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शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2011

कमी

सिर्फ चार महीने ...क्या इतना समय है की में आज घर आया तो शुभी की कमी खल रही है 
यदि आज बरखा के साथ जाना होता तो .........शायद आज भी में देर रात आता ....मेरे आते ही गरम काफी टेबल पर रख जाती ..शुभी चाहे कितनी ही देर से आये......... फिर भी फ़ोन की लिस्ट और साड़ी डाक एकदम सही तरीके से ..टेबल पर खाना सुबह सब कुछ रखा रहता ..............में खुद कभी एक बारभी कुछ नहीं पुछा नहीं ....कैसे वो पहले एक एक चीज़ पूछ कर करती  थी ....में टीवी को चालू करके बस सुनता था ...धीरे धीरे सवाद ख़तम   हो   गए  इसलिए   वो यह  ख़त  छोड़  का  चली  गयी   पर शुभी   बरखा इस  थे   ..........
अभी  
 में  USA   रही है  आखिरी   कोशिश   है हमारी  हमारी शादी को चार महीने हो गए इन चार महीनो के गिफ्ट मैंने तुम्हारी टेबल की नीचे वाली दराज  मैंने रखे है ..हर महीने पर शायद तुम्हे उनकी ज़रूरत .......सेज पर दी हुई डायरी  (शायद ,तुम्हे याद हो ) मैंने रोज़ कुछ लिखा है शायद ......तुम्हे फुर्सत नहीं या  मेरी आशा जयादा हो ........
अभी ...मैंने जानती  हु तुम्हे लगा में एक छोटे शहर की लड़की इस मुंबई जैसे महानगर  में कैसे रह पाऊँगी ..तुम्हे लगा बी लेवल डिग्री है .......या एसा ही कुछ पर शायद ..तुम मुझे समझ नहीं पाए ...
अभी ,में एक बात अभी तक एक बात नहीं समझी तुमने शादी के लिए क्यों कहाँ ..? सगाई से पहेले ही और बाद में कितनी बार पुछा था तुम सोच लो ...मुझसे क्यों शादी करोगे ..?तुमने हाँ बोला था ...अपने रिश्ते में तपिश ,अपनत्व ,प्यार कभी महसूस नहीं किया ..जो हमरे साथ हो रहा है वो मुझे पता था ...मैंने अपनी माँ को भी बोला था ..पर सब पर तुम्हारा रंग चढ़ गया था मेरी बातें सबको बुरी लगती थी ..........
जानती हु तुम डॉक्टर हो बहुत व्यस्त हो पर क्या मुझे ५ मिनट भी नहीं दे सकते ?तुम दोगले थे सगाई से पहले अच्छे अच्छे सपने और बातें और अब सब बेकार ..........
हमरे नहीं तुम्हारे चार महीनो का हिसाब डियर  में है ..क्रपया आत्मालोचन करो अपनी और मेरा दोष बताऊ अभी .!!जब में आपके साथ समय नहीं बिता सकती हमारे बीच में कोई प्यार नहीं है इसे जीवन गाड़ी मैंने कभी नहीं सोचा था .....
मैंने जानती हु आप बरखा के साथ है आप   दोनों ने शादी क्यों नहीं की यह नहीं जानते हु ?इसकी सजा मुझे देना कितना न्याय चित है ...आप यह मत सोचिये की में आप से तरस  या दया की भीख मांग  रही हु बस एक रिश्ते की बुनियाद इसे हो यह मेरे जीवन में नहीं चाहती ....आप अपने आपको बहुत टेच्निकल समझते है ....सिर्फ लैपटॉप होना इसकी  निशानी है ......यह आपकी सोच को बताता है ....अच्छे से सोच लिजीये में छ महीनो के लिए जा रही हु मेरा कांट्रेक्ट बढ़ सकता है बता देना ..जैसे  भी हो ......मैंने डिवोर्स के पपेर दराज में  रखे है ...मैंने बंधन में विश्वास करती  हु ............लेकिन ज़बरदस्ती  के नहीं .........पैसो का हिसाब diary  में है ..
तुम्हारे लिए केक , मठरी बना के रखे  है ले लेना ..घर से बिना  खाए मत निकलना


शुभी


में जानता हु शुभी ...बरखा इस थे बेस्ट ......
नहीं में मिस नहीं कर रहा हु बरखा इलू में कॉल करता हु जानू  फ़ोन उठाओ

हेल्लो बरखा जानेमन ....
नहीं में प्रकाश ......आप कौन ...?
प्रकाश कौन ....?बरखा का मागेतर
ओह्ह मुझ पता नहीं था
मुबारक हो
शुक्रिया ...आप कौन ?
अरी में बरखा के साथ काम करता   हु ...
अच्छा में उससे बता दूंगा  अभी वो  अन्दर है
जी अच्छा नमस्ते
 ........
बरखा ............ने मुझे धोखा दिया ...?
नहीं यहे धोखा थोड़ी है मैंने उससे बिना बताये शादी कर ले और उसने भी एसा ही किया .......
शुभी ...तुम्हारी याद आ रही है ............

शनिवार, 22 अक्तूबर 2011

Painting -make it a Hobby


What you need to start 
Colours (according to the type you wish to use)
Brushes
Sponge
Toothpicks
Stylus
Paper towel
Cotton swabs 
Tracing paper
Tape
Plastic Palette Knife 
Pencil 
Eraser
Sharper
Foam Brushes

Types of Painting 
Glass 
Water
Oil 
Crayons
Fabric
Acrylic 

To prepare for Paint
Enamel
Base 
Surface conditioner 
Retarder 

Tricks 
Strokes
Techniques

How to learn 
Online (youtube , google, blogs,)
Private Class 
Art and craft store Classes 
Circle of friends

रविवार, 2 अक्तूबर 2011

कुछ शब्द छोड़ जाएगा ....मेरी प्रेरणा के लिए ............

मेरी कविता  आजकल बहुत नहीं आ पति कभी कभी सोचती हु एसा क्यों है ...मेरे ब्लॉग के लिए यह सही नहीं पर जब बच्चे को अपनी ज़रूरत होती है ...लेकिन फिर भी कुछ चाहिए शायद आप आजाये ...कभी अपने विचारो से ..कभी किसी और बहाने .........पर आप आते रहना मेरे मनोबल को एक सहारा मिलेगा 


जीवन की आपाधापी में खो गयी हु अपनी पहचान पर सुकून  में हु 
कभी एक दिने में ३ -४ कविता पिरो लेती थी अब शब्द ग़ुम से हो गए है 
गृहस्थी  के कमजोर दौर से गुजर रही हु 
मेरे बच्चे के बढते कदम ज़रूरी हो गए है 
समय पे सब काम के लिए धुरी बन गयी हु 
आज नहीं तो कल मुझे समय मिलेगा में आ जाउंगी 
फिर अपने  कोरे कागज़ पे शब्द खुद अंकित होंगे 
पर बच्चे  के बढते  कदम नहीं देख पाऊँगी दोबारा 
अपनी माँ के पास बठने और हर काम समय पे करने पर गर्व था 
आज उनको मुझ पर गर्व होवासी ही  धुरी  बनाना चाहती हु 
अभी तो शरुवत है  मंजिल बहुत दूर है ..
शायद कभी तो मिलेंगे कुछ शब्द वही से आ जाउंगी ..
कभी कभी अपने शब्द ले कर...
.. पर आप न आना छोड़ेगा  वही मेरी ताकत होगा ...
कुछ शब्द छोड़ जाएगा ....मेरी प्रेरणा के लिए ............

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