गुरुवार, 30 अगस्त 2018

मन की परीक्षा

कभो कभी कुछ पल जुदा  होके भी अपने लगते है
कभी कुछ लोग पराये  होकर भी अपने लगते है
सफर एक न हो  फिर भी मंज़िल तक पंहुचा देते है
कभी कच्चे रास्ते  पक्की नीव बनदेते है
कभो पक्के रास्ते  नीव कच्ची कर देते है
छोटे छोटे कदम कब बड़े बन जाते
ऊँचे ख्वाब कभी रह रह  दिवार बन जाते
सफलता की कुंजी नहीं, सफलता कोई दवा नहीं
सफल होना किस्मत नहीं
थोड़ा सी मेहनत  सा ख्वाब की तमिल है

बस यु ही खड़े  थे अरमानो के समंदर में
न जाने कब तूफान आया हम बह चले। .

मन की परतों को न छूना
बहुत से राज दबे है
ज्वालामुखी सोया  रहे तो ही अच्छा है
लावा प्रेरणा बने तो बहुत अच्छा है।

मेरे प्रेम की गहरायी न पूछो
मेरे  मन की परीक्षा न लो
सच्चाई  मेरी आँखों में है
अपने सवाल का जवाब मेरी ख़ामोशी में ढूंढो
तुम्हारे हर लफ्ज़ में बेवफ़ाई  है
मेरी मोहर का इंतज़ार न करो।


परेशां रहने की आदत हो गयी  है
सब कुछ  पहले से ज़यादा है अपनों के सिवा
 लेकिन  रुख में रूखापन है अपनो के बिना
याद भी आती है साथ नहीं रह पाते है
एक इधर दूसरा मुँह उधर कर चले जाते है
कभी प्रतियोगिता कभी जलन में पड़कर
दूरियां बना लेते है नाज़ुक डोर है
थोड़ी मेहनत कर पक्का करना तो होगा ही