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बुधवार, 12 मई 2010

hey baby

"अरे , बेबी  मेरा  प्यारा  बेबी कुची कुची ,कैसा है तू  come यहं रख लो अपना , सर "
यह आवाज़ सुन इतना अच्छा लगा रहा था मेरी पीछे की सीट से कहीं आवाज़ आ रही थी / मुझे लगा कितने प्यार से एक माँ अपने बच्चे को सुला रही है या खिला रही है /बड़ा अच्छा लगता यह सब देख कर पीछे मुड कर देखना अच्छा नहीं लगता इसलिए नहीं देखा आँखों के कोने (कनखियों ) से दिखयी नहीं दिया .....
बेबी बड़ा समझदार था, माँ के बोलते ही चुप हो जाता आवाज़ तो -मुझे आ ही नहीं रही थी /इतना शांत बेबी इतने लम्बे सफ़र में कभी नहीं देखा /अच्छा ही है किस्मत वाले है / ज़रा उठी पीछे देखने के लिए पर कोई सीट पर था नहीं मुझे लगा रेस्ट रूम  गयी होगी या बच्चे का diaper बदलने गयी होगी ........
जैसे जैसे बच्चे को  बेबी बेबी करके खिलाती मुझे बच्चे क देखने की ललक बदती जाती ..खेर अब तो सफ़र ख़तम  होने वाला है अब तो देख ही लुंगी /
अरे, बच्चा कहाँ है दिखा ही नहीं रहा ..मेरे पति ने बोला चलो  आगे में आगे बढ गयी / जब lugage   के लिए रुके तो मिल गयी में खम्बे  के पीछे से देखा वो बेबी बेबी कर रही थी पर यह क्या .........................अपने पति को बेबी बेबी बोल रही थी .मुझे कानो पे विश्वास नहीं हुआ ...अपने पति को बताया तो बोले ,आजकल का फैशन है पति या बॉय फ्रेंड को बेबी बोलना .........
मैंने सोचा फिर बच्चे को क्या बोलते है ?
वसे तो सही है , आजकल पति का नाम लेते है और बच्चो से आप आप करके बोलते है /
अब तो हर पति hey baby लगता है  है

शनिवार, 8 मई 2010

माँ मेरी माँ

मेरी माँ मेरा गर्व मेरा गुरुर ....में बहुत खुश किस्मत हु माँ --की आप  मुझे मिली ,मैंने  हर बात आपकी मानी और अपनी हर बात आप को बतायी ,कभी कभी आपसे  तकरार भी की गुस्सा भी किया पर दिल से आपका सम्मान किया आपको  प्यार किया आपके स्पर्श से अभिभूत   हुई हु .आज आपसे बहुत दूर पर आज बहुत करीब हो गयी हु . भगवान् का बहुत बहुत धन्यवाद की आप जैसी  माँ दी मुझे .............


 अंगुली पकड़ने के साथ चलाया है
 मुझे कभी लोरी गा के सुलाया है
मेरे खाने के लिए घंटो इंतज़ार किया है
मेरी  पसंद  का  खाना  बनाया मेरा मन रखने के लिए
अच्छी सीख देके मुझे बड़ा किया
अपनी नीद खराब कर मुझे पढाया
एक अच्छा इन्सान बनाने और नारी की मर्यादा को समझया
अच्छी सोच और संस्कारो से मेरे विचारो को सीचा 
आज की और कल की नारी के अच्छे गुण अपनाने को बोला
इतना प्यार और दुलार दिया
हमेशा हर मुश्किल  और नामुमकिन  काम को कर दिखाया
मेरे मन के डर दूर भगाया
हमेशा हर बात का डर माँ को दिखाया , कभी चिल्लाये  कभी गुसये 
कभी माँ का प्यार कम समझने की भूल की
ऐसी है मेरी माँ मेरी और मेरी माँ ........


माँ के सपर्श से बुद्पे में भी बच्चे बन जाते है
माँ के हर वचन सच लगते है जब खुद माँ बन जाते है
एक माँ को और भी ज़यादा प्यार और सम्मान करने लगते है

माँ Mother's day के अवसर पर आपके लिए कुछ  दिल से निकले  शब्द  शत शत नमन

शुक्रवार, 7 मई 2010

रेल गाड़ी

रेलगाड़ी  रेलगाड़ी
आगे इंजन पीछे डिब्बो वाली
इंजन है कभी काला ,कभी बिजली से चलने वाला
छुक  छुक करके चलती रेल
देखो , चुनु मुनु  मुड रही है रेल
सभी सभी सुविधाऊ वाली रेल
जसे जसे चलती रेल लगता भाग रहे
संग संग पेड़ छुट्टी आये रेल से जाये
कभी नाना नानी दादा दादी के यहं ले जाये रेल
स्टेशन पे चाय -पकौड़े अख़बार ,आइसक्रीम वाला चिल्लाये
उदास हो गया सोच कर मन अगले स्टेशन पे मेरा घर
अगली छुटी  फिर जब होगी इस रेल के  संग हो लुंगी

बुधवार, 5 मई 2010

में बनू बड़ी

में बड़ी तो बहुत हो गयी ,पर बचपन  में लिखी कविता को भूल नयी पाई ,बड़े दिल से इस कविता को महसूस किया है  / बहुत छिपाने की कोशिश करती हु बचपन को पर दिख ही जाता है  

हे ! भगवान में जल्दी बड़ी हो जाऊ
खूब खेलु खाऊ पियु मौज मनाऊ
चारो तरफ धमा  चौकड़ी मचाऊ
सबको तंग  कर घर सर पे उठाऊ . 
                            हे ! भगवान में जल्दी बड़ी हो जाऊ
                            मामी जसे पकवान बनाऊ
                            पापा जसे हुकुम चलाऊ
                            दीदी जसे पढ़ लिख जाऊ
                            भैया जसे गाड़ी चलाऊ
हे ! भगवान में जल्दी बड़ी हो जाऊ
मामी पापा का नाम बढ़ाऊ
सुन्दर से घर में शादी कर के जाऊ
अपने सब कर्त्तव्य निभाऊ
लड़की नंबर वन कहलाऊ  
हे ! भगवान में जल्दी बड़ी हो जाऊ

सोमवार, 3 मई 2010

छुट्टी का जादुई मंत्र

छुट्टी आई सपने लाई
टिनी बोली - रहेगी मौज मस्ती , ग़ुम है पढाई
सोनू बोला - जा रहा हु घुमने भूलकर पढाई
दीदी आई बोली - पढाई नहीं है बोझ
इसने  तो जीवन की  ज्योत जलाई
तुम जो पढ़ते हो वही घूमते
जो खाते हो वही पढ़ते
तुम पेड़ पोधो  से प्यार करते हो
उन्ही के तंत्र का ज्ञान लेते हो
 अच्छा खाना पीना स्वस्थ रहने सीखत्ते है
फिर क्यों पढाई से जी चुराते
पहले  समझो फिर याद करो
ग्रह कार्य को सुगमता से करो
दीदी ने नयी दिशा दिखाई
जिसे देख में चिलायी
अब नयी तरह से काम करुँगी
मिनी इठलाई -फोटो और रिपोर्ट बनाउंगी जहाँ  में घूम कर आउंगी  
टिनी बोली में करुँगी  पत्तियों  का संग्रह
सोनू बोला - में अपने तंत्र और पर्यावरण की  साफ सफाई के तरीको को बाटूंगा
दीदी से जादुई  मंत्र के लिए धन्यवाद
चुटकी  में कर दियाछुट्टी  में सारे  ग्रह कार्य
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