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सोमवार, 28 नवंबर 2011

में एक तिनका हु ........




में इस बात को सही मानती हु ..मैंने बहुत खुशकिस्मत हु मेरे आस पास में बहुत हुनरमंद लोगो से घिरी रही  ..
जब मैंने ब्लॉग खोला था तो ... इतने भी लोग मेरे पास जुड़ेंगे ..ऐसी उम्मीद नहीं की थी ....पर मुझे  ख़ुशी है  कुछ लोगो ने मेरी कविता पे गोर तो किया ....
..मेरी माँ ,मेरे ताउजी मेरी एक बहिन बेहद अच्छे  कवी  और लेखक है ...में  उनके आगे कहीं नहीं ..यह तो मेरी एक कोशिश है.... आगे बढ़ने की ..अपने लेखन को दिशा देने की ...
ये लोग मेरी प्रेरणा है ...जो मुझे आगे बढने के लिए  प्रोत्साहित करते है ....
 वर्ना, में तो एक तिनका हु ....बह जाती हु ...चंद लोगो ने मुकाम दिया है 
उसी को  पनाह बना लिया है जब तक कोई तूफान उड़ नहीं ले जाता ...
उम्मीद पे जीवन कायम रहता है  कभी कभी तिनका भी अच्छी किस्मत लेके आता है
तिनके का अधजीवन हो गया होगा ..
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