संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

मंगलवार, 17 अगस्त 2010

पुश्तेनी मकान

पुश्तेनी   मकान नहीं तंग गली या पुराने इलाको के आज के interior में जमते नहीं
न गर्मी की छुट्टी में शोर होता है न  ठहाको  की आवाज़ आती है
बस सबकी व्यस्त ज़िन्दगी और महंगे  सामान  की होड़ हो गयी है
क्या कभी कोई  मुड कर नहीं देखना चाहता अपने  बचपन को
वह  गली पुकारती है बचपन जीने के लिए, पर महंगे कपड़ो  पर दाग न लग जाये
इसलिए कदम रोक  देते है कभी अपने बच्चे  ही कंजूस लिविंग बोलके चल देते है
आज कुछ नहीं कमाते  तो इतना दम दीखते है
कल का जाने क्या होगा जब यह कमाएंगे
अपनी दादी की भाषा में प्यार पाने का मज़ा क्या पैसे से ले पाएंगे?
नानी की दुलार का कौन सी सम्पति में हिस्सा पाएंगे?
माता पिता ने सब किया एक अच्छा इन्सान बनाने के लिए
उन्हें क्या मुह दिखेंगे की काम पैसे में पाला हमें किस मुह से बोलेंगे?
जबकि हमने देखा है उनकी छोटी छोटी बचत को
आज हर रोज़ नए मोबाइल  टीवी कार घर घूमना खाना पीना फ्लिम
शराब शबाब कबाब क्या यह सब जीवन है?
नहीं पाता चाचा चाची ताऊ ताई उनके बच्चे
कल तक एक गठ जोड़  में बंधा परिवार आज छन से बिखर गया
सिर्फ बड़ी बड़ी तस्वीर अब अलमरी के अन्दर एक बोझ हो गयी
कभी यह बड़े कमरे में लग घर के बुजुर्गो और अमीरी की निशानी थी
आज एक जगह घेरने  वाली चीज़ रह  गयी

नहीं इतना जगह माँ बाप को क्या उनकी तस्वीर को क्या दे 
 कल हम अपने मातापिता का घर outdate लगता था
 अब हम और घर दोनों बच्चो को outdate  लग रहे है 
 outhouse में होंगे कल पुश्तेनी   मकान और हम 


Train To Pakistan...Based on the Novel by Khushwant Singh

इज़हार

तेरे खयालो की खुमारो में सब गवा बेठे
तेरे प्यार की लौ में खुद को जला बेठे
तेरे इंतज़ार में कान लगा  बेठे
तेरे प्यार  में खुद को गवा बेठे
एक इज़हार की रहा में सर झुका के बेठे है

शनिवार, 14 अगस्त 2010

मेरा देश

शत शत नमन!! ६४ स्वतंत्रता  दिवस पे एक छोटा सा प्रयास

यह है मेरा देश प्यारा
भारत है इसका नाम
चारो लोक में है इसकी शान
जग है सबसे चमकता तारा
                        जन -गण- मन है राष्ट्र गान
                        वन्देमातरम  राष्ट्र  गीत
                       मोर,चीता,कमल है हमारे
                        राष्ट्र पक्षी ,पशु और फूल
                         सचाई है धरम हमारा
                        प्यार हमारी भाषा
                        इन सबका संगम है देश हमारा
पग पग पर बदलती भाषा
खाना और पहनावा
नहीं है कोई मन मुटाव
न कोई छोटा न कोई बड़ा
न उंच नीच न जात पात
हम सब एक समाज
इसी में है हमारी शान
                               एकता है हमारी ताकत
                              प्यार हमारा  बल
                              होसले है बुलंद  हमारे
                                कर देते है पस्त
                              दुश्मन के इरादे

शुक्रवार, 13 अगस्त 2010

व्यथा

ख़ामोशी  पाव  पसरती सी
कभी आंसू कभी उदासी बनकर
टूटे कांच के टुकड़ो  में
अपना अक्स  तराशती  सी
खोई सी हैरान है
अपनी ही परेशानियों से त्रस्त है
जीवन  के अस्त होने का इंतज़ार करती
तन्हाईओं  में साथी ढू ढ ती  सी
 बंद  कमरे में  अकेली
अपने विचारो से जूझती
अपनों के पराया  होने से हैरान
बेजान महसूस करती सी
भारी कदमो से आगे बदती हुई
जीवन पथ पर भटकी सी
अपने में  ग़ुम होती सी
अधूरी तमना  और चाहत के बोझ  के साथ
 मुरझाये  फूलो के तरह
पतझड़ के सूखे पतों सी
हवा के हिसाब से चलती हुई
जमी में अपनी जड़ सी जोडती  हुई
अपनी कब्र पर फूल चढ़ती  हुई
अपने आंसू छिपाने की बेअसर  कोशिश करती हुई
अपने हाल पर हर किसको तरस खाता देखती सी
अपनी गलती ढू ढू ती    सी
अपनी शंकाओ का समाधान खोजती सी
खिलोने सी घुमती हुई
गम के संदर में हँसी तलाशती
खुशियों के बहाने बनाती
अपनी खूबसूरती अपनी प्रतिभा छिपाती
कोई नहीं जो दो मीठे बोल बोल दे
दो रोटी के टुकड़े  निगलती
माँ बाप के होते हुए अनाथ सी
थरथरते होटो से अपनी बात बोलने
व्यथा  को व्यक्त करते हुए
                                आगे ..................

मज़ा

यह जान पहचान बरसो पुरानी है
सारी बात आँखों में हो  जाती ही
तेरी मेरी प्रीत का प्रतिक  है
यह अटूट रिश्ता
आ बेठ...! थोडा सुस्ता ले फिकर  को उड़ दे
रेतीली ज़मीन पे भी मज़ा है लोगो को दिखा दे /

मंगलवार, 10 अगस्त 2010

शाहरुख़ थोडा थोडा

वीर ज़रा के अंजाम के डर से कुछ कुछ  होता है
रामजाने इस दीवाने के चाहत का काल हो गया
दिल तो पागल है इसे ही बाज़ीगर चलते चलते थोड़ी बनते है
यह तो स्वदेश जाये आखिर फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी
और यह तो बादशाह का दुप्लिकाते
और एस बॉस करने वाला है
अब खुद डन हो गया है
कभी कारन अर्जुन कभी गुड्डू
सब सत्ता का चमत्कार है जीवन नहीं एक पहेली  है
पाता नहीं कल हो न हो
वसे भी कभी ख़ुशी कभी गम
पर साथिया जनता था दिल वाले दुल्हनियां ले जायेंगे
इसलिए तो राजू बन गया है gentelman
अब तो ॐ शांति ॐ है
लेकिन उसका नाम है खान

सोमवार, 2 अगस्त 2010

Magical

I love u from the deepest corner of my heart
I want to give u all the happiness u deserve
You cast your shadow on my mind
This all is so natural I cant keep my self out of it
My mental strength is unpretentious
A feeling of being in love with some one is immense and real
You are important to some one gives u privilege to think more deeper and intense
My love for u is innocent and genuine
I do not expect any commitments from ur side
Always wish to see u happy
May GOD fulfill all ur dreams
This is my biggest dream being your wife
इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.