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रविवार, 2 जुलाई 2017

मेरी ज़मीन


कुछ याद  से में  जुदा होती नहीं
इस तरह मुह मोड़ के चले जाओगे कभी सोच न था
हमारी  दिवार  थे हर लम्हा बहुत याद आता है
हर मुश्किल हर  आपको  साथ पाया है
हमारी बहुत सी तकलीफ में  आपको पास पाया
बड़ा  सदमा है आपके  होने का
कभी सोचा न था
इतना सा  साथ होगा
बस यह सोचा न  था
हर लम्हा हर पल तू मेरे साथ है 
तेरे बिन में अधूरी हूँ 
तेरे बिना मेरी सास के मायने कुछ नहीं
 हर वक़्त तेरा एहसास है  तू मेरे पास है

मेरे हर कदम मेरी हर रफ़्तार में है तू
मेरी हर बात की गहरायी में तू
अगर कोई  तुझे याद करे एक मुस्कान में तू
जीवन का पाठ जो तूने पढ़ाया
कोई नहीं सीखा पाया
मेरे मन की गहरायी में तू
जहाँ जहाँ तू थी एक सुकून था आज भी है और कल भी रहेगा
मेरी नन्हीं  पारी तू जाना है बस सुखी रहना
तू सुख  की परछाईए  है और  में तेरी
 क्यों कैसे सब फिसल गया क्यों कैसे कब यही हो गया
में कठपुतली सी देखती रह गयी
मेरा दामन अधूरा रह गया
बड़े अरमानो से तेरा  महल सजाया था
आज खण्डार कर मुझे झकझोर गया
 मेरी ज़मीन  लेने वाले ने कभी  नहीं बतया में क्यों हु ?


तू क्यों नहीं  पाता ,तू  कहाँ है यह पाता है 
तेरे बिना मेरे पल में  अधूरे है
तेरी यादे मेरे लिए बहुत तोह नहीं
पर यही है जहाँ है खुश  रहे तू
यहॉ मेरी आरज़ू है यही मेरी तमन्ना है
प्यार बहुत बहुत प्यार
शुक्रिया मुझे माँ बनाएं के लिए 
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