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सोमवार, 20 जुलाई 2009

प्यार की दास्ताँ

खयालो  में उन हँसी  लम्हों का तराना था जिंदगी
क्या उन पलो  का आशियाना था
हवा के झोको से सुर्ख होत्ते गालो का एक फ़साना था
 गर्दिश की अनोखी  दास्ताँ थी
 प्यार से अंजाम के डर से प्यार की पहल नहीं होत्ती
प्यार के दिवानो  का आलम न पूछिए ,
दरिया तक पर कर जाना आसान  होत्ता है
प्यार की खुमारी  में रात दिन नहीं होत्ते
सिर्फ़ इश्क की चार दिवारी होती  है
जिसमें  दीवानों की बारात  होती  है
यह देख उन पर तरस न खायी
यह तो  उनकी मेहरबान तक़दीर  होती  है
जिसने यहे मंजर दिखाया
नहीं तो तक़दीर की नाफरमानि है
इनकी ख्वाबो की फेहरिस्त  बहुत चोट्टी होती  है
गुलाब से शरु होकर महबूबा पे ख़तम होती  है
जान तो इनके लिए एक छोटी  से चीज़ होती  है
जो हथेली पर घूमते है कभी भी दे देते है
यहे अधूरी  हो या पूरी यह किस्मत की बात है
लेकिन पूरी होंने पर प्यार न करने की सलाह होत्ती है
अधूरी  रहने पर प्यार की दास्ताँ लिखी होत्ती है ।

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