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सोमवार, 27 सितंबर 2010

अपना साया

चाँद फीका पड़ा गया
अब नहीं किसी का इंतज़ार रहता
किसी से कोई चाहत नहीं
इस  रुसवायी की वजह न जान पाए
कभी असमान के सितारे अपने से थे
कभी चाँद में एक अक्स दिखता था
कभी मन में उमंग बस्ती थी
हर सुबह नयी लागती थी
बिन बारिश जीवन इन्द्रधनुषी होत्ताथा
हर पल किसी  के खयालो की महक थी
एक पल में रेत की तरह सब बह जाता है
ताश की मीनार सा डह गया
मेरे ख्वाबो का गुलिस्तान
अपने साये के तलाश में रूह सी भटक रही हु
फिर से जीना होगा नए सपने सिने होगी
एक नज़रियाँ छोड़ के नए में अपने  को पिरोना है
बस अपना साया मिल जाये
सपनो उम्र खुद बा खुद नाप जाएगी

रविवार, 12 सितंबर 2010

बीवी के entertainment

नारी तेरी यही कहानी

पति परमेश्वर समझ सब करना
उसके लिए नौकरानी से ज़यादा कुछ नहीं
बस ! तुम करो और कर करके मरो
उसके लिए करो ..जिसको उसकी अहमियत हो
किसी को गरज नहीं किसी का करने की
क्या इसलिए करो या तुम प्यारी  हो इसलिए करो
एक तारीफ सुनाने के लिए के कान  तरस जाते
पतिदेव सिर्फ गलती की तरफ उंगली उठते
जिस दिन सज साँवर कर इंतज़ार करते उस दिन बहुत लेट आते
अच्छा खाना बनते उस दिन ज़रूर बाहर से खाना खा कर  आते
पति का मोबाइल ,ईमेल और कपडे ज़रूर साफ़ करते
पर शक की निगह ज़रूर उन पर रखते 
जिस दिन पति के टिफन  में इलू लिख कर भेजते  अपना टिफन  किसी और को दे देते
यदि पति सिसकी न सुनते रात को तो बच्चो को डांटते  या गाने लगा देते
पति भी कम नहीं कहाँ गयी क्यों गयी
बड़ा बन ठान के जाती हो
पैसे और घुमाने की बोलते ही
स्वामी -एक करवट लेके सो  जाते
और तुम जूते की नोक पे रहोगी हमेशा
 २१ २२ २३  या १ सदी क्यों न आजाये
यह हमने नहीं भगवान ने नियम चलाया है
नारी --फिर गरजती है चंडी बनके
सारी राम कहनी सुना देती
कपडे प्रेस से लेकर खाना  बनाना
मुने मुनि को सँभालने से लेकर झाड़ू पोछा  लगाना
आखिर में स्वामी हमें प्यार नहीं करते
किसी और से करते है अपनी ही सहेली का नाम लेके
बेचारे स्वामी का जी दुखन
और खुद जोर जोर से रोने बेठ जाना
बड़ा ही रोचक है यह ड्रामा
जब ऊपर भगवान से पुछा तो बोले यह सब अपनी बीवी के entertainment के लिए   बनया है
वर्ना सारा दिन मेरे काम में disturb  करती है
पर भगवान हमारा क्या
अरे तुम्हरे लिए एक्ता कापुर को भेजा है न

शुक्रवार, 10 सितंबर 2010

ख्याल

खाली तस्वीर में अक्स उभरने लगे है
मन में अरमान पनपने लगे है
बेताल होती सासे किसी का इंतज़ार रहता है
हर आहट   पे कदम ताल सुनायी देती है
धड़कन में कोई बस्ता है ,सिर्फ उनका इंतज़ार रहता है
जब हमारा साथ हकीकत में बदल जायेगा
और अपनी शर्तो को सपनो से हकीकत बन जायेगा
उस पल के रूमानियत से आज हम भीग जाते है
न जाने कैसा  होगा वो पल बस उसकी तमन्ना  है
 उसके ख्याल में इतना प्यार है न जाने हकीकत में कितना होगा
हर लड़की का सपना होता है  बाली उम्र से
उसका पूरा होना सुकून है और ऊपर वाले के मेहर है //

बुधवार, 8 सितंबर 2010

घुन

अरुण ,बेटा तुम्हारे  लड़का हुआ है तुम्हे सब को देना है अपनी बहिन को , अपने भाई को........  पैसा भेज दो /
अच्छा माँ ,में २-३ दिन में  भेज पाउँगा ...
कितना भेजोगे ?
पांच हज़ार
बस ...इतने में क्या होगा ?
पर माँ अभी २ हफ्ते पहेले तो भेजा ...............
तो पूरी गृहस्थी  है .......लेना देना आना जाना लगा रहता है .......और  में अपने लिए थोड़ी तुम्हारे बहिन भाई के लिए ले रही हु
अरे, माँ आप  तो नाराज़ हो गयी
तू बात ही ऐसी करता है ....बोले तो हिसाब लिख कर भेज दू ..
अब तू कमाता है तो करेगा भी अपने माँ बाप का बड़ा पुण्य होता है ..बहिन बेटियों  को तो देना पड़ता है ..इतनी बड़ी नौकरी है तेरी .......
बड़ा शहर बड़े खर्चे  बड़ी नौकरी सब बड़ा है ..............माँ
क्या ?
अच्छा माँ रखता हु ..
अच्छा .....जीता रह ...पैसा ज़रूर भेज देना
हम्म
रमा में आ रहा हु बाज़ार से सामान लेके
अच्छा ..ठीक है
लगता है रमा ने मेरी बात नहीं सुनी आज ..वर्ना पैसे भेजने की बात पर कुछ बोलती ज़रूर ...इसलिए में तो निकल आया अभी माँ की सुनो ,..फिर रमा की ...कल बच्चे अलग कुछ बोलेंगे ....इसी उधेड़ बुन में सामान खरीद लिया
घर पहुंचा ..
 खाना लगा रही हु ..हाथ मुह धो  कर आ जाओ
हाँ ,आता हु मुन्ना सो गया
हाँ ..
खाना अच्छा बना था
हम्म
क्या हुआ ?इतनी चुप क्यों हो रमा (तूफान से पहेले की शांति )
आज माजी ने फिर पैसे मांगे न
हाँ
देखो ,में तुम्हे बोल रही हु अभी सब एक लिमिट में कर दो कितने बरसो से तुम्हारा फायदा उठा रही है जब मुन्ने के टाइम पे हमे ज़रूरत थी........ तो कोई नहीं आया ......तब तुम्हारी याद किसी को नहीं आये तुमसे सारा पैसा लेके २ किलो लाडू भिजवा दिए न कोई हमरे लिए पूजा पाठ न कुछ..... बस जो दीदी के नेग का था ...अब फिर से नेग दो ...भाभी का नेग होत्ता है यह तुम्हारे भाइयों बहनों को याद नहीं क्या ? मुझे बहुत कोफ़्त  होती है इन सब चीजों से एक माँ होते हुए भी भेद भाव
रमा तुम्हे कोई कमी तो नहीं ........
अरे, में तो कमी में भी तुम्हरे साथ रह लुंगी ..पर तुम्हरे पैसे की दिन बा दिन बढ़ते दवाब  को नहीं झेल पाऊँगी तुम्हारे सपने कहीं खोते जा रहे है.. मैंने मुन्ने का आना और नहीं खिसका सकती थी ..आने वाले समय  में तुम्हारे खर्चे  बढेंगे ही..में मानती हु तुम बेटे हो तुम्हे करना चाहिए पर इतना नहीं कर सकते ...हमे  यह बात माजी को समझनी होगी ..तुम एक बार मुझे यहे सब करने दो में संभल लुंगी ..पैसा पेड़ पर नहीं होता  तुम रात को ३ -३ बजे तक काम करते हो ........आज हमारे पास कोई सविंग नहीं.. कोई मकान नहीं ..मुझे मकान का कोई लालच नहीं पर में तुम्हारे सपने नहीं तोडना चाहती ...रोज़ रोज़ तुम्हारे इस दवाब को मांगो को कभी बहिन कभी भाई  कभी रिश्तेदार कभी दोस्त .....अब तुम्हारी फॅमिली है उनकी जिमेदारी है......तुम समझो सब भाई बेठ कर थोडा थोडा पैसा हर महीने भेजो माँ के पास उसमे किसको को बोझ   नहीं पड़ेगा और माजी को बोलो इसमें ही आपको सबका करना है ..एक सविंग अकाउंट खुलवा दो बोलो इसमें हर महीने पैसा जमा करा करो ..इससे बचत भी होगी और सबके बच्चो के नाम से RD खुलवा दो माजी उसमे जो पैसा डालेंगी वो माजी के नाम से हो जायेगा तुम अपने लिए बोलके देखो ..
हम्म
श्याम ,हम्म हां नहीं पैसा बुरी चीज़ है लड़ाई करवाता है इसमें बिलकुल साफ़ और सटीक  रहना चाहिए
कल तक दस हज़ार में ही खर्चा चलता था आज बीस ही पूरा नहीं है कल तीस पूरा नहीं होगा ऐसे तो बढ़ता  जायेगा तुम पर दवाब भी तुम्हे ही ऑफिस जाना होता हो एक स्तर दिखना होता है .अकी तुम्हरे है पैसे का रोना रोते है हम खुद कमी  में रह कर उनको पूरा करते है ...पर बेफिजूल के खर्चे  का बोझ  है ..तुमने घर बनवा  दिया  ,,सारा सामान आ गया ..नहीं तो उन्हें यहं बुला  लो इसे तो कम ही खर्चा  पड़ेगा ......अच्छा चलो छोड़ो तुम  जा कर सो जाओ ..वोही करो जिससे तुम्हे संतोष हो....
न जाने लोग शादी क्यों करते है यह तो कह नहीं सकता माँ क्यों होती है पर यहे बीवी बाला तो लगता है भगवान को भी नहीं छोडती .....
अरी श्याम किस उधेबुन में जा रह हो ज़रा रुको तो कुछ नहीं ...तुम कहँ से आ रहे हो पास ही बैंक से माँ को रूपये भिजवा रह था ..
अच्छा तुम भेझते तो सारे
नहीं रे सब भाई मिल कर एक बराबर करते है
सही है
अगले महीन जा  रहा हु घर सब के लिए कुछ लेना है ...
हम्म
क्या बात है इतने उदास क्यों ?
बीवी ने कुछ कहँ वसे तुम्हारी  बीवी इतनी समझदार है ..........
अच्छा मुझसे पूछ ...नहीं
मेरी बीवी को तो ज़रा से पैसे  भेजना भी नहीं पसंद ...गिफ्ट ले जाती है क्योंकि सब उसको कुछ न कुछ देते है वर्ना .....और कोई काम नहीं करना पड़ता ...वहां
अम क्या बात है
कुछ नहीं
में चलता हु
सही बोला मेरी रमा ने कभी मुझे नहीं रोका  मैंने जो करना चाह हमेशा मेरा साथ दिया कोई आ जाये तो चार सब्जी जल्दी से बनके अच्छे से रख दे ......घर मेरा कपडे मेरा सामान मेरी पसंद न पसंद का कितना ख्याल है ...और भी बहुत कुछ पर न जाने में ज़िन्दगी  से क्या चाहता हु उसको खुश नहीं रख पाता ....उसमे  कमियां निकलता रहता हु ..पर में उससे बहुत प्यार करता हु ..बस चोचलेबाजी नहीं कर पाता....  जानता  हु  जो  वो  बोलती  है  वो  सही  है   ..लेकिन  माँ  के  प्रति  मेरा  फ़र्ज़  है  कभी  कभी  वो  उसका   फायदा   उठती है ....पर हर व्यक्ति का फायदा कोई न कोई तो उठता है ...हर आदमी एक घुन  होता है ...कभी कही से पिस्ता है कभी कहीं से ....मज़े की बात  ..भगवान का बनया हर आदमी घुन होत्ता है अगर वो कमाता है तो ..........
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