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रविवार, 28 अप्रैल 2013

Basic Educational system in India

Education system in India is one of my favourite .The higher education need lot of improvement but still really good considering the limited resources and funds .
Being second largest community in the world  the competition is much more higher .Also now the money is playing it's role in the college also there are private colleges .But the fees is higher and there might be a compromise in terms of lecturer and all.Corruption is playing it's role too.........
Anyways but the laborious and hard work is there in the blood so only they need is the direction the path comes itself in the role.
School   The schools are private,state,public and international .Now instead of percentage there is a grading system in the education.
The primary education include.
Playchool  2ys
Preperp 3yrs
Prep 4 yrs
Ist grade/class -12th grade The school are @ three level CBSE(Central board of education),Icse,State board.The session start on April 1st of every year Kids should be 5 yrs before that to start the grades.


College  3/4 yr + 2 yr . The private, correspondence  and govt(central and state) colleges are there. .Still the percentage system is there in the college .
Bachelor  3(B.Sc,B.A,B.com) -4yrs for engineering
Masters  2 yrs
M.Phil  1yr
Phd  2yrs+






अर्श से फर्श


अर्श से फर्श तक के सफ़र में याद आ गयी 
वो बातें तो अर्श पे चढ़ते  भूल गए थे 
उस सफ़र की याद ही रह गयी 
अर्श पे थे तब फर्श याद न रहा 
फर्श के लोग भी कमज़ोर लग रहे थे 
अपनी धुन और  ख़ुशी में इतना मगरूर थे 
लोग हर तरफ जलते है इस एहसास में भुला दिया
हर नज़र में अपने लिए जलना ही देखना चाहते थे 
हर बात में अपनी तारीफ ही सुनना चाहते थे 
बस " मैं " और सिर्फ " मैं " की दिवार बना ली 
अपने को भाग्यविधाता बना दिया 
माँ पिताजी की इज्ज़त भाई  बहिन का प्यार सब छोटा हो गया 
गुरुर का सुरूर सर चढ़ गया 
आज अपना अक्स अपने बच्चो में देखा तो जाना पाया 
क्या कर दिया मैंने ?
जन्मदाता के कर्मो को तोल दिया 
भाई  बहिन के प्यार का मोल किया
दोस्तों की यारी को जलन करार किया 
आज वहोई अक्स वही आवाज़ सुन रहा हु 
फर्क यह है कल जहाँ में था आज मेरे बच्चो की आवाज़ है 
आज अचानक जब फर्श को छुआ तब एहसास हुआ 
एक नजरिया था अर्श का जो आज फर्श का एहसास करा गया 
कर्म को सुधरने  का मौका धर्म से नहीं मिलता 
कर्म का भोग मैंने किया ...और मरण तक करूँगा 
सही गलत हमेशा पहचान थी पर भटकने में भी तो एक पल ही लगता है 
कभी अपने ऊपर आयेगा यह सोचना भूल गया 
 आज मेरी मूक आवाज़ और दर्द को बटने वाला कोई नहीं 
में एक मुसाफिर था -काबिले में रहना है या यायावर आज तनहा हो गया 
ऊपर नीचे विपरीत है पर बोलना तो साथ ही पड़ता 





शुक्रवार, 19 अप्रैल 2013

सिसकियों

आज  पड़ोस  से  आती  सिसकियों की आवाज़ बंद हो गयी ...............अचानक ... रोज़ सिसकियाँ सुनती हु ...आपने को बहुत मुश्किल से   रोक पाती हु --- सुबह दस बाजे  के बाद और  रात को दस बजे के बाद ...आज अचानक बंद हो गयी ...मुझे अच्छा लगा ..
 लेकिन, आज यह क्या --आज सिसकियाँ रोज़ से दुगनी आवाज़ सुनायी दे  रही थी ...........आज शायद कल की  ख़ामोशी आज  के तूफान का संकेत था ....
  आज नहीं रोक पाई, जैसे ही अन्दर घुसी मुझे देख लिपट गयी ...जोर जोर से रोने लगी समझ नहीं  पाई ...क्या करू  बैठ गयी...उसे चुप     करते कराते मेरे आंसू आ गए .....शब्द कम पड़ रहे थे ..उनके आंसू के बीच में मैंने पुछा क्या हुआ ...........सिसकी ---हिचकी बनी और शब्द निकले...
मेरा रिश्ता  मेरे पति के नहीं निभा पा रही.......
 अरे इतनी सी बात सब  ....    के बीच में लड़ायी होती है क्यों परेशां होती हो .... 
 लेकिन यह क्या ---चलो चाय बना दू
   मेरे साथ एसा नहीं है ---मेरा पति के जीवन में कोई  औचित्य नहीं है ---उसको मुझेमें कोई दिलचस्पी नहीं ,अपने घर  वो मेरी बात नहीं करता .....शादी के बाद से बोलता है उसके सपने बिखर गए.... में कितनी भी बीमार हो पानी तक नहीं देता ... कैसा भी खाना  बनाऊ. कभी पसंद नहीं  करता...  कभी मेरे पास आ कर नहीं बेठता ...कभी प्यार के दो बोल नहीं बोलता ...हमेशा लड़ता है ...मूड हमेशा  उखड़ा रहता है ........मुझे  जेबखर्च नहीं देता ...दूसरो के सामने नीचा दीखता है .........    मेरी किसी भी काम में न मदद करता न तारीफ  दूसरो से  मुझे कभी मेरे घर वालो को नीचा दिखता है.....हर बात में अपने मुझ में  बुराई  ढूंढता ..............कभी मुझे किसी से नहीं मिलवाता ....
 अरे सब के साथ होता है एसा .............पर हमने लगता है सिर्फ हमरे साथ ही  ऐसा हो रहा है ..............तुम आराम से बात करके देखो .................चाय तो  पीके देखो
मुझे नहीं पाता तुम्हे क्यों बता रही हु जबकि में जानती भी नहीं  तुम अपनी लगी या जो भी समझो .....
  तुम निश्चिन्त रहो में ..किसी ..
  कोई फर्क नहीं ................
    तुम  बात करके देखो
     बात ............इतनी जोर से हँसी .......रोने.वाली हँसी
  क्या हुआ ?
    बात नहीं करते -- मेरे पति 
मतलब 
सुबह अपना  डब्बा लेके निकल जाते है ...न गुड मोर्निंग ...न रात इतनी देर क्यों जागी  ........न ऑफिस से फ़ोन ....न शाम को आने के बाद पूछना... की क्या हुआ ? न क्या किया? अपने में रहना  ....न मेरे साथ खाना न सोना न जागना....शादी के इतने टाइम बाद भी में अनजान है एक दुसरे से..........मुझे लगता है में  दिखयी नहीं देती .......मेरी आवाज़ सुनायी नहीं देती ...........कुछ भी करेंगे तो  उसका एहसान जतना नहीं भूलेंगे .............  अगर कोई  मेरी तारीफ करे तो  बोलते है तुम जन बुझ  कर करवाती हो.......में सीधा बोलू  या उल्टा कोई फर्क नहीं .......... वो उल्टा ही लेते है.............कभी जो हमारे रिश्ते में कमी है  उसे पूरा करने के बजये बढ़ाते रहते है ..............में जो कोशिश करती हु उसे नाटक लगता है ..................
 अच्छा आज तुम उनकी पसंद का खाना बनाना और टेबल  को  मोमबती से सजा देना और फिर देखना ............
   में कर चुकी हु ..
 ......फिर
       ..फिर क्या अपना  खाना ख़तम किया और उठ कर चल दिए ..........
 क्या बोलती ........
 टाइम के साथ सब ठीक हो जायेगा 
 मुझे लगता था पर इस बार नहीं..............
 ..क्यों ..
.......क्योंकि न वो मुझसे प्यार करता है न बात न अपने मन की न दूसरो की ........... बस एक खाई  है हमारे बीच   जो कभी नहीं भर सकती 
 तुम अपनी सास से बात करके देखो..............
     मेरे पति ने हमारे बीच का सम्बन्ध  कभी बनाने ही नहीं  दिया ............अपने से दूर अपने घर वालो से बात नहीं करने देते ... .....  बस अपने में रहते है  की काम मुझसे नहीं पूछते ..कल क्या ?कैसे होगा ?कुछ नहीं ?....
   मुझे समय का ध्यान ही नहीं जब घडी बोली तब याद आया घर जाना है..................शायद  वो मेरी बात समझ गयी ..........मैंने आज्ञा ली  ...उससे बोला आ जाये जब उसका मन करे ............पर मैंने दिल से नहीं बोला था  क्योंकि .......मुझे डर था ...पता नहीं मेरे घर की शांति का क्या होगा  .
में चुप चाप  बेठ गयी
में पूरा दिन अनमनी थी में किसी से कुछ कह नहीं सकती थी अपने घर की शांति नहीं भंग करना चाहती थी
पता नहीं कुछ समझ नहीं आ रहा था
कभी सोच रही थी की शाम को खाने पर बुला लू ...पर अपने घर के शांति भंग नहीं करना चाहती थी ...एक अनजाना  दर भी लग रहा था ....उसका रोता चेहरा सामने आ रहा था ..............
जैसे एक हफ्ता बीता ...कोई जयादा रोना धोना भी नहीं था .......मुझे  सब ठीक हो  गया
  मन  हुआ देख औ पर पता नहीं कुछ रोक्न्रह था
अगली सुबह कुछ आवाज़ आई पता नहीं क्यों  मैंने कीहोल  से देखा पता चला कुछ खून और स्त्रत्चुर पर कोई जा रहा है मेरी सास रुक गयी .........
पर यह क्या वो तोह पीछे जा रही है ......लगा कुछ मुक्त हुआ ...................
उसके अनसु दीखे पर दर्द नहीं था