रविवार, 30 सितंबर 2018

आप क्या लोगे क्या दोगे
facebook के पोस्ट देख कर खुद के मन में टीस उठेगी 
ऐसा  लगेगा बस तुम्हारा ही घर है जहाँ कलेश ही कलेश है 
मन में चाह उठेगी, काश !वह पहुंच जाये 
जहाँ मेरी so  called  दोस्त post मेरे दिमाग और दिल में परेशां कर रहे है 
क्या कर सकते  है?  चलो इसी बात पे लड़ लेते है 
जाने क्यों! खुद का अस्तित्व को छोड़ के एक पर्दा में क्यों रहते है 
थोड़ी थोड़ी छोटी छोटी बातें  क्यों उलझा जाते है 
जाने क्यों यहाँ यहाँ क्यों होत्ता है 
मन को टटोले उसमे  छिप्पी  अच्छाई को  गले लगा लो 
थोड़ा सा देखो थोड़ा सा समझो
बस इतनी ही सहन शक्ति है छोड़ो दो
आसान राह अपना लो
ज़रा सोच को बड़ा करके देखो
बहुत बड़ा है यह दिल और दिमाग उसको फैला करदेखो
कभी कोरे कागज़ पे कूची चला के देखो
खुद के दिमाग की परछायी  मिलेगी उससे नयी राह  दो
आपने से नाता जोड़ो ,बाकि सब छोडो
नयी दुनिया हो या पुरानी हर जन्म हर वक़्त बस दिमाग  ही कीमती होता है
बंद मुट्ठी की ताकत को social media पे बर्बाद मत करो
social media एक मंच है, अपनी दिमाग का अस्तित्व है
उससे सही इस्तेमल  करो
मज़े  लो दुनिया में आके
 पता करो  हम दुनिया में क्यों आये है।