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शनिवार, 19 दिसंबर 2015

मेरी आत्मा तो मर गयो बस में जी रही हु
क्योकि में मर नहीं सकती
मुझसे मेरी हसी छीन  ली
मुझसे मेरी जिन्दगी छीनने की कोशिश की
और अब तोह मेरे संसार पर बुरी नज़र डाल  दी
क्या कहु दुनिया  से बहुत खुश थी अपनी ज़िन्दगी से
अरमान सजा डाले थे दुनिया में
एक झटके में मेरे संसार को मिटने की साज़िश कर दी
मैंने भी अपनी आत्मा मर दी
अब कभी नहीं जी पाऊँगी सब से मुक्ति प् ली
न कुछ अच्छा है न बुरा न कुछ ज़रूरी है न मायने
न कुछ स्वर्ग है न नरक
न दोस्त है न दुश्मन
बस हम अकले होते है अकेले रहते है
न मोह है न माया
बस कुछ बेड़ियां है छोड़ के चले गए है
अपने जीवन में न चाहत होती है न वो मरती है
बस हम जीते रहते है क्योंि हम मरते  नहीं है
रिश्ते बंधन सब बन जाते है अपनी ज़रूरत से काम आ जाते है
सब एक साज़िश है दुनिया केनियम को मने के उससे ऊपर उठ जाओ
अपना अस्तित्त्व सिर्फ दूसरे की सोच से नहीं स्वय  से है
उस स्वय  को हम बनाकर बहुत कुछ करना होता है


मंगलवार, 15 दिसंबर 2015

Be the change --different able or disabable

We saw the disable give some  thoughts move ahead without thinking that our curious eyes  n  thought should have given a pain in heart that will always make him feel different. 
These thoughts  reflecting our brain is more paralyze than to  person who is differently able or disable.
Sometimes a person who has seen a close member in the same place will understand the pain andod never give this situation to anyone in the world .
Alas! thats the truth ..
Ask the question from yourself 
CAn you allow your kid to play with a DA ?
What if you do and your kid copy the DA ?Will you be comfortable ?
What  if your kid DA after some years will your perception change ?
What if DA sit with your kid in class?
Do you request a seat change ?
Will you work under the DA person?'
Will you accept the DA wife/husband?
 

Hope you got my point ...
We want to change the society but  we ready to change the us ?
Can you stop your curiosity if you see a disable person and there family?
Can you stop praying that the person life bear no value DA should be dead or something like that?

I m sure may of you can't ..
BUT
Can you offer a day to stay at there home and take care?
Can you tell them your son or daughter will marry?
Can you tell them you can cook food n pass to them ?
Can you provide them a month of food ?

Think n React 

मंगलवार, 8 दिसंबर 2015

थोड़ा बद तो है मेरा नसीब

बहुत बार दुःख और सुख से चक्र में लोग टकरा जाते है कुछ लोगो के विचार दुःख के समय में दिल को चु जाते है उनकी मनोदशा को समझना आसान नहीं होता। न वो दया चाहते है न दवा न नफरत न पैरा न बोल न चल बस एक प्यार  की थपकी। . 

थोड़ा बद तो है मेरा नसीब 
जिस चीज़ पे हाथ रखो दूर हो जाती है 
बड़ी हो दुश्मनी है उस भगवन को मुझे 
बड़ी ही बुरी संतान हु में उसकी 
न मेरी ख़ुशी में न मेरे गम कोई था मेरे पास 
जो पास हथे उन्हें भी शिकायत थी की में दूर हु 
कौन कहता आप  जी नहीं सकते 
मन को बहलाने के हज़ार कारण 
बस वही दुसरो की नाकामी का कारण बन जाती में 
चलो इसी बहने काम तो आ जाती 
उस सुखी डाल पे भी लोग बैठ जाते 
यह तोह अपने ही मुह मोड़ के खड़े हो जाते है 
कितनी नफरत होगी  उस  मुझसे 
न जाने क्यों मुझे जीने के लिए छोड़ दिया  है 

पलट कर लोग बहुत आते है हिम्मत कभी ले जाते है 
जाने क्यों इतनी बेरुखी है 
चार दिन हंस लेती हु तो चार सौ दिन रुला देता है 
कभी सोचती थी क्या इतनी बुरी थी में 
न जाने कौन से कर्मा थे मेरे 
शायद लोगो को सरे आम मर होगा 
इतना मुश्किल जीना होगा 
उससे भी मुश्किल मेरा हसना होगा 
इतना हिंम्मत से रहना इतनी कर्म से रहना 
आज मुझे  खोखला कर दिया 
लोग कहते है नज़र लग गयी पर मेरी आँखों पे चश्मा है 
बड़ी बेदर्दी से तूने भगवन मेरे विश्वास को हिला दिया है 
जब अकेला ही भेजना था तो क्यों इतने लोगो को  जोड़ दिया 
इस तीस के अंदरन दर्द है कभी तोह किसने जाना होता 
पत्थर मर कर निकल जाते है 
कहते है इतनी हिम्मत कहाँ से आती है 
इन पत्थरों  से सर मरते मरते आ गयी 
बस अब तो जान जाने का इंतज़ार है 

 

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