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बुधवार, 23 सितंबर 2009

CHEERUP

Sometimes you lost path still u move
Because you know its not the end ,
You have another start waiting ,
You have some more path ,
Trace out the hidden motto of GOD to send you in the world ,
Being the part of world you have to find Out the alternate ,
To look after for what you deserve,
No matter for whom you are important and For whom u r not ,
Always your important to yourself ,
You need to upgrade your level ,
Where no alternate is there for you
Cheer up! get up! and touch the thing of your height and choice,
Prove it, you are as unique and as precious
To stay alive and being important as forever

शनिवार, 19 सितंबर 2009

Relation

Mould a relation
Understand the relation
Hold the relation
Give time to relation
Test the relation
Judge the relation
Decide the relation
React in the relation
Enjoy the relation
Bond the relation
True to the relation
Spark the relation
Nurture the relation
Set free the relation
Memories the relation
Upgrade the relation
Make relation everlasting
Mark your relation to be the best
Forever and ever

Failure

A failure is one ,who lost the hope
He cry but don’t try
He shatters
He has multiple reason for it
He blames others for it
He is depressed
He finds it a fault
He don't learn
He is one and only one who makes the future dark by the shed of past

शनिवार, 12 सितंबर 2009

झूठी आस

हर मोड़ पर तन्हां पाया है ख़ुद को
पिता के आदेश को मन लिया
माँ की फाटकर को सह लिया
एक दिन वो सफ़ेद घोडे पे सवार आयेगा
जो मुझे समझ पायेगा
इस चाह में जीवन गुजर रहे थे
आ गया वो दिन ,पर तब पाया
सब एक सपना था जो कभी सच नहीं होता
माँ बाप का एक बोझ काम होता है
अपनी हस्ती मिटा दी सिर्फ़ प्यार के दो बोल के लिए
आज हम गुम है इस गुलिस्तान में अपनी तन्हाई के साथ
फिर एक आस जनम लेने वाली है बच्चो के साथ
फिर दिल को बहला रहे है
उम्मीद बाँध रहे है जीवन के साथ
जबकि हम को भी ख़बर है
यहे हे सच नहीं
जीने की लिए एक आस तो चाहिए ही
फिर चाहे वो झूठी ही क्यों न हो ।

शुक्रवार, 11 सितंबर 2009

अपना सा परदेश

यहे परदेश अपना सा लगता है
जब सूरज को वो गर्मी देते देखती हु
जब चाँद को प्यार बरसते देखती हु
बच्चो की अठखेलिया देखती हु
यहे परदेश अपना सा लगता है

रिमझिम बारिश की बूँद महसूस करती हु
कोयल को गीत जब सुनती हु
लोगो को हस्ता हुआ देखती हु
जब बाज़ार जाती हु सामान खरीदती हु
यह परदेश अपना सा लगता है

लोगो को पूजा करते देखती हु
सड़क पर चलते हुए रुक जाती हु
जब घास पर चलती हु
जब घर में खाना बनती हु
यह परदेश अपना सा लगता है

जब अपने प्रभु की भक्ति करती हु
अपने पति को छोड़ने जाती हु
अपने बच्चे को तयार करती हु
मेहमान का स्वागत करती हु
यह परदेश अपना सा लगता है

समन्दर को बाँट कर रेखा बना ली हो देश ने
पर दिल की कोई सीमा नहीं होती
खुशी की कोई जगह नहीं होती
गम का कोई रास्ता नहीं होता
सम्मान का कोई भाव नहीं होता
सोच की कोई परिभाषा नहीं होत्ती
Burai ke लिए देश की नहीं ज़रूरत होती
भगवान् का कोई ठिकाना नहीं होत्ता ।

असफल माँ

गाड़ी छुटने में सिर्फ़ दो मिनट थे ... में अनजान डर और खुशी के भाव से ट्रेन में चढ़ गई थी ,पूरे पॉँच साल बाद शिखा को देख पाऊँगी । पियाली का जन्मोत्सव और शिखा के कविता संग्रह का विमोचन है । थोड़ा डर था शिखा के व्यवहार से और पियाली के जनम की खुशी । आखिर शिखा को अपनी अकेली माँ पर तरस आ ही गया । कब आँखों के कोरे गिले हो गए पता ही नहीं चला ।टी टी ने जब टिकेट माँगा तो होश आया । टिकेट दिखा के में अपनी सीट पर लेट गई । शिखा की किताब देख कर सोच रही थी.... क्या सच शिखा मुझे इसका हक़दार मानती है ?क्या मुझे माफ़ कर दिया उसने ?" मेरे माता पिता को समर्पित जिन्होंने मुझे इस लायक बनया अपना समय ,प्यार सम्मान दिया " सच मेरी बेटी कितनी समझदार और संपुर्ण है अपने आप में । बिल्कुल अपने पिता पर गई है वोई आत्मविश्वास ,सहनशक्ति ,विश्वास, गुस्सा एकदम शिखर जैसा । ट्रेन की रफ्तार के साथ मेरे विचार भी दौड़ रह थे । सब कल ही बात लगती है ॥जैसे समय बिता ही नहीं । कसे पूछूंगी क्या तुम्हें मुझे माफ़ कर दिया बेटी ...? मृदुला जानती है शिखा उसके घर नहीं आना चाहती है ।संजय ने कभी मुझे सास के सम्मान से वंचित नहीं किया । शायद शिखा ने कभी बताया हीनहीं होगा हमारे बीच आम माँ बेटी जसे रिश्ता नहीं है ॥ आज वो ख़ुद एक माँ है शायद मेरे प्यार को समझ पाए मेरी मज़बूरी को भी ॥ मेरी निश्चल ममता पर कब उसे भेदभाव और अकेलापन और मुझेसे दूर ले गया । में स्तब्ध थी उसके मुह से इसे शब्द सुन कर । मेरी अनभिज्ञता को गुनाह बता दिया । वो खेलती कूदती बड़ी हो गई ,कॉलेज जाने लगी ॥लेकिन मुझ से दूर होत्ती गई ..मेरी नौकरी के कारन में उसे पूरा टाइम नहीं दे पाती थी ,जो वो चाहे थी । में आश्वस्त थी की मेरे संस्कार असे नहीं है के वो भटके या मुझसे कुछ छिपाए ..फिर चाह्यी मस्ती मज़े की बात हो या kisie ladke ने chheda हो या tichar ने कुछ kahn हो कभी jhoott नहीं बोल उसने कभी निराश भी नहीं किया । पर वो शायद मुझसे दूर हो रही थी अपनी खुशियाँ छिपा रही थी ,मुझे पता ही नहीं चला में उससे दूर होगयो अपने ऑफिस के कारन काम और काम बस ........कभी उसके chehARE की खुशी ही नहीं देख पाए या उसके दुःख कुछ नहीं । वो जब कविता पाठ में प्रथम आए ..खाने की टेबल पर रखी ट्रोफी देखि और मैंने बड़े रूखे अंदाज़ में पूछ यहे क्या है ?उसके कविता पाठ बोलते ही बोली में बहुत रूखे से जवाब दिया था..... पदाई में मन लगाओ यहे सब बेकार है ... आज पूरा द्रश्य मेरे सामने है पर ...उस समय जाने समझने की शक्ति कहाँ गई ........फूल से दिल को दुख दिया ......मैंने उससे लेखन के लिए प्रोत्शाहित नहीं किया ।
याद आ रहा है ..जब मैंने ऑफिस से आए थी ,तो उचालती कूदती आए .अपनी पहेली कविता दिखने ....और मैंने डांट दिया ..उसके बाद वो अपने में रहती थी पर मेरा ध्यान नहीं गया । आज सोचती हु सब .........सच है ६० के बाद ही इन्सान अपने काम का लेखा जोखा करता है ।
में कितना सोचती थी ,शिखा को ऐसे पालूंगी स्वरुप को ऐसे ।शिखर के असमय गमन से में टूट गई परिवार हमारे पूरी जिमीदारी मेरे ऊपर आगई । मैंने बैंक ज्वाइन कर ली मेनेजर के पद पर अच्छा काम करना शिखर की तरह । में सोचती थी ,बच्चे समझते है माँ को, पर में अपने बच्चो को नहीं समझ पाए । मेरे पास उनके लिए समय के अलवा सब था । उसकी कविता में दर्द था पर मैंने कभी पहेल महसूस नहीं किया ।हालाँकि स्वरुप बड़ा था इंजीनियरिंग करके चला गया अमेरिका । फिर शादी कर दी उसकी पसंद की लड़की से । पर शिखा मेरे पास थी मेरी लाडो थी अपने भाई के हॉस्टल जाने के बाद कम हस्ती बोलती थी में जानती थी उससे मिस करती है । मैंने टाटा कंपनी में होंने के बाद उससे बंगलोर नहीं जाने दिया अकेले कसे रहती यही सब सोच कर ?एक और उसके जीवन की खुशी को दूर कर दिया मैंने । ........उसके बाद बस शाम को मेरी चाय देना डाक और टेबल पर खाना लगाकर साथ में खाना की बात नहीं अगर कुछ पूछु तो हाँ या न में जवाब देना । में भी इतनी थकी रहती थी की कुछ सोच ही नहीं पाती । स्वरुप अमेरिका में सेटल हो गया अपनी ग्रास्थी और नौकरी में मस्त ।
शिखा २५ पर कर रही थी में बैंक में इतना रम गई प्रमोशन से में खुश थी और उससे उचाई पर ले जाना चाहती थी । स्वरुप ने फ़ोन पर एकएन.र.ई लड़का बताया ,तब एहसास हुआ की कितनी बड़ी हो गई लाडो । इस बार उसका जन्मदिन भूल गई ...जसे ही याद आया पेस्ट्री और गिफ्ट ले कर उसके कमरे में पहुची ..उसने थैंक्स कह कर रख लिया कोई उत्साह नहीं । मुझे लगा वो रोई थी पर मैंने पुछा पर वो कुछ बोली नहीं ?में आ गई सोचा कल छुटी है आराम से पूचुंगी और लड़के के बार में भी ॥
सुबह ही मैंने नाश्ते पर पूछ एन.र.ई लड़के के लिए पूछ तो वो बोली ..माँ आप तो मुझे एक इंच भी दूर नहीं रखना चाहती थी फिर एसा क्यों ?क्या अब वो ...........?
वो चली गई ॥
में अन्दर तक हिल गई । बात वोई की वोई रह गई ।
एक दिन अचानक इस संबोधन से मैंने खा हा बेटा बोल ...................मुझे एक लड़का इन्टरनेट मर्तिमोनिअल पर पसंद किया है ...लड़का बंगलोर में है ८०,००० तनखा है कुंडली मैच हो गई है ............अगर आप हाँ कहना चाहो तो देख लो भइया को मैंने डिटेल बता दिया है ........बस यहे आखरी बार आप सीरियसली इस मैटर को देख लो फिर कुछ नहीं चाहिए .और हाँ कोई दहेज नहीं चाहिए उनको ।
वो बायोडाटा फोटो रख कर चली गई ...में कुछ सोच ही नहीं पाए ...............वाकई में क्या में स्वार्थी हो गई अपनी बेटी का भविष्य के बारे में कभी उससे पुछा नहीं,जाना नहीं क्या चाहती है वो ? आज में एक गिल्टी में थी की मैंने अपनी बेटी को खो दिया ......में अपनी धुन से जगी थी आज ......पर क्या फायदा .... सीरियसली मतलब ...अब तक मैंने सब मजाक में कहा है क्या............?
मैंने फोटो और बायोडाटा देखा ... वाकई में संजय जसा लड़का में दूंद नहीं पाएंगे । शिखा के लिए हर तरह से बढ़िया ।
में एक असफल माँ थी ...वो होसियार ,होनहार थी पर मैंने उससे रोक लिया वरना यहे किताब तू कबकी छाप जाती ।पर में खुश हु संजय ने उससे समझा और आगे बढ़ने का मौका दिया।
पञ्च साल में वो कभी आए नहीं पर संजय मेरे बारे में पोचते थे कबर लेते थे कभी कभी वो भी बात करती थी । मेरे जन्मदिन पर तोफहा भेजती थी ।
ट्रेन की चल पहेल से में जगी लगा स्टेशन aane वाला है । और धड़कन तेज़ हो गई । संजय मुझे अन्दर लेने आ आगयेपीरे छुए ...शिखा को देखा तो लगा सब गिले शिकवे माफ़ है । गले मिलते ही लगा कोई चट्टान पिघल गई है ....दोनों की आँखों ने देख और एक दुसरे से माफ़ी मांग ली ........एक दम मौन प्यार के भाषा में .....पर फिर आंसू बह रह थे आँखों से ।

मंगलवार, 8 सितंबर 2009

पि.एन.एस

यहे एक अलग ही सुख है जो यदि जीवन में हो तो जीना असं होंने लगता है । क्यों ? इसका मतलब और प्रश्न का औचित्य वोई बता सकता है जो इसे अनुभव करे , चार औरत की मजलिश सुनिए .......इतना हेअमोग्लोबिं बढेगा की बस दवा से भी काम नहीं होगा .........
अपने दुश्मन का काम अटक जाए , ए़से ठंडक कलेजे को मिलेगी जसे की तरबूज गर्मी में । यहे ज़रूरी नहीं दुश्मन मतलब आप जिससे बात न करे ...दुश्मन मतलब आप बात तो करे बहुत प्यार से और मन ही मन में जलन के करना एसिडिटी हो जाए वोई बस दुश्मन मिल गया आपको ।
पड़ोसी ने टीवी ले लिया ,उसका बच्चा मेंरित मरीं आ गया ,नौकरी लग गई ,दिवाली के ज़यादा सामान आ गया ..........इसके बाद जो आपकी बीवी ,बच्चे का चिचिदापन होगा वो तो झेलना ही पड़ेगा... उनकी मनोस्थिति आप को समझनी चाहिए ठीक वसे ही होगी... जेसे आपकी ऑफिस के दोस्त का प्रमोशन होंने पर या अच्छी बीवी मिलने पर , अच्छा दहेज मिलें ,घूम आए ,बीवी रोज़ खाने में पकवान रखे ,बॉस ज़यादा भाव दे, लेडी स्टाफ ज़यादा आए ....जो तकलीफ आपके मन में होत्ती है ठीक वैस ही होत्ती है ..अब आसानी होगी उनके जस्बात समझने में ...
पि.न.एस यहे सुकून हर किसी को नहीं मिलता इसके लिए आपको थोड़ा जस्बाती औरो दूसरो से ज़यादा जुड़ना पड़ेगा ....उनके सुख दुःख की हर ख़बर रखना .......अपना कन्धा हमेशा देना और पीठ पीछे बहुत बुराई करनी होगी ।
अगर यहे सब करने से आपको अच्छा लगता है तो बस आप यहे सुख भोग सकते है ।
बचपन से इसके लक्षण आपको बच्चे में डालने पड़ते है ....आपको सीखना पड़ता है जसे अगर किसी बच्चे के पास अच्छी चीज़ दीखे तो उसे तोड़ दो , घर आ कर उसकी जिद करो ,जिसका जो सामान अच्छा लगे बाकि बच्चो को बोल कर उसका वो सामान तुड़वा दो उससे तंग करो बाकि बच्चेओ को साथ मिलकर मजाक बनायो वगेरह -वगेरह । बस बड़े होकर वो आपकी उम्मीद पर खरा उतरेगा और पि.एन .एस का आनंद ले पायेगा । और यदि लड़की है, तो एकता कपूर के सारे सीरियल दिखा दीजिये सब ठीक हो जाएगा घबराने की कोई बात नहीं ...ससुराल में आपका बहुत नाम करेगी ..तुलसी या कुमोलिका यहे आप उसके ख़ुद चुनने दीजिये ..वसे में जानती हु माँ का दिल बेटी को परेशां नहीं देख सकता इसलिए आप उससे कुमोलिका ही बनाना चाहेंगी ..बाकि आपकी मर्ज़ी ।
पि.एन .एस हर तबके के परिवार में पाया जाता है ..आमिर गरीब,मध्यम वर्गीय । बस तरीके अलग होत्ते है
...गरीब में -- तेरे पास खोली /चाल/झोपडी है,खाने को भर पेट खाना है, सरकार से दो बार फ्लैट मिला है जो बेचा है , तेरी बीवी भी चार में काम करती है कमाती है, बच्चे कूड़ा बिन कर लाते है , अच्छा गता है तेरा बच्चा, तेरे चार बच्चे है भगवन तेरे साथ है , तेरे पास शराब जुआ और पिक्चर देखने के पैसे है ............
आमिर का पि.न.एस --तेरी बीवी की शौपिंग,क्लब के मेम्बरशिप ,अख़बार में नाम आना , बच्चो का बिगड़ना ,गाड़ियों की संख्या ,शोव्बिज़ का हिस्सा ,जल्दी जल्दी पार्टी देना, घुमने के लिए फॉरेन ट्रिप , माँ बाप को हॉस्पिटल में रखना साल में एक bar मिलना ,एक बार पहने हुए कपड़े दोबारा नहीं पहनना , अफैर होना ,स्पा पार्लर का खर्चा उठाना , शराब जुआ खेलना ,बड़ा बंगला होना,छोटे छोटे कपड़े पहनना , डिजाइनर कपड़े और हर सामान (जूते ,बटुआ ,स्मिले ,नाक ,पति/पत्नी ,बच्चे) ,कित्ती पार्टी ,चैरिटी के नाम पर कोई भी संस्था राम भरोसे खोलना और पब्लिसिटी करना, प्रेस्स्कोंफेरेंस करना ,औटोग्राफ देना ॥
यहे सब करना होत्ते है पि.एन.एस के लिए वसे अगर घर वालो का पि.एन.एस हो तो मज़ा आजाये ...पर शर्त है की घर बादहोंना चैहिये और कमरे काम ॥ एक बहु जाए तू दुसरे की बुरे दूसरी जाए तू तीसरी की .....और बस तृप्ति पि.एन.एस की मिल जायेगी ...सका बच्चा हमारा कह्र्चा हमरे घर वाले में लाडली बहु hu ,मेरे anne के बाद पसिसा आया .......यहे लिस्ट कभी ख़तम नहीं होगी ।
यही होत्ता है पर निंदा सुख (पि.एन.एस )

बुधवार, 2 सितंबर 2009

प्रकृति

ऐ सृस्थी के रचयेत अजब सृस्थी तुने रचाई
एक भी समनाता नहीं पाई हर चीज़ ने अपनी अहमियत पाए

सूरज अपने तेज़ से सब फीका कर देता
चांदनी अपनी शीतलता से मन को सुकून देती

बादल पल भर में धूमिल हो जाता कभी मेघ बन बरसता
नदी की कलकल ,समंदर का तूफान
पक्षी के चहचाहट ,पेड़ का पतझड़
बादल की गर्जन ,बिजली की चमक
पशू की चपलता ,भवरो के गुंजन

क्यों मानव को चुना इसके विनाश के

लिए बिना शर्त प्रकृति ने सहारा दिया और

हम इसके संग खिलवाड़ करते जा रहे है ।

मंगलवार, 1 सितंबर 2009

जीवन जोड़ी

प्यार का खुमार भी अजीब होता है
सहेली ,परिवार ,के अथाह प्यार के बाद भी
एक खास प्यार की चाह होती है
हर पल उसकी तलाश रहती है
प्यार सच्चा या छोटा नहीं होता
सिर्फ़ सच्चा होत्ता है
इसे सीचना पड़ता है
प्यार ,मर्यादा, श्रधा से
भक्ति करनी होती एहसास दिलना पड़ता है
नाजुक डोर को पक्का करना होता है
अपने सपनो को बुनने से पहेले
उन्हें ज़मीने सचाई से मिलना होता है
उसके बाद सपनो को आकार देना होता है
प्यार कर्म होता है
विचारो,खामियों को अपनाना होता है
जो नीव बनते है
आगे के स्तम्भ तो ख़ुद बा ख़ुद बन जाते है
प्यार इबादत है जिद समय आशय सन्दर्भ नहीं होता
आँखों ,स्पर्श और ध्यान से बात हो जाती है
इसलिए जोडिया उलटी होती है उपर से बन कर आती है ।
इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.