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शनिवार, 25 जून 2011

जिज्ञासाए

निरल और नीरव जुड़वाँ  भाई थे /
 दोनों विज्ञानं विषय से बहुत प्रभवित थे
अन्त्ररिक्ष और उनमे होने वाले सभी परिवर्तन उन्हें बहुत पसंद थे /
बहुत सी बार दोनों में बहस हो जाती जिसे माँ नहीं समझ पाती थी /
आज फिर दोनों  में बहस हो गयी ........बहस माँ से नहीं सुलझी तो उन्होंने मास्टर जी के पास भेज दिया /
दोनों मास्टर जी को फ़ोन करके आने की इज़ाज़त मांगी 
दोनों पहुंचे मास्टरजी ने उन्हें बिठ्या  और आने का कारण पुछा 
निरल बोला मास्टरजी --सूरज तारा है 
नीरव नहीं मास्टरजी वो सूरज .............
अरी बच्चियो क्यों लड़ते हो ......बहस नहीं ..सूरज तारा है ...
निरल चिलाया देखा मैंने कहाँ था --
बेटे नहीं ---
माफ़ी   मास्टरजी 
इसको ढंग  से समझो बेटा --सूरज की दो सतह होती है 
अन्दर की सतह का तापमान कई लाख होता है और बाहर वरेंमंडल और कोरोना होता है , यहाँ दाब काम होता है और बहुत चमकीला होता है 
सूरज को चमकने के लिए नाभकीय विखंडन होता है जो hydrogen  के दो अणू मिला कर हेलियम बना देता है और उर्जा उत्पन करता है जो रौशनी के रूप में धरती पर आती है /सारे नौ गृह सूर्य के परिक्रमा करते है 
इसलिए पृथ्वी गोल है यही जब यहं दिन होत्ता है तो किसके और देश में रात ..
सूरज के किरण घटक होती है जब ज़रूरत से जायद मिलने लगे तो हमरे tissue   नुकसान पहुँच कर केंसर होने का खतरा होता है ........हमरे शरीर में मेलानिन नाम का पदार्थ इससे एक सीमा तक बचा सकता है पर हमेशा नहीं इसलिए हम  पतंग उड़ने के बाद या धुप में अधिक देर तक खलने के बाद हम काले हो जाते है 

वसे वायुमंडल    में ओजोने की परत हमरी सूरज की किरनो  से रक्षा करती है लेकिन क्योंकि आज कल प्रदुषण के कारण यह पूरी तरह रक्षा नहीं कर पाती क्योंकि इसमें बड़े बड़े छेद हो गए है ..इनका करना अरेसोल है यानि ऐ सी क्लोरोफ्लोरोकार्बों जसे पदार्थ ओजोने की परत को नुकसान पहुंचा रहे है ग्रीन हाउस एफ्फेक्ट और ग्लोबल वार्मिंग भी चिंता का विषय  है 
 और चन्द्रम क्या है चन्द्रमा हमरा उपग्रह है 
यह अपनी परिक्रमा २७ दिन में पूरी करता है हम चन्द्रमा पे जा सकते है पर रह नहीं सकते क्योंकि वह पर हवा पानी नहीं है इसलिए उल्कापिंड है जो समय समय पर गिरते रहते है और छेद करते रहते है जो हमे के सूत कटती बुदिया के रूप में दीखता  है 
अच्छा बच्चो  अब चलो बाकि कल बतुंगा
मास्टर जी हम इसके बारे में और किताबे  लेके आयेंगे 

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