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मंगलवार, 29 अप्रैल 2014




मेरी किस्मत को तेरी रहमत का मोहताज कर दिया
फिर भी ए बेवफा तूने हमे रुसवा कर दिया
बहुत चाहते थे हम भी तेरे दिल में अपनी जगह बनाये
पर तूने तो दिल ही पत्थर का कर दिया।

हम चले थे एक प्यार का आशियाँ बनाने
तिनके की तरह सब बिखरा तब एहसास हुआ
हम तोह अकेले ही थे
तुम सरक पतली गली से।

न जाने  क्यों इतनी बेरुखी थी
न जाने क्यों  तन्हायी थी
करावा  साथ था फिर भी आँख भर आई थी।

बड़े सपने संजोय थे एक हमसफ़र के
बड़े अरमान थे सफ़र में एक साथ के
आज समझ आया सब एक सपना थे
जिस दिन जागे उस दिने टूट जायेंगे।

हमारे प्यार का मजाक उड़ कर बहुत खुश थे
हमारी परवाह को हमारी कमजोरी समझ लिया
हमारी ख़ामोशी को लाचारी समझ गए
हमारे गुस्से को अपनी तोहीन समझ लिया
हमारी नौकरी को हमारा गुरुर समझ लिया
घर  नहीं  बसना था बोल दिया होता
इतने इलज़ाम का लाबाद तो न लिया होता
कहाँ कहाँ अपने को साबित करते
कम से कम  रिश्ते की अर्थी को कन्धा  ही दे दिया होता।









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