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रविवार, 27 मई 2012

एक ख्याल ..

 मुझे हमेशा "ख्याल" अपनेपन का एहसास देता है . में यहे जान नहीं पाती हर ख्याल मेरे मन में उथल पुथल मचा के जाता है और में हर बार उसे एक तरफ रख कर कुछ नया बनाने के सोच लेती हु .इस बार इसे मैंने कुछ हद तक पकड़ने की कोशिश की है .....

बदलो की तरह  आते जाते मिटते ख्याल 
हर ख्याल पे ध्यान दो और  वो प्रश्न बन कर
 कटघरे खड़े करते 
 खयालो को मायने न दीजिये  इनकी गति  न पूछिए 
इनके बहकावे में आ कर मन और दिमाग की कसरत हो ही जाती है 
कभी प्यार से सरो बार करते कभी गम को सागर में डुबो जाते यह ख्याल 
सतयुग  से कलयुग तक ख्यालो के महल बन गए 
छोटा सा लगने वाल ख्याल पूरी ज़िन्दगी नाचता रहता ..
कभी इसका ख्याल  कभी उसका ख्याल
 विचारों का रूकना और हमारा उन पर हमेशा ध्यान  देना
 जरूरी तो नहीं
कभी इनकी गंभीरता को भी अनदेखा  करना चाहिए
 मज़ेदार लगते यह ख्याल
अच्छे  ख्याल का ख्याल भी  गुदगुदाता है
 बुरे का ख्याल को चलता कर देना चाहिए 
खुश रहना ही ख्यालो में होंना चाहिए ...

शुक्रवार, 18 मई 2012

एक चरित्र

कोई कुछ भी बोले हम कितनी ही सदियों आगे निकल जाये लेकिन बहुत ज़रूरी अहम् भूमिका और सरथी को चलने वाली  की  इज्ज़त मान मर्यादा हमेशा कभी उसके द्वारा कभी किसी और की कारन उछाली जाएगी .तकलीफ इस बात की यह किसी भी देश या जगह की नहीं सोच की बीमारी है इससे हटना और मिटना किसी एक की नहीं सब की सोच की परिभाषा है ...इंतज़ार है जब यह सोच नयी दिशा में होगी ..



एक बार फिर बलि चढ़ी -लड़की की
उसी देश में जहां
दुर्गा  माँ की पूजा की जाती
पर सीता माँ तो  बदनाम हुई
अग्नि परीक्षा की लालसा में फिर एक बार बलि चढ़ी
यही तेरा इंसाफ है--- इश्वर
नारी को सिर्फ  एक चरित्र दिया
और उसके नापने के पैमाने औरो के हाथ में सौप दिए
 क्यों नारी को महानता  का गुण दिया जब इतनी नीच सोच बनायी 
 या तो नारी दी होती या यह सोच
ऐसे लोगो की बलि तो कभी नहीं दी
हर परीक्षा सिर्फ नारी के लिए रची
तुम भी स्वार्थी हो गए --भगवन
कलयुग की भेट तुम्हारी सोच चढ़ी
उस माँ को पुकार सुनानी ही होगी
कुछ नीच लोगो  को सबक देना ही होगा
कलयुग के साथ इन्टरनेट भी है तो जवाब तो देना ही होगा  
 निर्दोष नारी को आग में चलना नहीं उसके आंसू  ही बहुत कुछ बाय करते है
 क्या चरित्र दोष में नारी के कदम ही डगमगाते है
उस आदमी काकोई  क्या कसूर नहीं ......
क्यो इतना महान बनाकर नीच के बीच भेज दिया
कुछ तो इंसाफ किया होता
टक्कर तो हमेशा  साथ वाले के साथ होती है
नर मादा का खेल नहीं एक सोच तो दी होत्ती 
हनन और दोष के चक्र के नहीं डाला होता 





शुक्रवार, 11 मई 2012

रात प्यारी लगती है ...........

 रात में जब सारा संसार सोता हैकभी नीद कोसो दूर होत्ती है सिर्फ एक अनसु कभी जीवन की रफ़्तार कभी आपाधापी से तकभी तेज़ चलती ज़िन्दगी कभी धीरे चलती ...से शिकायत सी होती है .एक कोना थोड़ी सी तन्हाई  में बेठे रहना अच्छा लगता है . तब कुछ एक आईना  सा जीवन सी मुलकात लगती है दिल को सुकून रहता है ..




रात के सन्नाटे में अपनी तन्हाई  से कुछ यु  बात हुई
मन के गुबार और उफान में अफरातफरी ढेर उथलपुथल  के
बाद एक सुकून और तृप्ति आ गयी
जाने क्यों यह अँधेरा  अपना सा लगता  है
सुनी रात में नल के टपकने का एहसास भिगो देता है
सुई की आवाज़ से मन कही छुप जाता है
इन्टरनेट के ज़माने में भी कागज़ कलम  की रफ़्तार  को मात नहीं दे पाती
टाइपिंग को याद नहीं रखना चाहती वो तो बस बहना चाहती है

 भटके विचारों  को  शब्द  में पिरो कर कविता को जनम देती
सुर्ख स्याही में कितने  पन्ने लिखे जाते है
बिखरती सूरज की किरणे जब जगती है
तो जीवन की एक शांत  और दिल के करीब की सुबह होती है
 मन के गुबार और तन्हाई से मिली तृप्ति
पन्नो  पे उतारे अक्षर सुबह को जादुई बना देते
ऐसी  रात के सार्थकता नया अनुभव होत्ती है
जाने क्यों रात बहुत अपनी सी लगती है
बिखरी चांदनी तारों की छाव  में मद्धम रौशनी
मन के जज्बत्तों को बाया करना असं हो जाता है
 सूरज की किरण  में  मन खो जाता है
लम्बे इंतज़ार के बाद तृप्त नीद और सुकून की सुबह नसीब होती है
न जाने क्यों यह रात  अपनी सी लगती है

कुछ खट्टे मीठे पल बटने में बहुत होती है
अपने अक्स सी मिलवाती सुबह का चोला नीचे होता और सुहानी धुप का स्वागत
के बाद इसी रात प्यारी लगती है 

जीवन की आपाधापी मे इतना  खो गए 
अपनों से बातें करना भूल गए 
स्याह रात कभी  नीद चुरा लेती है 
अपनी बाँहों में  लेकर नयी दुनिया में ले जाती है 
में उस अकलेपन को पसंद करके खिल जाती हु 
 रात  को  सहेली मान लेती हु 
चंचल मन को बांध की चाह  नहीं रखती  यह रात 
अपनी समझदारी पे हंसती और  पे रोती  
हमेशा साथ बना ही    लेती यह रात 
रात भर एक सिलसिला चल जाता 
फिर सुबह को नया बनाने के लिए 
जीवन का एक फलसफा बन जाता है 
यह इतना हँसी  नहीं पर हर रात आंसू  के बाद सुबह रंगीन हो ही जाती है 
काले स्याह हो बादल  भी होते है  पर उनको भी छाटना  होता ही है 
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