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रविवार, 27 फ़रवरी 2011

गठबंधन


साथ साथ एक तुम्हारे साथ चलते कहते नहीं पता लगा 
कदम के डगमगते भी ना चल पड़ी 
कभी  हम संभल  गए कभी तुम 
कुछ कुछ गलती 
थोड़ी थोड़ी समझदारी से चल रही है गाडी 
 उलटे पुल्टे होते भी हम है एक बंधन में 
मीठी मीठी तकरार में भी मज़ा है 
कभी आशा निराशा में भी एक सहारा है 
नाराज़गी  के बाद भी मनाने की एक आस है 
ज़रा छु दो बस अन्दर तक भीग जायेंगे 
लड़ते लड़ते हँस जायेगे 
बेठे बेठे रूठ  जायेंगे 
कुछ उम्मीद की नज़र से देख कर अलग बीतों पे लड़ जायेंगे 
कही के गुस्से को कह उतर देंगे 
सब समझते हुए भी नासमझ बन जायेंगे 
कही जलन की जगह को अलग ढंग से बताएँगे 
इसी लुका छिपी में एक उम्र बीत देंगे 
दो अलग अलग परिवारों के पंछी एक घोसला बना देंगे 
कभी सबसे अच्छा और बुरा दोनों को यही बता देंगे 
जाने कौन सा है यह गठबंधन 
वसे हम इसे शादी के नाम से जानते है .................


मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

यु भी












जब यु भी  चलते थे तो  रास्ते मिलते थे
 आज जब रुके  है तो चौराहा  आ गया
 कभी मन यहं जाता है कभी वह
अपनी बर्बादी का तमाशा भी कोई देखता है
हमने तो खुद को तमाशा  बना दिया
बहुत चाहते थी सब को  मिटा दिया
अब तो सब खाक करने का मन होत्ता है
सब सपने बुनने  एक झूठ लगता
इतनी बेमानी होती है ज़िन्दगी
किसी पडावा पे आके  यह लगता है
आगे के जीवन बोझिल और कठिन
पीछे की यादें  खुबसूरत और फ़िल्मी लागती है
खोये खोये से विचार लगते है

गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

संबंध या रिश्ता











बड़े अजीब दो शब्द  है
कभी सामान ,तो कभी अनजान है
कुछ बनते , कुछ बनाये जाते है
कभी पक्के हो कर  भी कच्चे रह जाते
कभी कच्चे भी पक जाते है
जबरदस्ती पक गए तो कडवे हो जाते
सबकी अपनी नीव सबकी अपनी मोल
एक बोल से बदल देते रोल
 कठिन डगर है पाने खोने की
कभी चुप तो कभी बोलने की
कुछ जीवन भर चलते
कुछ उमरभर चलाये जाते
आधे जीवन के बाद शरू होते जीवन साथी बन जाते
शरू सी बने  होते कन्यादान कर देते
जड़े कभ हिल नहीं पात
जो चाहए सो कर लो
सम्बन्ध की गहराई उसकी उम्र से जायदा होती है
समरण सच्चाई और ताज़गी हर रिश्ते को खूबसूरत बनाती है ...
कभी रिश्ते बचाते नहीं अगर मगर में
किसके रिश्ते को बिना अगर मगर के बचना मुमकिन नहीं होता
इसी अगर मगर में पनपते रिश्ते ................
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