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बुधवार, 23 नवंबर 2016

एक सपना था शादी का


एक सपना था शादी का जो सपना होता तोअच्छा हो था
शादी केअच्छेपन को लेकर बहुत कुछ सोचा पर समझ न पाये
दोनों एक ऐसे रिश्ते में है पर एक बोझ सा लगता  है
खुश रहना बहुत मुश्किल लगता है
सालबिते।। दिन बीते। बच्चो की आपाधापी में जीवन बीता
पुराने सारे लड़कियां  की पोथी बन आई
न तुम सुधरे न मैं
न तुम अपना पाए न मैं 
जो सच्चाई के फेरे थे वो गुम हो गए
सच्चे मन से न तुम थे न मैं
जिसकी है यह कीच कीच झिक  झिक
का  मतलब समझ  न आया
न यहे तेरे घर  न मेरा घर होता है
 हमारा घर भी न बन पाया एक कोने में तुम रह गए एक में मैं
बिखर है हर पल हर पलछिन

 छोटी किलकारी में बीत  रही है रात
कभी हालात ठीक नहीं होते
बस एक कोना होता है
कभी बिस्तर का, कभी घर का ,कभी साडी के कोने का
माँ भी सिसकी समझ नहीं पाती ,
जिसकी वजह से लड़ाई  होती  वो तो होता ही नहीं
कभीमेरे रोने कीबात नहीं दिल को छल्ली करने की बात है
जो मैंने किया वो कम था ,जो करता वो ज़्यादा था ,
काश ऊपर वाले का हाथ मुझ पर भी होता , यह भी एक रंज है
तेरे हर आंसू की कीमत देनी पड़ी
तेरी हर दर्द का हिसाब करना होगा
इसकी कीमत लगाई नहीं जाती

उससे जवाब देना
तेरे दर्द की डोर को में न  समझ पाई
उन आंसू कि कीमत कोई नहीं लगा पाया
काश में इस दर्द को मिटा पाती
तू भी एक औरत है में भी एक औरत हु
तू भी तनहा है में  भी  तनहा हु
फ़र्क़ है तुझे तनहा किया जानबूझकर  कर
साजिश के तहत

आज कहाँ है जो  धूम धाम से डोली ले गए थे
बड़े गर्व से बहु बेटी का नारा दे रहे थे
बहुत आसान था बोलना छोड़ दो
 आज छोड़ दिया तोह कही के न रहे

जो निबाह गए वो हैरान क्यों यह हो गया
आज जो आसान था कहाँ से मुश्किल हो गया
एक कदम चले एक में खुद बा खुद दो हो गए
थोड़ा तुमने सोचा  थोड़ा मैंने सब हम हो गया
कभी विचार एक नहीं थे पर चलते चलते
कभी तुमने मिला लिए कभी मैंने
और रास्ता मिल गया

आज कोई मतलब नहीं कोई वास्ता नहीं
न दोनों का एक रास्ता सही
तुम भी बहुत गलत हो गए और में भी
आज सब की राहे  अलग है
मेरे तुम्हारे अलावा
हमारी चाल एक है
मन एक है
पर हम तुम एक नहीं











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