टुडेंट है मामराज जी उनकी चल में और बोली में इतना दम था ....मेरा मन था पापा को उठा के सबसे अच्छे हॉस्पिटल में जाऊ पर सब मेरे बस में नहीं था पापा के स्थति गिर रही थी ३ सप्ताह तक अस्पताल में ICU में थे ........हम बाहर चादर डाल के थे .....किसी को कुछ नहीं सूझ रहा था शून्य था जीवन  ..रोज़ एक हेड इंजुरी का केस आता और २-४ दिन में सब ख़तम हो जाता .....में पंडित के पास चाचा के साथ जाती जो जो कहता हम करते मेरी माँ मुझे झंकझोर  कर बोलती पापा दे दे .................मेरी हिमत नैन डिगती मेरी ताई जी मेरी हिम्मत  थी सारा घर हमारे साथ था हर तरह से
भगवन में मुझे सब बुद्धि दी मैंने  ३ दिन सारा खर्च अपने ऊपर ले लिया ......बहुत लोग मिलने आये ...जितने डॉक्टर को जानते थे उन सब से बात करवा दी ...हमे सब पहचने लग गए ............घर बन गया हॉस्पिटल ताई जी सुबह सबके लिए खाना  ले आती सब खाते ............नज़र चुरा के/ ................पापा के पास जाकर बोला "भैया जी ..".....पापा पूरे हिल  गए ...ताई जी की आँखों से आंसू बह चले ............उम्मीद की किरण दिखाई दी मेरी सहेलियां मुझसे आकर मिली पर में नहीं रोई .............नहीं/
  २ जुलाई को पापा को रूम में शिफ्ट कर दिया ... ..मेरी बहिन की एक्साम थे भाई का १२ के बाद दाखिला करवाना था ..........पापा में कभी कुछ नहीं मनगा सिर्फ पड़ी के अलवा .....भाई को लेके कोउन्सेल्लिंग में कौन जायेगा ........? में गयी ---जब पापा का हाथ रख के अह्सिर्वाद माँगा पापा पूरे हिल गए हम सब समझ गए हमने कभी पापा का हाथ नहीं छोड़ा .........५ जुलाई को हम डेल्ही गए और ६ को दाखिला ले कर आगये ....मेरी एक बहिन बॉम्बे से पापा के पास आ गयी थी .............महीने भर खूबसेवा की उसने ............बहिन के एक्साम ख़तम हो गए ...वो घर  का देखती में बहार का
.....मेरी माँ स्कूल  जाने लग गयी वो भी ज़रूरी था इलाज में पानी की तरह पैसा जाता था कुछ मिलेगा भी नहीं क्योंकि हम प्राइवेट में इलाज करा रह थे ................पापा को हर दो  घंटे  में करवट दिलना , २बर कपडे बदलना , नाक  से खाना खिलाना  सब सीख रही थी ..सीख लिया था मैंने ..इंसुलिन देना ........सारी  नर्स  हमे जानती थी ..............ताउजी और पापा के सबसे अच्छे दोस्त और भाई भारत ताउजी रात भर पापा को  देखते एके एक करके ...........में और माँ भी वही ..वही से स्कूल जाती और आती घर  की शकल नहीं  देखि हमने ...................सरकारी जगा से अपनी खर्चा करवाने के लिया हमे सरकारी अस्पताल में भारती होना था ७ दिन की लिए हम हुए और बिन जान्पेहचाहन  वाले लोगो की तकलीफ का अंदाज़ लगा पाए /इतना बढ़िया  डॉक्टर  के बाद भी junior  स्टाफ का लालच और बेरुखी को पास से देख घर आने के बाद पापा को जांडिस हो गया हम तुरंत हॉस्पिटल ले गए ...............तब में ११ बजे रात को भी घर आई थी /
क्या कोई अपनी लड़की को छोड़ सकता है ..........!! मेरी माँ एक दुःख में घुल रही थी ....उनकी तबियत गिर रही थी आर बेसुद से सब काम कर रही थी ................हम  १४ जुलाई   को सरकारी हॉस्पिटल में गए २० को आगये और २२ को फिर प्राइवेट में गए ५ दिन बाद घर आ गए पापा को हमारे कमरे में शिफ्ट कर दिया /झाड़ू  पोछा करके उनका कमरा रखते ..लोगो को कम से कम मिलवाते ..............
कभी मुसीबत एक एक करके नहीं आती एक साथ आती ..................एसा हमारे साथ था ....किसी भी चीज़ में काम पैसा नहीं दुगना पैसा लगता था .........कही नहीं तो फ्रिज का ३ बार प्लुग बिन काम के टूट गया बल्ब लाइट ख़राब  हो रहे थे .....पापा ने अंडा नहीं खाया था उनको अंडा देना ज़रूरी था .........दिया .....नाक  से मुह तो अभी भी नहीं  लगया   ................सब एक दुसरे से नज़र चुरा का रो लेते थे ............एक compoundar भैया आते थे जो बहुत हिम्मत  बंधा  के जाने लग गए ...........हमारे पास एक दो लोग आये यह पूछने  के कैसे बचाया पापा को ....क्या जवाब दे ..?पापा के कोई घाव सा दिखा वो बेद सोरे था जल्द ही भयिया  ने इतना ढंग  से इलाज किया वो ठीक हो गया पर छोटा था लेकिन बहुत गहरा .....२ महीने लगे उससे ठीक होने में .
इस बीच एक दिन पापा को पेन पकदया पापा ने उस पेन को बंद खोल किया हम बहुत खुश हो गए जब डॉक्टर को बताया उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा..... हम नयी नयी चीज़े देना शरू कर दिया ....
४ सितम्बर को पापा को होमेपथिक दाई दी ७ को पापा को होश आने लग गया पर आवाज़ नहीं आई ..इसलिए पेन और पेपर पर लिखवाते थे उनसे ..२९ को पापा अच्छे से लिखने बोलना समझ में आने लगा १ अक्टूबर को पापा की फ्य्सिओथेरप्य चालू की जो अब तक जरी है ...........बस करने वाले बदलते रहे .....१२ नवम्बर को पापा की cathedar   भी हटा दिया ... पापा बताने लग गए थे ........पापा का एक हाथ पैर नहीं चाल रहा था ...हमारी चिंता बाद रही थी ....और वो आज ७ साल तक वसा ही है पर मुझे लगता है ...........भगवन से कोई शिकायत नहीं क्योंकिहम उनसे पहले सिर्फ आंख खोलने की बात बोलते थे फिर बोलने के लिए फिर खाने के लिए ...फिर सब याद रखने के लिए ..........फिर चलने के लिए यहे एक चमत्कार था .....इतनी बड़ी इंजुरी के बाद ...यहं तक आना पापा के पास उनकी २ साल की मोमोरी नहीं थी जो धीरे धीरे आ गयी ..
पर एक व्यक्ति जो हमेशा हर काम अपने आप करता हो अचानक उससे पलंग पर बता दिया जाये सब सुनाने के लिए कितना लाचार, कितना विवश मेहस करेगा वो .........पापा के बचे सब अच्छी जगह पर नौकरी करते है उन्हें डिग्री मिली काश वो यह सब चाल के जाकर देख पते लेकिन मुझे पता है ...............वो हमारे साथ है इसका मोल इसकी कीमत को नहीं चूका सकता ................
जितने समय में हॉस्पिटल में थी मैंने रोज़ पापा के किसी किसी मंदिर का टीका लगया .............दूर जहाँ से हर कोई मिलने आया  उनसे ...
जब उनको हम घर में ला रहे थे वो कोमा  में थे लेकिन घर से घुसते हुए उन्होंने ऑंखें खोली ...........मेरा विश्वास पापा ठीक होंगे ज़रूर होंगे सही हुआ ............
चमत्कार जब बह्ग्वान को कुछ अच्छा करना होता है वो खुद रस्ते बनता जाता है हम एक सरे compunder   को पापा के लिया कर रहे थे लेकिन वो मुझे सही नहीं लग रह था ............जब ताउजी बुलने गए तो हामरे पडोसी उन्हें मिले और उन्होंने जो compunder  हंसराज भैया वो देवता है ..............उन्होंने पापा का बेड सोरे ठीक कर दिया जो हमे सिर्फ एक दाना दीख रहा था ........एक शरीफ इन्सान एक सुलझा हुआ वय्क्तित्वा ............मेरी भी हाथ की हाड़ी टूट गयी थी जो पापा के फ्य्सियो थे उन्हने मुझे फ्री में excersice  करव्यी एसा कहाँ होता है .............!!
पूरा घर पूरा स्कूल....दोस्त के दोस्त रिश्तेदारों के रिश्तेदार सब हमारे साथ थे ...................है और रहंगे ............कितने धन्यवाद दू समझ नहीं आता ............हर बार माथा टेक देती हु
पापा सिर्फ चलना नहीं पते थे हम उन्हें ज्वाइन करना चाहते थे लेकिन हो न सका .......जयपुर की लोगो ने ज्वाइन करने से इंकार कर दिया जबकि पापा के डॉक्टर का मानना था की वो ठीक हो सकते है और स्कूल जाने के बाद से वो चलना चयिगे .............मेरे डॉक्टर साहब केस करने को तैयार  थे पर मेरी मा भी वही काम करती थी कहीं उन्हें नुकसान न हो इसलिए ...........................इसका गुस्सा आज भी है मुझे माँ से भी और सिस्टम से भी ...........इसके बाद .. पापा ने एक्स्सरिसे करना छोड़ दिया उन्हें फ्य्सियो को बहुत गाली दी लेकिन आज भी उनकी फ्य्सियो से नहीं बनती पर वो भगवन है हमारे लिए वो आज भी आते है .................कितना नमन करू यही सोचती हु .................
मैंने सितम्बर में डॉक्टर भगवती बॉम्बे हॉस्पिटल को एक चिठ्ठी लिकी थी पापा की पूरी डिटेल के साथ उनका जवाब आज भी याद है ..........".your father is suffering from bad head injury and he is the best possible treatment ".इसके बाद मुझे तसल्ली थी सब ठीक है नहीं तो में गलत लेट इलाज के लिए परेशां होती रहती थी ..............
नेट पर बहुत से चीजे पढ़ी ......
पापा ने जब मेरी शादी में  तिलक किया वो पल मेरे जीवन के लिए यादगार पल है मेरी माँ जब करवाचौथ रखती है जब हम निश्चिंत रहते है माँ पापा के पास है तब सब बेमानी लगता है ...............जब बहिन भाई को अवार्ड मिलता है ...........तब पापा है उनका आशीर्वाद वो दे रहे है यही सोच के जो सुकून  मिलता है उससे दुनिया की किसी दौलत से नहीं तौला जा सकता ........
पापा का एक्सिडेंट से पहले मेरे लिए लड़के देखे हा रहे थे कुछ  लोग पापा के लिए पूछे या नहीं पर मेरी शादी के लिए ज़रूर पूछते थे  ..गुस्सा अत्ता था पर माँ बोलती थी क्या पता हम भी एसा ही करते 
लोग यहे तक बोल देते थे --"एसा जीवन से अच्छा ..........".....पर कौन समझये शायद वक्त समझ देगा इन्सान की कीमत कही ज़यादा होती है ...
मैंने अनगिनत पपेर वर्क और application लिखी थी कभी पापा के इन्सुरांस के लिए कभी नौकरी कभी मेडिकल claim  के लिए 
पापा को फोकल seizure आया शायद में दवा देना भूल गयी थी .................मुझे याद है पापा का मुह कुछ टेड सा हो गया था जल्दी से सब को बुलाया..............
जब हम माकन कह्रीद रहे थे माँ पापा की बहुत बहस होती थी .......माँ घर से ज़यादा अस पास को महत्व देती थी और माँ सही थी पापा के टाइम इसे पडोसी मिले जो रात बी रात हमे लेकर गए ..............सिर्फ एक आवाज़ और सब आ जाते थे ...
मेरे जीवन का रास्ता बदलने वाला सोच और संघर्ष की दास्ताँ था यह .........

रविवार, 17 नवंबर 2013

वो सर्दियाँ

कलम खुद ब खुद  चल पड़ी उस समय को याद करके जब भी यह सर्दी आती है मेरा मन खुद बा खुद उन यादों के झरोके में जा सब  यादों  एक रील कि तरह मेरे सामने ला खड़ा करता है  --- मुझे मुझ से एक बार फिर मिलवाती यह यादें।




यह गुलाबी फिजा में मेरी मदमस्त सी चाल का कोई नहीं है संभल
गुलाबी ठण्ड और बचपन की याद

चाय की प्याली और गुनगुनी धुप में फुरसत के पल का इंतज़ार
घर में गप्पे के ठहाके खिलखिलाते से चहरे
तिल कि महक  और गज़क का स्वाद
पिन्नियां(अट्टे  के मेवा वाले  लाडू ) का बड़े डब्बे  में बांध जाना
गाजर के हलवे के खुशबु में डूब मन
गरम चाय के कई दौर होना
कभी मटर के कभी मूगफली  के साथ  छिलको का साथ


बाबा कि बाल्टी धुप के साथ चलती जाती
स्वेटर  बुनती दादी कि छवि…
 ऊन से खलेते भाई  बहिन कि मस्ती
सुबह जल्दी न उठना रजाई में मुह दबके सोना
पापा का दुलार से उठना
बहुत याद आता है सर्दी का फ़साना

रजाई में पढ़ना और पढ़ते पढ़ते सो जाना
नहाने के लिए सोचना और सोचते ही  रह जाना
दाल रोटी कि जगह माँ को रोज़ नयी फरमाईश करना
लाइट बंद करने के लिए कभी रोज़ नए बहाने से किसी को बुलाना
कभी नहीं सोच यह सब याद होती है

आज अपने बच्चो के साथ बनाते देख एक बार फिर जी  लेते है

पर कुछ बहुत सताता है जाने  क्यों वो वक़्त याद आता है
आज गुनगुनाती धुप गुनगुना नहीं रही
वो ठहाके पीछे छूट गए। ।
शायद यह मेरी विडंबना  है समय कब रुका है किसके लिए रुका है
 वो मेरी याद है यह किसी और कि याद बन जायेगा। ................


दिल से 
ऋतू 










गुरुवार, 14 नवंबर 2013

Healthy body Healthy mind happy life ..


I am so much cautious when it comes to health .The mommy of two cuties make me over cautious about what and how to eat.I am lucky-- my grandmother told me many no side effect recipe to prevent day to day illness .
  • The food combination mention in ayurveda according to the weather is something I love to follow
  • A good massage increase the weight and also colon disappear
  • The tear gland closing also gets better.
  • The vinegar cures my dandruff 
  • I have all natural cleansers  for home -borax, vinegar and  hydrogen peroxide 
  • Using apple cider vinegar as hair conditioner 
  • Eating ginger powder keep the baby and mommy tummy fit.
  • The gripe water help in digestion.
  • The aloe vera cures  on skin infection .
  • The calcarea phos was given when they have teeth on the way 
  • Flex seeds and chia seeds in food make it more healthy 
  • Research is important before taking anything everybody is different and react differently
  • I do not give honey to my kids till 1 yr .
  • Nutmeg powder help to prevent cough and cold .
The chemically medicine affect worse the sensitive non immune baby's skin and body organs.I do not find justified with the infant to kids until they have immunity to feed the chemicals  .(until have medical problem)\
I have seen this all being used since ages just because they are effective and worth the need ,
My Grandparents --> my parents---> now me --->my kids
Stay healthy stay happy 

एक बात


 कभी बनती कभी बिगड़ती बात
कभी छोटी कभी खोटी बात
कभी मन सहलाती कभी मन भरी करती बात
दिल के गुबार को आंसू से धो डालती बात 
कभी कैंची  सी दिल को दुखती
कभी प्यार का मलहम लगाती बात
यह सब एक बात कि तो बात है
मन में घर और दिल से बहार का रास्ता दिखती बात
कभी मन के कभी दिमाग कि कसरत करती यह बात
कभी सालो चुप रहो फिर कहाँ समझ में आती यह बात
बात से निकली बात घंटो बात में गप्पे बनती बात
बड़ी याद आती इसकी उसकी बात
क्या बात !!कुछ बात!!प्यारी बात बनती मधुर याद


सोमवार, 14 अक्तूबर 2013

यह मुखोटा अपना सा लगने लगा है

सुखियाँ की आँखों से बहते आंसू  की वजह मेरी समझ आती थी  … एक कप चाय देखे मैंने उसे बिठाया
लगता है तेरे मर्द ने तुझे मारा  है 
क्या बीवीजी रोज़ की बात है यह शरीर के घाव तो भर जाते है मन के नहीं भर पाते। … 
कितनी गहरी बात बोल दी सुखियाँ। ..  
बीवी जी मेरे बाप ने मेरा नाम सुखियाँ रखा था की में सुखी देखना चाहते थे मुझे पर देखो। …… 
 क्या रि  सुखियाँ तू भी न
 . बीवी जी आप पढ़े लिखे लोग है। .पर हम लोग में आज भी मर्द बीवी को मरने वाला उसके घर वालो को गाली देने वाला सब बुरे शौक रखने वालाही है  अगर मेरी बेटी होगी तो उसको भी यह करना होगा
और अगरबेटा हुआ तो। .?
 तो वो भी अपनी औरत को ऐसे   ही रखेगा यानि किसी और की बेटी के साथ। ……।
अगर में उससे गाली नहीं दूंगी तोवो  मुझे देगी। ……यह  तो प्रथा है न जाने कब ख़तम होगी 
बीवी जी आप सुन रही न 
हाँ। .. 
आप और साहब की तरह थोड़ी जो हर बात शांति से करते है 
यह ले रूपये रख ले दवा  करा लेना। …. 
बीवी जी आपकी कहानी आज के पपेर में आई है 
अच्छा। …।
तुझे किसने कहाँ ?
तीन नंबर  वाली शर्मा बीवी जी मुह से सुना था। ।
अच्छा !!
उन्हें साहब ने बताया है उन्हें 
अच्छा!इसलिए प्रकाश रूठ के चले गए 
तू काम कर ले फिर मुझे जाना है कुछ काम है 
अच्छा। . 
मेरा काम क्या कम है मेरा पूरे तीस साल हो गए शादी को बच्चे बड़े हो गए चलये गए पर आज तक में प्रकाश को समझ नहीं पाई मेरा क्या काम है ?
कितने अजीब दिन थे एकदम अलग म्महौल में मेरी शादी हो गयी में चली गयी रोज़ प्रकाश मुझसे यही पूछते तुम्हे काम ही क्या है।घर  में बस प्र दिन आराम
बहुत अखरती थी यह बात पहेले लगा वो मजाक कर रहे है पर हर बात में यही बोलते थे फिर मुझे चुभने लगी। ……बहुत बार समझाया एसे मत बोलिए पर वो माने ही नहीं और शयद बोलते। ….वश्बेसिन से लेकर टावेल बाथरूम सब गन्दा करके जाते पोर घर फेल के जाते बच्चो के बाद भी यही बोलते। ।न जाने क्यों जब बोलते बुरा लगता फिर वो बुरा लगाना भी बंद हो गया। …। 
सही कह रही थी सुखियाँ मन के घाव नहीं मिट पाते आज भी दोनों बच्चो के जनम पे में अकेली थी प्रकाश ने एक पानी  का गिलास तक नहीं दिया अजीब सी दुरी बनती जा रही थी में कतराती  रही थी प्रकाश से आज भी बहस नहीं करती। …मेइन जो भी करू मुझे बुरा ही समझत थे 
एस क्यों में आक तक समझ नहीं पाई 
शायद उनके ज़ेहन में यह बात थी की कोई पत्नी अच्छी नहीं होती ? पता नहीं आज तक इसका जवाब नहीं ढूंढ़  पाई सिर्फ रोज़ बहस करना रोज़ लड़ना रोज़ मुझमें कमी निकलना कहीं घूमना हो तो बहन करके लड़ाई करना ताखी में बोल न सकू कितनी बचकानी सोच थी 
दुनिया को लगता कितनी समझबूझ वाल जोड़ा है पर हम जोड़ तो थे ही नहीं यदि मैंने बोल या अपनी मर्ज़ी बताई तो युद्ध इनके कहने में गयी तो सब ठीक 
मैं प्रकाश से बहुत दूर हो चुकी  थी न उसके प्यार का असर था न मर न न शब्द के वार  का आदमी बहुत अजीब होता है बीवी के लिए। ……
मुझे हर वो लव्ज़ सुनना पड़ा जो सुखियाँ ने सुना जानवर ,दिशाहीन,कुरूप ,बेहया  मेरे मत पिता को भी हर मुझे जुड़े इन्सान को में तब से चुप हु आज तक और अब मर जाउंगी एक दिन यह सब अपने साइन में लेके 
किससे कहती घर की बात माँ तक भी नहीं जानी  चाहिए  
आज सुखियाँ मुझसे जयादा सुखी थी वो अपना दर्द बाँट सख्ती है मैंने तो अपने दर्द का मुखोटा  हस्सी वाला बना दिया अगर किसमत में यही था कोई भी होता प्रकाश या अंधकार यही होता 
मेरे प्यार को धू धू  करके जलता देख  मेरी आत्मा को जल दिया मैंने पाया तो बहुत कुछ बदले में बच्ची के लिए दुनिया के लिए माता पिता के लिए सबसे अच्छी बच्ची हु में 
जितनी भी मेरी सखी थी सब को कोई न कोई दुःख था मेरी किस्मत में यह था। … 
पचीस साल से ज़यादा  हो गए मैंने अपने मन की बात नहीं बोली प्रकाश से 
हम कहीं दस दिन की छुट्टियों  के लिए भी नहीं गए 
इतना मुश्किल था यह सब शायद बिलकुल नहीं क्योंकि अब यह मुखोटा अपना सा  लगने लगा है 
पचीस साल हो गए मैंने बहस नहीं की बात नहीं की और अब जरुरत भी नहीं 
सुखियाँ ने हमे बात करते देखा था ? शयद कोई एक बोलता था। 







बुधवार, 14 अगस्त 2013

हर friend fragrance बढता है :)

I met with a minor accident and I have a minor surgery in my elbow. I was in the hospital for around a day in the government hospital  .I know the smell  was so upsetting in even in the deluxe room .It was my bad that i have to stay  for a day their .I want to go back home and try to convince my parents  .
My best  friend came and we chat for around 2 hrs .She came with the 4(chandan,lavender,rose,mogra ) pack of fragrance stick and   a stand . She lit   four @ time and ask my parents to do that .It come as a blessing we chat for 2 hour and I forgot that I am in the hospital .The packet I left with some and gave it to the people in the general ward .It was more horrible their .
This is life When I  see the best place in the world or  I put the perfume  I remember that night.It might be smelly but sure give a lesson to make it smiling .
हर  friend fragrance बढता है  :)

https://www.facebook.com/AmbiPurIndia

बुधवार, 24 जुलाई 2013

तेरे दर


एक लड़की औरत बनके अपने गहर को सजाती है सवरती है बदले में थोडा सा प्यार चाहती है खुश रहना और रखना चाहती है सम्मान चाहती है ।अपना अस्तित्व छोड़ के नए माहोल में ढलती है ……। लेकिन कभी कभी सब होते हुए भी उसके अस्तित्व को पीछे छोड़ दिया जाता है उसके बलिदान को उसका फ़र्ज़ बना कर शोषण होता है । यहे लड़ाई  औरत मर्द की नहीं सोच की सोच से है । बहुत सी बातें नज़रंदाज़ भी कर दी जाये लेकिन एक दर से दुसरे दर का फासला नापन इतना असं नहीं होता कभी ज़मी अपनी नहीं कभी असम पराया लगता है 

कुछ बहुत से अरमान लेकर आये थे तेरे दर पे आये थे
कहीं नहीं तुम को छु पाए
कुछ इलज़ाम लिए आज चले जा रहे है
एक और औरत की कहानी जोड़ कर
उन आसू का सेलाब लेकर
जिनका हिसाब कभी तुम से नहीं माँगा
पर तुमने हर उस लम्हा का हिसाब खुद ही लगा  लिया 
इतने कठोर ह्रदय के द्वार  नहीं खुल पाएंगे कभी
एक कदम तुम भी न भी बढ़ाते तो क्या
मेरे कदम तो न खिचे होते
आज खुद को एक  रास्ते पे अकेले महसूस कर रही हु
जह पलट के भी न देख पा रहे हो 
इतने कठोर हो तुम आये न होते तो भी ठीक है 
पर अपने से अलग तो न किया होता 
उन लम्हों को भूलना असं है तुम्हारे लिया 
क्या कभी एक लम्हा न याद आया मेरे साथ का 
इतने कठोर  बन गए कभी कबर भी नहीं ली 
वसे मन मुटाव के बाद रिश्तो में गर्माहट कहीं खो गयी  थी
डोली तो उठी पर अर्थी नहीं 
न यह दर में है न वो अब तो दर दर की ठोकर है 
मोहताज तो नहीं हुए लेकिन प्यार से विश्वास उठ गया 
थोड़ी सी इज्ज़त के लिए पूरी इज्ज़त नहीं गवाने की चाहत रह गयी 
दर दर पे जी ही लेंगे हम एक और

शुक्रवार, 28 जून 2013

तुम मेरे भगवन बन गए..............

हर एक के जीवन में वो पल आता है जब भगवन से भरोसा उठता है और कुछ आक्रोश आता है ,अगर हम उसे जीत गए तो सब पर हो  जाता है। उम्र के साथ एक ठराह्व भी आता है। अपनी भड़ास निकल देने में ही भलाई है  ........वो हमेशा याद रहती है कभी ख़ुशी कभी गम बनके .......




मेरी परेशानियानो के दाता, क्यों तुम मेरे भगवन बन गए
मेरी आँखों में अनकहे आंसू  भर गए
अपने वर्चस्व की धक् जमा कर अपने को मर्द तो बना गए
नफरत की आग  तुम्हारेअन्दर ...कहीं और लगा देते ,तो आज अस्मा अपना लेते
सब छोड़ के मेरे सामने आ जाते हो
मनहूसियत के देवता क्यों खुश रहना तुम्हारे लिए नामुमकिन है
जब की छोटी सी  ज़िन्दगी है
अपने लिए खाई खोद रहे हो
उसमे हम भी गिरेंगे
जिस मौत का इंतज़ार कर रहे हो जब सामने आयगी तो सह नहीं पाओगे
आज जीवन  से जी चुरने वाले काल से कोई नहीं बचा है
बड़े बूढ़े बच्चे जवान सब से घिरे  हो
किसी को मुस्कान देना बहुत मुश्किल  है दर्द तो सब दे जाते है
अपने दर्द में शुमार करना असं है पर आदत न डालना नहीं तो  तमाशा बन जाता है
बहुत आदि हो अपनी ज़िन्दगी के एक ढरे  के पर किसकी को रस नहीं आएगा यह  रुख
रूखे सूखे से बीत जाती है ज़िन्दगी पर प्यार को  रेगिस्तान कर  सुख जाती है ज़िन्दगी
हर तृप्ति को अपने पास कर तुमने ठुकरा दिया
जब मैंने अपने अलीगं में लेना चाह तो ठुकरा दिया
आज मेरी ठोकर से तुम बदल लेने पे उतारू
इतनी बेशर्मी सिर्फ मर्दानगी के लिए
मेरी  उपेक्षा से क्या साबित कर पाओगे
भगवन तो तुम नहीं  रह पाओगे।


मंगलवार, 18 जून 2013

त्योहार की गरिमा

मुझे हर त्योहार मानते हुए लगता  है........ क्या में वसे ही मन रही हु ...जसे की मेरे पुरखे और खानदान  में मान्य जाता है ...क्योंकि में लड़की थी ......शादी के बाद मेरे पति के रिवाज़ मुझे निभने होंगे ...पर अपने बुजुर्ग से दूर है हम ..जैसा  जितना बताया उतना कर दिया ............पर एक कमी और जिज्ञसा का एहसास रहता है ---क्या  त्योहार  इस वंश में मानता होगा  ऐसे ही जैसे में माना रही हु ..हमेशा मेरे दिमाग में घुमने लगती है ..?....जितना इन्टरनेट पे है उतना भी अधुरा है ..क्योंकि बहुत सी रीतियाँ जैसी  थी और जैसी  निबये  जा रहे  है वो अलग है  ............हर रिवाज़ के पीछे छिपे कारण हर आधार से सही होते है (मेरे हिसाब से )...मुझे हर त्योहार में डूब के मानना ख़ुशी और मस्ति के साथ बहुत से खाने और कुछ कुछ बनाना अच्छा  लागता है ....हम सबको अपने बुजुर्गो से पूछकर रिवाज़ को नेट पर डाल देना चाहिए ....आने वाले कल के लिए .......

मैंने  त्योहार की गरिमा और रिश्तो में नमी को महसूस  किया
दादी के हाथ का लड़ ,ताई के लाडू का स्वाद 
चाची की मठरी और बुआ के दुलार को माँ के पूरे मन से भक्ति के भाव
पापा ताऊ चाचा के तोहफे  के अम्बर
हर छोटे बड़े के अपनेपन को घर में महकते रिश्तों को 
रंगोली को खुद से सजाते पकवान बनते
कब रिश्ते अटूट हो गए पता ही नहीं चला
आज ही सोच  रही थी क्या इस भागदौड़ की ज़िन्दगी में
एक मिनट   भी भगवन के लिए नहीं है ...
सब कुछ होते हुए भी मन की शांति नहीं
बड़ो से दूर रहने का दंश रिश्तो में खिचाव
कभी अपनों से जलन,द्वेष ,कपट की भावना
न जाने क्यों हर त्यौहार पे यह सब त्याग लगता है
मन शुद्ध हो जाता है
वर्त मुझे सुखुं देता है
पता नहीं क्यों मुझे लगता है मैंने सफलता प् ली
शायद यही संस्कार होता है .....
जीवन तो बहुत है जेने के लिए पर सफल जीवन इतना असंनहीं
........




शुभ इच्छा

बुधवार, 5 जून 2013

Seema --opted a boundary

The regrets of life are that that big that we can forgot to live the happiness out of it .In the most difficult time of life we learn the biggest lessons and friendships .The bad time might be big but when it end it gives peace .
It not a race of men and women ..not the race of families ...its the race of respectful survival and importance existence...Which should be understood by all the human being for the well being of world .Again I try to confine me to a relationships  and try to get the solution .Hope you enjoy it ....Love n hugs ...






I sat with seema and find her in great grief
I have no words to tell her all persons near me are shocked ........as she ran and hugged me and burst into tears..
I am unable to react but can her pain and tears  upset me a lot ..
i can feel the depth of her pain ...but where this pain come from... Is Shrey all right ............?kids ....? financial  loss ....? .on occasion of her silver jubilee marriage anniversary
I took her in there was long silence .........  I am not able to  get her why..?
then  she said Shrey and she had the worst relationship ever she had ...............
I was so shocked ...the relation that all friends and relatives think is the best she is saying it worst ...............
I really want to console her but my words are lost and the best moments of there relation just flowing like a film reel in my eyes then ........my mind start searching for the flaws in it ...I recollect myself and try to work as the situation demands take her inside the room and ask everyone to enjoy the party ....
We went inside I ask Shrey to handle everyone outside I will just work up with her
.I pat her sit her down give her a glass of water  she seems settled ....
I want she should tell me but I guess she is not able to so I ask her to say ..
She said "rit... " thats what she call me
I was in hell from last 25 years of marriage -- I want to do this  all my life on all anniversary on all birthdays do not know what stop me .........finally everybody knows it
I  was living the way he want me to do -- cook, eat,  go,  learn things,  am dead 24 years back we fight daily  without any reason

I am  staying here just because I can't leave things  what not I try to save for my family till my son is independent...If I remain quite and do all things together then ...  it is good  else there is yelling ,fighting , abusing at its peak  .............No matter what ....no matter the reason ...........do not know what can make him upset
I respect everybody .....do I need to be diplomatic to my husband .....
I do clean, iron, cook, go for  my check up myself , teach play and care  for my son, 
he does lot of work  go to office come from office do not know what he do there ...but when he come back he neither play with my son nor talk to me  just chat with his friends and family .....
..no matter what we do at home ....even if we are ill do not ask for it or take feed back on phone   call only when he wants............go to the places he like and even force us to go there 
We are not  family so no family time ........do not want to eat with us but want to served as soon as i say ........
If I ask him I want to go some where he will find an excuse or start acting weird  he want me to be obedient and quite may be yes man ship types ..............if he take me to mall then he want to eat his good food but do not want to serve me..anything ..... so cheap........... he can spend and lay any money to his friends even unknown one  .............he just do not allow me  to get into the mall i have to come out without anything in hand  he says he is different yes he is ................as soon as i bu anything start telling me the bill and amount.......but he eats chicken daily do he ever discussed the bill ................no he will not  and never ..he go to go good restaurants and take us to the cheapest possible place to dine...........
Think 1000 times before admitting my son to any class or  for his toys
I know it is hard for you but what do you want now ..?You want to leave and step out or stay here ..?
I want to leave this place ...
Are you sure ..?
I guess
Do you have conversation ..?Do you feel you are always right ?you ever thought what he is trying to tell you?
He never talk to me we only fight ..what you are trying to say .?
I am just telling sometimes the perception are different and you take it other way ...he took it other way
In 100 % marriages there are problems but the fact is we have to overcome by our means before it gets worse -- many people make it a habit-- many people sit and sort out -- some take time and come out of it ---the women by her humor make it good .you need to chill and relax and stop thinking about everything .
I know its being 25 yrs you need to give at least 25 more days with a new perception to your marriage may be he will melt and tell you everything .
he is a heartless men he will never
the time,age and settlement make things better I just want you to give some time to it .only 25 days but you need to write up the things you love and hate about him and you sit back and sort out or may be by doing that you get your answers ...
Because you are saying so I can do it but I know it is not going to work
I know it will work ...Seema you need to break the boundary
After 25 days
Thanks Sweetheart it worked and I am better person now ...........
I told you enjoy you past 25 yrs .......with coming one :) Shrey and Seema --

रविवार, 28 अप्रैल 2013

अर्श से फर्श


अर्श से फर्श तक के सफ़र में याद आ गयी 
वो बातें तो अर्श पे चढ़ते  भूल गए थे 
उस सफ़र की याद ही रह गयी 
अर्श पे थे तब फर्श याद न रहा 
फर्श के लोग भी कमज़ोर लग रहे थे 
अपनी धुन और  ख़ुशी में इतना मगरूर थे 
लोग हर तरफ जलते है इस एहसास में भुला दिया
हर नज़र में अपने लिए जलना ही देखना चाहते थे 
हर बात में अपनी तारीफ ही सुनना चाहते थे 
बस " मैं " और सिर्फ " मैं " की दिवार बना ली 
अपने को भाग्यविधाता बना दिया 
माँ पिताजी की इज्ज़त भाई  बहिन का प्यार सब छोटा हो गया 
गुरुर का सुरूर सर चढ़ गया 
आज अपना अक्स अपने बच्चो में देखा तो जाना पाया 
क्या कर दिया मैंने ?
जन्मदाता के कर्मो को तोल दिया 
भाई  बहिन के प्यार का मोल किया
दोस्तों की यारी को जलन करार किया 
आज वहोई अक्स वही आवाज़ सुन रहा हु 
फर्क यह है कल जहाँ में था आज मेरे बच्चो की आवाज़ है 
आज अचानक जब फर्श को छुआ तब एहसास हुआ 
एक नजरिया था अर्श का जो आज फर्श का एहसास करा गया 
कर्म को सुधरने  का मौका धर्म से नहीं मिलता 
कर्म का भोग मैंने किया ...और मरण तक करूँगा 
सही गलत हमेशा पहचान थी पर भटकने में भी तो एक पल ही लगता है 
कभी अपने ऊपर आयेगा यह सोचना भूल गया 
 आज मेरी मूक आवाज़ और दर्द को बटने वाला कोई नहीं 
में एक मुसाफिर था -काबिले में रहना है या यायावर आज तनहा हो गया 
ऊपर नीचे विपरीत है पर बोलना तो साथ ही पड़ता 





शुक्रवार, 19 अप्रैल 2013

सिसकियों

आज  पड़ोस  से  आती  सिसकियों की आवाज़ बंद हो गयी ...............अचानक ... रोज़ सिसकियाँ सुनती हु ...आपने को बहुत मुश्किल से   रोक पाती हु --- सुबह दस बाजे  के बाद और  रात को दस बजे के बाद ...आज अचानक बंद हो गयी ...मुझे अच्छा लगा ..
 लेकिन, आज यह क्या --आज सिसकियाँ रोज़ से दुगनी आवाज़ सुनायी दे  रही थी ...........आज शायद कल की  ख़ामोशी आज  के तूफान का संकेत था ....
  आज नहीं रोक पाई, जैसे ही अन्दर घुसी मुझे देख लिपट गयी ...जोर जोर से रोने लगी समझ नहीं  पाई ...क्या करू  बैठ गयी...उसे चुप     करते कराते मेरे आंसू आ गए .....शब्द कम पड़ रहे थे ..उनके आंसू के बीच में मैंने पुछा क्या हुआ ...........सिसकी ---हिचकी बनी और शब्द निकले...
मेरा रिश्ता  मेरे पति के नहीं निभा पा रही.......
 अरे इतनी सी बात सब  ....    के बीच में लड़ायी होती है क्यों परेशां होती हो .... 
 लेकिन यह क्या ---चलो चाय बना दू
   मेरे साथ एसा नहीं है ---मेरा पति के जीवन में कोई  औचित्य नहीं है ---उसको मुझेमें कोई दिलचस्पी नहीं ,अपने घर  वो मेरी बात नहीं करता .....शादी के बाद से बोलता है उसके सपने बिखर गए.... में कितनी भी बीमार हो पानी तक नहीं देता ... कैसा भी खाना  बनाऊ. कभी पसंद नहीं  करता...  कभी मेरे पास आ कर नहीं बेठता ...कभी प्यार के दो बोल नहीं बोलता ...हमेशा लड़ता है ...मूड हमेशा  उखड़ा रहता है ........मुझे  जेबखर्च नहीं देता ...दूसरो के सामने नीचा दीखता है .........    मेरी किसी भी काम में न मदद करता न तारीफ  दूसरो से  मुझे कभी मेरे घर वालो को नीचा दिखता है.....हर बात में अपने मुझ में  बुराई  ढूंढता ..............कभी मुझे किसी से नहीं मिलवाता ....
 अरे सब के साथ होता है एसा .............पर हमने लगता है सिर्फ हमरे साथ ही  ऐसा हो रहा है ..............तुम आराम से बात करके देखो .................चाय तो  पीके देखो
मुझे नहीं पाता तुम्हे क्यों बता रही हु जबकि में जानती भी नहीं  तुम अपनी लगी या जो भी समझो .....
  तुम निश्चिन्त रहो में ..किसी ..
  कोई फर्क नहीं ................
    तुम  बात करके देखो
     बात ............इतनी जोर से हँसी .......रोने.वाली हँसी
  क्या हुआ ?
    बात नहीं करते -- मेरे पति 
मतलब 
सुबह अपना  डब्बा लेके निकल जाते है ...न गुड मोर्निंग ...न रात इतनी देर क्यों जागी  ........न ऑफिस से फ़ोन ....न शाम को आने के बाद पूछना... की क्या हुआ ? न क्या किया? अपने में रहना  ....न मेरे साथ खाना न सोना न जागना....शादी के इतने टाइम बाद भी में अनजान है एक दुसरे से..........मुझे लगता है में  दिखयी नहीं देती .......मेरी आवाज़ सुनायी नहीं देती ...........कुछ भी करेंगे तो  उसका एहसान जतना नहीं भूलेंगे .............  अगर कोई  मेरी तारीफ करे तो  बोलते है तुम जन बुझ  कर करवाती हो.......में सीधा बोलू  या उल्टा कोई फर्क नहीं .......... वो उल्टा ही लेते है.............कभी जो हमारे रिश्ते में कमी है  उसे पूरा करने के बजये बढ़ाते रहते है ..............में जो कोशिश करती हु उसे नाटक लगता है ..................
 अच्छा आज तुम उनकी पसंद का खाना बनाना और टेबल  को  मोमबती से सजा देना और फिर देखना ............
   में कर चुकी हु ..
 ......फिर
       ..फिर क्या अपना  खाना ख़तम किया और उठ कर चल दिए ..........
 क्या बोलती ........
 टाइम के साथ सब ठीक हो जायेगा 
 मुझे लगता था पर इस बार नहीं..............
 ..क्यों ..
.......क्योंकि न वो मुझसे प्यार करता है न बात न अपने मन की न दूसरो की ........... बस एक खाई  है हमारे बीच   जो कभी नहीं भर सकती 
 तुम अपनी सास से बात करके देखो..............
     मेरे पति ने हमारे बीच का सम्बन्ध  कभी बनाने ही नहीं  दिया ............अपने से दूर अपने घर वालो से बात नहीं करने देते ... .....  बस अपने में रहते है  की काम मुझसे नहीं पूछते ..कल क्या ?कैसे होगा ?कुछ नहीं ?....
   मुझे समय का ध्यान ही नहीं जब घडी बोली तब याद आया घर जाना है..................शायद  वो मेरी बात समझ गयी ..........मैंने आज्ञा ली  ...उससे बोला आ जाये जब उसका मन करे ............पर मैंने दिल से नहीं बोला था  क्योंकि .......मुझे डर था ...पता नहीं मेरे घर की शांति का क्या होगा  .
में चुप चाप  बेठ गयी
में पूरा दिन अनमनी थी में किसी से कुछ कह नहीं सकती थी अपने घर की शांति नहीं भंग करना चाहती थी
पता नहीं कुछ समझ नहीं आ रहा था
कभी सोच रही थी की शाम को खाने पर बुला लू ...पर अपने घर के शांति भंग नहीं करना चाहती थी ...एक अनजाना  दर भी लग रहा था ....उसका रोता चेहरा सामने आ रहा था ..............
जैसे एक हफ्ता बीता ...कोई जयादा रोना धोना भी नहीं था .......मुझे  सब ठीक हो  गया
  मन  हुआ देख औ पर पता नहीं कुछ रोक्न्रह था
अगली सुबह कुछ आवाज़ आई पता नहीं क्यों  मैंने कीहोल  से देखा पता चला कुछ खून और स्त्रत्चुर पर कोई जा रहा है मेरी सास रुक गयी .........
पर यह क्या वो तोह पीछे जा रही है ......लगा कुछ मुक्त हुआ ...................
उसके अनसु दीखे पर दर्द नहीं था 


सोमवार, 18 मार्च 2013

Idiya



An idea can change life .I feel it was joke but I in deep corner I believe in it .. if you real passion for it is not a joke .
When I was in my early teenage in 1990's I saw a dream of the old lady tortured by her kids,I got up and that dream come 3 day in a row and this was followed by a dream of combination of the so called ditched by there own family.This dream grow big but still in my heart-- may be in future I can complete it with this hope I  rejuvenated it everyday and will be fulfilled one day .I am taking time because right now this is the time for growing and giving to the family.I am going to live 80 yrs(my gut feeling ;)) I will be free at 50 yrs I have 30 yrs left and definitely I have the capital to start it for sure .I do not know what gives me this confidence for this .
A place which has the flow the flow of money,person, resources and service.
The biggest problem of World is to be alone the time we realize its always too late ..We are young we can  live alone but as we grow old we need family ........when we grow we need family...when we in trouble we need family....I am sure I will start.. Will start from school as I am best at it .:) so far  I know myself

  • Make a school
  • Tuition center 
  • Paid Professional Teaching School
  • Theme Farm (rent for marriage and parties)
  • Kid's castle
  • Travel (Travel packages across the country)
  • Women Professional training center 
  • Service old age home
  • Orphanage 
  • Special school for special needs 
  • Mentally or neurologically challenge person


First, I need to make the money so school is the best to start for .In evening I can open the training center with the major professional centers .The building for the old age couple need life and space and relaxation at that age they can stay there as long as they want I need to divide the building in dependent, independent and medically serious person .Same thing I need to do with the orphanage age wise and need type.The merger of start and end of life going to be lively when helped by the youth .

Travel, theme farm and professional training school will give me money and rest will be on it' own.I know what I am writing seems to be awesome but practically it is not ...Legally,politically and socially the success of it is not a day thing.Just waiting for the day when I understand and keep me mature and strong to keep it up and work I cannot afford it to fail .
I know there are many positive and negative part of it but the infrastructure need to be unbeatable and working.Even if I can make up to one level the flow will be gained on its own.........
I cannot stop walking on slippery surface just because the fear to fall but sure want to wear the right shoes........

I am sure this Idea will change my life
http://www.isb.edu/idiya/
Amen




शुक्रवार, 8 मार्च 2013

Women's Day

All are the days of women .But we celebrate and give gratitude and thanks to all the women in the world for what they did . It is just not the word or wish it is by heart acceptance that you can give respect and position of women no matter what.If you do not feel like that then you challenge it by your saying rest day we need not to respect n much more . No one is forcing  you to do so .
But, also challenge mother's day  that she is just a mother for one day rest days she is nothing .
A day is made to take a resolution you will do specific things at that time .
Love and respect is what women needs you cannot catgorise it as mother ,sister or some bar dancer or slut or anything like that they are ultimately women .We women do bitch about it .So a day when women need to feel special about her .

You should have guts  to face and tell the men no matter father,brother or a friend to respect it .
Can you stop your father when talking to your mother in high pitch or someone who is staring your sister with an intention of harassment ?May be you can... most of you can ........
Can you accept and respect your girl friend if she spend a night with you.....?
Can you accept your wife as she is ..?
Can you help HIV women to make her single day good?
Can you tell you mom how much you like to watch sexy women but can't see your wife for it .?
You are in the dilemma of relationship and just being me making you harsh enough to just give an insightful  testimony of women ...
Can you marry your  daughter with  this person  mentality..?
 Anyways I am not judging anything just think why anything with women is so questionable?
I feel may be those people (men n women ) are self obsessed  and never meet the good side of person .

I am not explaining but I am showing you the another part of it .I am not being rebellious or protective but I respect human being and the women who did exceptionally good.I am lucky to have  my mother,my mil,my grand mil ,my sisters ,also thanks to men in life who respect for being what I am ..if not then even I am okay :)..
Men and women are parallel not the rivals. If both spread love n respect life is wonderful ..

शुक्रवार, 1 मार्च 2013

Aloof

In site of aloofness I find me more and more lost
just come with my out here and there
Bring it once come back and see me
There are so many horrible ways to do
Justify the decision that God made for me
The Maggy out of pot and the pondering and wondering heart
Fails many times to come out of it
There are many greedy places where I find many person
with lot of expectations
The never ending greed of person make him distracted him from path
I am sad from heart not for the one but for many reasons
Me being a person lost in work and world for someone
That someone is busy to take a charge
the newness and kind of many ways have been ended
Just the ashes of the burnt relation that is seen
Even pretend to be happy become so difficult
The few lies in heart make you carry the relationship
no matter how hard it is for u 
The endless senseless fight without reason arguments
The heavy heart of love ..
The question on being  living
The perception of so called healthy and happy
The loss of respect understanding and warmth
What can move the relation ?
The social pressure is moving the relation on ...
The sight of being bound 
The lesson of being together






Braids n fantasy

Oh my oh my !! this is something  I am waiting to write for long.But it is one of the complex of life ....yes I have it in me and I accept it .

I was in the school of 90's very strict ,type cast and straight not that glamorous school now ...we have the strict rules and we follow ...When I see today's kids in school they are having fun like anything nail paints,hair accessories I am sure rules are there but they have an option to work on it .We have nothing allowed not even heena in hands only red ribbons.Today, the school girls look great ..we look typical boring person.We just wait for the college to do all this.I enjoying watching my college going relatives with full of accessories and new dresses all the time specially the matching hair accessories .. When I see the girls in class with long beautiful hair and nice braids with two velvet ribbons or one at times I got pinched ,I have small hair but  long hairs are  eye tonic for me ;) and find them lucky to have it.My mom was working and it is difficult for her to manage my hairs.I have boy cut to sadhna cut to steps cut that's it whole my life ...I regret it I feel I need more hairs and will not go to barber at all ..I cry but my dad is super dad and convinced me to cut the hairs .... I was surprised by the incident when my school friend with long hairs said she wish to have hair like me ..I m like are you kidding me ..You must have big hairs she said I do not like to look same all the time I want ponytail  or open hair (In my school we cannot have the long hairs without braid)..I was so shocked and feel that no one is happy of what they have ......but I make the khajoor chooti  at times and feel happy :)....

When I am looking for the soul mates there was one more thing I was considering secretly :P as my hair texture is thin I need a person with good hair texture ...sounds funny, but I really looked and get it...
I still have the fascination for it if I had a daughter she must have a long hairs but as it my inner core I love it (i remember agar" kisise ko shidat se chaho toh mushkil se milta hai ").....Still my hair texture is so bad I have splits end but  regular using dove shampoo and  conditioner also cutting on time keeping it till shoulder length ..I am trying ....hope till I die I have good white  hairs ...:)
When I see Disney princess  I m in  love with the hairs few of them have long hairs naturally ...........OMG! this is super liked thing for me..... 

Enjoy writing it and get nostalgic about the class and friends and college mates my fascination n complex  for long hairs ........thanks for the contest ........


http://www.dove.in/en/Products/Hair-Care/Split-Ends-Rescue/Dove-Split-End-Rescue-Shampoo.aspx

शनिवार, 9 फ़रवरी 2013

इंसानियत

इंसानियत की सीमा छोड़ कर जानवर से बतर हालत के शिकार है 
कोई हमसे पूछे तेरे दर्द क्या है ? 
इतने बेचारे हो गए है दर्द शकल से झलकने लगा है
छुप छुप कर करह रहे है लेकिन वजह नहीं बता पा  रहे है
दिखावे का जीवन है जाने क्यों हम जी रहें है
मुखोटा है यह जो सब देख रहे है
कभी बधन से आज़ादी के बात लगती है
कभी कोई बेचारी नज़र से देख तो बड़ी आग लगती  है
बड़े इन्सान और रिश्ते की चाह   बांध गए थे आज सब खोखले लग रहे है
नारी के रूप में बेटी और माँ को अलग बिठा रख है
बीवी तो आज भी बोली लगती है
कभी अग्नि परीक्षा कभी कुछ और
बस अब और सह नहीं जाता
क्या कल में भी ऐसी ही सास बनुगी ..?
इस सोच से भी डर  लगता है   .......
क्यों शादी ज़रूरी है ..?यह सिर्फ एक मज़बूरी है ....





बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

KBC

घर बेठे बेठे  भी सब खेल रहे यह खेल
हॉट सीट पे नहीं लेकिन कुछ कम भी नहीं समझ रहे
एक आम आदमी हाथ  मिलता बिग बी से हर आम आदमी ले लेता गर्माहट 
जब कोई जीतता सब जीत जाते
इतने आसान होते है जवाब  हॉट सीट के बहार लोगो के लिए
यह lifeline लेता तो अच्छा होता या फिर यह करता तो  अच्छा होता
टीवी ,नहीं घर में भी सब KBC ही खेल रहे  होते
"अबे यह बोल यह तो हो ही नहीं सकता"
कभी यह सब क्रिकेट में था आज KBC में है ............ 

रविवार, 27 जनवरी 2013

क्या क्या हु............?



कभी घर के कोने पड़ा गुलदान हु 
कभी काम की वक्त दिखने की हु
हमकदम के बहुत दूर और न जाने किसके पास हु 
अपने अक्स को देख रहे है पर परछ्यी  से दूर  हु
दुःख को देख के सुख में बदलने के सपने है
कभी अपना कभी उनके चक्र में उलझी हु
अनाड़ी  कभी छोटी कभी बिगड़ी हु
एक कसौटी पे हु हर बार की परीक्षा के लिए
कभी  अपने अस्तित्व के लिए
कभी घर के असित्व के लिए
कभी तारीफ कभी दुद्टकर की
पिता ,पति,बच्चे में पिसती एक दाना हु
कभी किरकरी कभी आटा हु
कभी सख्त कभी नरम हु
क्योंकि में हर पर्सिथी  मेंढल जाती हु 
क्या इसलिए में समझने में मुश्किल  हु ..?
नाम कभी होत्ता नहीं बदनामी में कसर नहीं
घर संभल तो लायक नहीं 
बाहर  संबल तो सुघड़ नहीं
दोनों किया तो घमंडी सही ........
सबकी मानी  तो बुद्धि नहीं
अपनी चलयी तो मगरूर
अगर चालाकी करी तो  सही .......
अच्छी बेटी ,अच्छी बहु और अच्छी माँ बनाना
बहुत ज़रूरी है सारे जनम और पाप मेरे हिस्से के .........
क्योंकि यह सब एक मर्द ने रचाया है
भवर  जाल में हम फसे है
किसी को क्या फर्क
इज्ज़त जाये तो माँ नाराज़
पति नाखुश  तो सास नाराज़  
बच्चा बिगड़े तो माँ का कसूर
सब के पीछे एक नारी
वह !! रे मर्द फुट डालो राज़ करे की नीति अपनायी
चल तेरी माया ने मुझे भी फस लिया .......:)







रविवार, 6 जनवरी 2013

बोली

यह कविता कहीं घर घर की से प्रभावित है में जानती हु कितना मुश्किल है एक मुकाम हासिल करना /आज जब सब सखी मिलती ई तोह अपने सास ससुर के साथ रहने से घबराती है (कोई माना नहीं करता ?) समंजयास मुस्किल लगता है जब रहने लगते है तो आदत हो जाती है l  हम भी कहीं न कहीं अपने कल को देख कर डरते है l सब समझ कर भी कभी नासमझ होने को जी चाहता l थोड़ी मुश्किल बस अपनाना और अपनेपन तक होत्ती है उसके बाद आनंद है l


उन मता  पिता को याद कर रहे हो जब बच्चे तुम पे चीख  रहे है
कल कहाँ थे जब वो तुम्हे  बुला रहे थे
 अपने परिवार का हिस्सा नहीं मन रहे थे
आज क्यों बेदखली पर उदास हो
आज बहुत याद आई होगी उनकी
पहले तो बस दिए पैसे का हिसाब मागने के लिए याद करते थे
उन्होंने कभी तुम्हे दिए पैसे का हिसाब नहीं माँगा
 तुम उनकी एक पैसे उनके ऊपर खर्च को फिसुल खर्च था
आज अपनी ज़रूरत के लिए पैसा मांगते हो तब शर्म कहाँ चली गयी ?
एक दुसरे भाई पे खर्च  टालते हो
काश !! आज हर माता  पिता अपने बच्चो से वो बदला ले सके
उन्हें उनके किये की सजा दे सके
बड़े विरले भी मिलते है इस रहा में
जो बीमारी और उनको बोझ समझते है
आज में अमीर -कल के डर  से होना चाहती हु
पर उस अमीरी की सीमा कौन तय करेगा ?
क्या मेरे सस्कर इतने खोखले होंगे ?
अपनी बोली लगे देखना अजब होगा
बोली का तो जमाना है
कभी हम खुद लगते है कभी कोई और ........
हमारे कल के शब्द  हमारे आज में आते है
मुझे मेरे कल पे इतना भी विश्वास  नहीं है ...
बयार का कसूर है या मेरा कहना कठिन होगा ......









इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.