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बुधवार, 25 अक्तूबर 2017

रूठ

रूठी हुई है किस्मत, मेरी रूठे हुआ है यार 
रूठा है प्यार मेरा  ,  रूठा यह संसार 
रूठ  रूठ कर  कर ,खुद से रूठ जाती हु  मैं 
कभी कभी यह दिल मुझसे ,कभी में दिमाग में उलझ जाती मैं 
बहुत  सी छोटी छोटी बातें भूल कर काम में लग जाती हु 
बुझा चेहरा देख खुद पे झुंझलाती मैं 
मना मना कर रूठ जाते है लोग 
एक बार छोड़ दो कभी सुधर जाते है लोग 
कभी टीस बाना  कर समय समय पर घाव दे  जाते लोग 
रूठा रूठा मन देख कर बुझ जाते लोग 
माना माना कर खूब खुश हो जाते लोग ज़रा पलट कर देखना 

यह रूठ बस मन की निशानी है 
एक बार रूठ  से रूठ  जाओ ज़िन्दगी भर खुद और सबकी आज़ादी है। 




सोमवार, 23 अक्तूबर 2017

यूँ ही

रास्ते पे चलते यूँ ही कुछ गलियां  मिल गयी
बाहर बहुत से अरमान कुचले पड़े थे।
गम थे उससे पहले बहुत से आज सब बेमानी लगते है
थोड़ी सी ज़िन्दगी में वक़्त बहुत कम है
शिकायत बहुत है लेकिन गौर करने का वक़्त नहीं है
आज बस आज है कल से बहुत दूर है
न आने वाले कल के पास था न जाने वाले कल के पास था 

मंगलवार, 10 अक्तूबर 2017

प्रश्नचिह्न

थोड़ा थोड़ा छोटा छोटा मेरा सपना था
आज बिखरा हुआ  एक  पन्ना है
बड़ी उम्मीद से घर में आये थे
आज तिनका तिनका बिखरा है
थोड़ा थोड़ा गम तो बर्दाश्त  भी था
पर यह गम तोन पी सकते है जी सकते है
ज़रा सोचा होता मेरे बारे में
क्यों इतना बेकार बना दिया ?

जीवन का कोई मतलब होता तो अच्छा होता
आज हर मोड़ पर पलटवार कर देते हो
क्या कर क्या सोचु क्या बनु
शायद ,एक प्रश्न चिन्ह है मेरा जीवन
जिसमे जब मोड़ पर रुकने लगती हु
 आगे खाई आ जाती है
 में फिर धकेल दी जाती हु
इतनी कठिन डगर  होगी सोचा था
 जीवन प्रश्नचिह्न  माँगा न था

मेरे हर निर्णय पर कभी में  प्रश्नचिह्न बन गयी
जब जवाब माँगा  तो  उत्तर में  प्रश्नचिह्न बना दी गयी
न्याय है या अन्याय ऊपर वाले से पूछो
में तो एक निर्णय हु जो  प्रश्नचिह्न की तरह घूमता है

तेरे आने  की ख़ुशी  का ठिकाना था
मुश्किल तेरा जाना था
सोचा तो बहुत था तेरे लिए
पर लिखा कुछ और पर लिखा कुछ और था
 कितना सीखा गयी इतनी सी उम्र में
मेरे करीब है तू, मुझे रास्ता दिखती
मेरी प्रेरणा है तू मेरी अनुष्का
मुझे पूर्ण करती मुझे समझती समझती
मेरी प्यारी बेटियाँ 





अनुष्का

जितने मन से तुझे पाया था
चद पल ने तुझे दूर कर दिया
कभी दिन ऐसा भी था आज बस.
एक अधिकार जो पाया था
तुझे आँचल  में थमाया  था
एक परी  को सपनो में देख तेरी आस लगायी थी
ख्वाब बन कर आयी थी
मातारानी के साथ आयी और चली गयी
भाई की कलाई का इंतज़ाम कर
पापा की परछाईयी को धुंधला कर
माँ की प्रेरणा बन चलती बानी
इतनी सी उम्र में अपने कदमो से रोशन कर घर
जहाँ रहना सुखी रहना स्वस्थ रहना
हमारी प्रेरणा ,हमारी आस ,तू जीवन के हर पल में खास तू
जीवन का खूबसूरत एहसास तू ..... अनुष्का
यही भी एक इत्तेफाक है
हमेशा तुझ पे नाज़ है 

गुरुवार, 24 अगस्त 2017

जैसी भी है मेरी है। ..

बरसो बाद कलम ने चलने की ख्वाइश जतायी 
धुंध  खयाल उमड़े रहे थे 
पर सोच से पहले ग़ुम  हो गए 
आज तो खुद ही हाथों में आ गयी 
लय   तान का मंच नहीं 
बस कुछ खलबली हुई लिखने के लिए 
एक बार जब शरू होत्ती तो दो चार खिंच जाते 
चाय की चुस्कियों के बीच न जाने कितने किस्से लिखे जाते 
आज हो या कल,कंप्यूटर हो कलम 
सोच और जोश वही उभर आता है 
बस एक ख्याल का तहलका है 
सोच तो कला है ,ढूंढो तो बाला है 
लिखो तो तनहा है,पढ़ो  तो चाह है 
एक ख्याल के बीच में उलझा हुआ जाल है 
कभी तो इससे माल है कभी यही बेताल 
रस  से भरी , कभी गम से तर 
 अपने, अपनों के ख्याल गुनगुनाती 
मन की चाह की गुथमगुथि में गुथी 
कभी कसमसाती कविता कभी कहानी  बन उतर जाती 
यह भी एक नेमत है कभी मिल जाती है 
कभी रूत कर बेचैन कर देती 
ऐसे ही यही भी पर जैसी भी है मेरी है। .. 
 



गुरुवार, 20 जुलाई 2017

किताबे US की लाइब्रेरी

मुझे यह किताबे US की लाइब्रेरी में पड़ने का मौका मिला बहुत ख़ुशी  मिली 




























रविवार, 2 जुलाई 2017

मेरी ज़मीन


कुछ याद  से में  जुदा होती नहीं
इस तरह मुह मोड़ के चले जाओगे कभी सोच न था
हमारी  दिवार  थे हर लम्हा बहुत याद आता है
हर मुश्किल हर  आपको  साथ पाया है
हमारी बहुत सी तकलीफ में  आपको पास पाया
बड़ा  सदमा है आपके  होने का
कभी सोचा न था
इतना सा  साथ होगा
बस यह सोचा न  था
हर लम्हा हर पल तू मेरे साथ है 
तेरे बिन में अधूरी हूँ 
तेरे बिना मेरी सास के मायने कुछ नहीं
 हर वक़्त तेरा एहसास है  तू मेरे पास है

मेरे हर कदम मेरी हर रफ़्तार में है तू
मेरी हर बात की गहरायी में तू
अगर कोई  तुझे याद करे एक मुस्कान में तू
जीवन का पाठ जो तूने पढ़ाया
कोई नहीं सीखा पाया
मेरे मन की गहरायी में तू
जहाँ जहाँ तू थी एक सुकून था आज भी है और कल भी रहेगा
मेरी नन्हीं  पारी तू जाना है बस सुखी रहना
तू सुख  की परछाईए  है और  में तेरी
 क्यों कैसे सब फिसल गया क्यों कैसे कब यही हो गया
में कठपुतली सी देखती रह गयी
मेरा दामन अधूरा रह गया
बड़े अरमानो से तेरा  महल सजाया था
आज खण्डार कर मुझे झकझोर गया
 मेरी ज़मीन  लेने वाले ने कभी  नहीं बतया में क्यों हु ?


तू क्यों नहीं  पाता ,तू  कहाँ है यह पाता है 
तेरे बिना मेरे पल में  अधूरे है
तेरी यादे मेरे लिए बहुत तोह नहीं
पर यही है जहाँ है खुश  रहे तू
यहॉ मेरी आरज़ू है यही मेरी तमन्ना है
प्यार बहुत बहुत प्यार
शुक्रिया मुझे माँ बनाएं के लिए 

Anushka....tale of life

It was a casual time of the morning she came to me walking n ask me  to take her godi
that was okay but than she get in my godi 
it was a tough time we are under doctor observation but she was on off want food 
she is getting dull n inactive . 
I have anxiety in my body but want to look balanced so not sharing
on 8 oct me n my husband decided to go for ultrasound which is left 
we went to our friends laboratory only
she was not okay ...but we are not able to judge what's wrong?
He suggested to go to the nearby pediatric we went there ...
he observe her sensorium is less 
and admit her
her heartbeat and  breathing rate was not normal by the night she was on ventilator n next dayshe sha has to go for ultrasound 
she went our all friends were there to visit us
i peak in the MRI room n found a big patch n feel it was nothing 
pediatric didi said do not worry nothing is there 
I was shivering n cry n not able to get where we are n where we can 

n news was broken to us she has 7 cm brain tumor 
we broke down 


....



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