संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

शुक्रवार, 10 दिसंबर 2010

मायका

गज़ब खुशबु होत्ती है बचपन की पचपन तक ताज़ा  रहती है
सिंदूर की लकीर से पल में परे कर दिया जाता
पर दिल में छिपी याद को कोई नहीं जला पाया
माँ पर की हुकूमत , पिता पर जमाया रोब
भाई बहिन की लाडली होती  जाती
 पल रूठ जाती सारी ख्वाइश पुरी होत्ती
बड़े अरमान से एक डोली उठती है
सब के आशीर्वाद से उसकी सामान में बसी होत्ती
गहनों से प्यार नहीं कपड़ो का लालच नहीं
बस माता पिता के प्यार की खुशबू का ख्याल है
उनके आशीर्वाद से नए जीवन को महकाना  चाहते है
ससुराल में मायके की खुशबू  बरक़रार रखना चाहते है

बुधवार, 8 दिसंबर 2010

दो दिल

बहुत से साल बीत जाते है एक दुसरे के साथ
कभी दो दिल मिल कर नदी बन जाते
कभी दोनों दिल के छोर सागर से भी दूर हो जाते
साथ यह   जीवन इतना असं नहीं होता
सबका अपनी धरती और अपने असमा पे  अधिकार  होता
कभी अकेले रह कर भी साथ होते है कभी साथ होकर भी  तनहा
बहुत नाजुक डोर है दिल से  दिल की
ज़यादा  ढील दे दो तो छुट जाती
कसा पकड़ते ही दम निकल जाता
रख देने पर उलझ जाती है
छोड़ देने पर ग़ुम जाते  है
फिर से तनहा दो दिल भटक जाते है

शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

साल भर खुशियाँ

साल  भर  का  बेटा  मेरा
अपार ख़ुशी से भिगो गया वो पल
आचल में  खुशियाँ   बिखर  गयी  है
कभी  उसकी मुस्कान मुझे हसती
कभी उसके रोने से में रो जाती
उसकी हर बड़ी छोटी चाहत अच्छी लागती
चलना पलटना खाना रोना नयी नयी  चीज़े सीखना
मुझे लगन का  पाठ पड़ा गया  बच्चा
बार बार गिरत फिर उठ जाता
उसी उत्साह से फिर चल पड़ता
मुश्किल है बच्चो की परवरिश
प्यार और डांट का एक समीकरण है
उसकी पहला रोना आज भी ताज़ा है मेरे मन में

dutiful और beautiful है बच्चे का आना
देर  रात तक उठाना कभी इतना थक जाना
फिर भी खुबसूरत है बच्चे का आना
कभी बाल  भी नहीं बना पाती फिर भी कभी खाना नहीं खा पाती
कभी ग़ुम नहीं पाती बड़ा ही प्यारा है यह रिश्ता
सब दे कर बहुत कुछ मिल जाता है
कोई माँ अपने को सपूर्ण नहीं मानती
 हर बच्चे के लिए माँ सबसे बेस्ट होत्ती
इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.