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सोमवार, 31 अगस्त 2009

जीवन की आस

मेरे मन की गहरायिओं का फ़साना हो तुम
मेरे जीवन का गुरुरु हो तुम
मेरे अक्स की परछायी का सुरूर तुम
तुम्हारा मेरे प्यार हो तुम ।

सपनो के भवर में ,मुझे ले जात्ते हो
कभी खयालो में गुनगुनाते हो
मेरे मन की बात को बिना कहे समझ जाते हो
मेरे जीवन की नईयां के खिवायिया हो तुम ।

अंधेरे मन के उजाले तुम
सुने जीवन के सहचर तुम
खुशियों के पुंज से महकती रहे यहे जीवन संध्या
तुम्हारे हमकदम सदा है हम ।


मेरे मन्दिर के देवता हो तुम
मेरे हर काम की खुशी तुम
मेरे संकल्प के ताकत हो तुम
मेरे सपनो की ताकत हो तुम ।

मेरे अरमानो का प्रकाश हो तुम सिर्फ़
तुम से बहुत प्यार यहे इज़हार नहीं इकरार है
,एक जीवन बंधन का
जिसमे प्यार,सम्मान ,खुशी और शान्ति
हो अनकहा रिश्ता हो संस्कारो का सम्मान हो ।

जिसका कोई सहारा न वो तलाश हो
तुम थक गए थे अकेले इस जीवन में
आज वो रास्ता तुम
अरमान जगा न करना हमे हताश तुम
इस डोर का आखिरी किनारा तुम ,
जीवन की आस हो तुम ।

1 टिप्पणी:

वाणी गीत ने कहा…

अनकहा रिश्ता हो ..संस्कारों का सम्मान हो ..बहुत खूब ..!!

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