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मंगलवार, 18 अगस्त 2009

किस गली है मेरा देश

जाने कौन गली है मेरा देश
क्यों .?मेरा घर ही है परदेश ,
किसने यहे नियम चलाया
एक शहनाई ने करा पराया
एक अंजन को जीवन दे डाला
जिस घर में उमर बिताई उसे ही नाता टूट जाता
बाबुल सखी, अटखेलियाँ सब हो जाते परये
जब प्रीत ने बंसी बजाई ।
जाने कौन गली है मेरा देश .
डोली में बेठे तो असू उतरे तो खुशी
पल पल बदलती यहे ज़िन्दगी
सालो के प्यार से पल का प्यार आगे निकल जाता
पल में पराया अपने सब कुछ हो जाता
आने वाले कल की तस्वीर बन जाता
जाने किस गली है मेरा देश जहाँ थी वो था परदेश ।

11 टिप्‍पणियां:

M VERMA ने कहा…

किसने यहे नियम चलाया
एक शहनाई ने करा पराया
==
बखूबी आपने नए बनते रिश्ते और बदलते परिवेश को उकेरा है.
बीच बीच मे रोमन शब्द प्रवाह मे बाधा पहुँचा रहे है. इन्हे एडिट करके ठीक कर ले.

श्यामल सुमन ने कहा…

किसी की पंक्तियाँ याद आयी कि-

नदिया के दो तीर हैं बेटी का संसार।
आधा जीवन इस तरफ आधा है उस पार।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

वाणी गीत ने कहा…

अच्छी कविता ...मगर बीच में अंग्रेजी के शब्द व्यवधान डालते है ...इसे दुरुस्त करें ...क्या बात है ...हम भी सुझाव देने लायक हो गए ..!!

लता 'हया' ने कहा…

Achchhi rachna hai...likhti rahiye..

Lata

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

भाव से भरी सुंदर कविता,

ACHARYA RAMESH SACHDEVA ने कहा…

JISNE BHI KIYA ACHCHA HI KIYA.
DESH CHALA, PIDHIYA CHALI
RISHTE BANE
KAVITA BANI ...........
RAMESH SCHDEVA
hpsdabwali07@gmail.com

नीरज गोस्वामी ने कहा…

अच्छी रचना है...लिखती रहें
नीरज

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

अति सुन्दर
---
ना लाओ ज़माने को तेरे-मेरे बीच

HEY PRABHU YEH TERA PATH ने कहा…

sunder*****

रज़िया "राज़" ने कहा…

वाह!!!!!क्या ख़ुबसुरत रचना है आपकी!!! बधाइ स्वीकारें। मेरी आजकी रचना ज़रूर पढना।

Ritu ने कहा…

mein ek dhnyawad se app bhi badai ko chotta nahin karna chati par mera man abhibut hai is prashnsa se ...........mere manobal 100000000000 guna bada gaya hai ....mein appni lekan galtiyon ke liya shama chati hu

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