संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

सोमवार, 12 अक्तूबर 2009

दोगले

आज सब लोगो को सरिता के गमन पर बहत दुःख हो रहा है/// इतनी अच्छी लेडी इतनी अच्छी ,पत्नी, बहिन ,बेटी पर उन्होंने बहुत तकलीफ देखी   १५ साल तक हार्ट के बीमारी को झेला ..............और दाद देनी पड़ेगी उनके पति को जिन्होंने कोई कसर    नहीं छोड़ी उनकी देखभाल के लिए , रात का टाइम हो या दिन पूरा टाइम उने साथ आज कितने भावशून्य लग रह है... सुमंतभाईसाहब।

अगर  सोचा जाए तो सरिता के शरीर में कुछ बचा भी नहीं था ...कितनी ही बीमारी ने उन्हें घेर लिया था सुमंत साहब की हिम्मत थी.. जो उन्हें जहाँ चाह वह ले गए पूजापाठ धरम करम सब कर दिया । और  सरिता को   बहुत मोह था हर एक चीज़ से , हर इन्सान से , हर सामान सब   से पहले ध्यान रखती थी। एक एक चीज़ बहुत अरमान से जोड़ी थी उसने इतना लगव था उसे हर चीज़ से ।

और एक बात यह  भी थी की सुमंत साहब थे क्या : कुछ नहीं उनकी माँ तो मजदूरी करके बच्चो को पढाया दोनों बहनों की शादी की सुमंत साहब ने की और छोटे भाई को पढाया ...और उसकी डेथ के बाद उसके पूरे परिवार बीवी चार बच्चो का पूरा ख्याल रखा... सरिता के भाई ने ही भाई की बीवी का सरकारी जॉब लगवाया था ।

सरिता से प्रेम विवाह किया । हलाकि सरिता के पिताजी बहुत बड़ी पोस्ट पे थे ...पर प्रेम विवाह कर दिया ....... सरिता बहुत ही किस्मत वाली थी उसके घर में जाते ही पैसा ही पैसा ...उनके पिताजी ने मकान दिलवा दिया हलाकि सुमंत साहब ने ध्रीरे ध्रीरे सब चुका दिया । समाज में इज्ज़त सब उनके ही भाग्य से आ गई । उनके वी .र के बाद ही ऊपर का मकान बनवा दिया । पर रहने का सुख नहीं उठा पायी ।

पर आज जो कुछ हुआ वो बहुत बुरा था ।अब तो जितने मुह उतनी बातें बनेगी । वसे भी सरिता की मौत को २ महीने भी नहीं हुए और शादी कर ली वो भी देवारनी से............. । क्या जमाना आ गया है ..लोग तो यहे ही सोचेंगे की सरिता पहले  से ही बीमार थी और देवर को मरे भी १५ साल हो गए पहले से ही कुछ था ...........सारे  इज्ज़त समाज का मजाक बना दिया । सही है सरिता के रहते  ही इज्ज़त थी उसके बाद कुछ नहीं बचा ..........सोचो इस घर में अब कोई शादी नहीं करना चाहेंगे ........

सब लोगो की बात सुन सुन कर में बस एक बात सोच रही थी ऑफिस में आज सब लोग सुमंत साहब की इतनी बुराइए कर रह है , कभी यहे ही सुमत साहब उद्धरण का सबब होते थे आइडल हसबंड होते थे और आज .............

आज उनके बच्चो की नई माँ आ गई नए भाई बहिन है आ गए और भी न जाने क्या क्या ................

पर उन बच्चो को लग रहा है वो सोने की खान  पर है जितना हो सके उतना निकलवा लो । जो २ बच्चे सरिता के है वो अपना हिस्सा के लिए सोचते होंगे बस सब यही जोड़ तोड़ है ....आज तो सब अपना अपना स्वार्थ देख रह है ....सबका अपना नज़रियाँ है । सुमंत साहब का अपना है ....बच्चो का अपना है ......और दुनिया का अपना है .....
पर सरिता के जाने के बाद इतने कम समय में सब हुआ की कोई पचा नहीं पा रहा ........सही भी है ...इतनी अफवाहों को जनम दे दिया है ...वो सच भी हो सकते है । पर मेरा जो नज़रियाँ है वो सिर्फ़ इस बात से परेशां  है की  शादी करी लव मैरिज़  ......उसके रहते सब किया हमेशा साथ दिया ......क्या वो प्यार और बंधन इतना कच्चा था... की एक साथी की ज़रूरत अचानक  पड़ी या यह  बंधन छिपा था  ?.............हो सकता है की यह एक नैचुरल ज़रूरत हो । अभी भी हमारा समाज इन सब बातों को नहीं स्वीकार करता ।

मुझे बस एक बात नहीं समझ आ रही क्या वो दोगले इन्सान है? इतना अच्छा इन्सान इतनी प्रेम भाव इतना सेवा भाव सब क्या एक दिखावा था ............पर क्या कोई दिखावा दुराव छिपाव इतने सालो तक लोगो की निगाह या घर वालो से से छुपा रह सकता था , आज तो उनकेआने वाली और गई हुए पीदियों पे प्रशन चिन्ह लग गया ?
इतना असं तो नहीं होता ...उनका सेवा भाव मैंने देखा है यह  रूप ....................

3 टिप्‍पणियां:

अनिल कान्त : ने कहा…

अच्छी कहानी बुनी है आपने

महफूज़ अली ने कहा…

hmmm........... kahani bahut achchi lagi.........

shabdon ko aachche se piroya hai aapne.......


thnx for sharing

regards

mahfooz

(Meri Rachnayen!!!!!)
www.lekhnee.blogspot.com

M VERMA ने कहा…

सुन्दर कहानी मार्मिक भी.

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.