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शनिवार, 19 दिसंबर 2015

मेरी आत्मा तो मर गयो बस में जी रही हु
क्योकि में मर नहीं सकती
मुझसे मेरी हसी छीन  ली
मुझसे मेरी जिन्दगी छीनने की कोशिश की
और अब तोह मेरे संसार पर बुरी नज़र डाल  दी
क्या कहु दुनिया  से बहुत खुश थी अपनी ज़िन्दगी से
अरमान सजा डाले थे दुनिया में
एक झटके में मेरे संसार को मिटने की साज़िश कर दी
मैंने भी अपनी आत्मा मर दी
अब कभी नहीं जी पाऊँगी सब से मुक्ति प् ली
न कुछ अच्छा है न बुरा न कुछ ज़रूरी है न मायने
न कुछ स्वर्ग है न नरक
न दोस्त है न दुश्मन
बस हम अकले होते है अकेले रहते है
न मोह है न माया
बस कुछ बेड़ियां है छोड़ के चले गए है
अपने जीवन में न चाहत होती है न वो मरती है
बस हम जीते रहते है क्योंि हम मरते  नहीं है
रिश्ते बंधन सब बन जाते है अपनी ज़रूरत से काम आ जाते है
सब एक साज़िश है दुनिया केनियम को मने के उससे ऊपर उठ जाओ
अपना अस्तित्त्व सिर्फ दूसरे की सोच से नहीं स्वय  से है
उस स्वय  को हम बनाकर बहुत कुछ करना होता है


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