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रविवार, 5 फ़रवरी 2012

विश्वास


   शब्द  की गहरायी और एहसास बेहद खूबसूरत होता है / इस शब्द का मर्म ...जीवन और जीवन में रहने वालो के मायने बदल देता है शब्द...पूरा जीवन की तस्वीर है....
   बीत जाये किसे के विश्वास को हासिल करने में  और एक मिनट भी न लगे उससे खोने में / कितने लोग विश्वासघात के शिकार होते है कभी अपनों से कभी परायों  से
   विश्वास से समर्पित होंने के चाह बढ जाती है ...सम्मान सभ्यता शालीनता ......प्यार आस्था सब बढ जाता है  /आत्मविश्वास बदने से हमारी  जीवन को जीने का तरीका सोच और मायने बदल जाते है .....मुस्किल रहा असं होती है... कठिन समय संबल के साथ निकलता है...थोथे विचारो से मन से गमन होता है
विश्वास में घात होते ही सब ख़तम हो जाता है......लेकिन इसका दूसरा पहलु  --"नज़ारियां "भी है ...विश्वास  का  सन्दर्भ बहुत ज़रूरी है ---चरित्र ,पैसा ,बात,जीवन इन सब में इसकी बहुत
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