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गुरुवार, 14 नवंबर 2013

एक बात


 कभी बनती कभी बिगड़ती बात
कभी छोटी कभी खोटी बात
कभी मन सहलाती कभी मन भरी करती बात
दिल के गुबार को आंसू से धो डालती बात 
कभी कैंची  सी दिल को दुखती
कभी प्यार का मलहम लगाती बात
यह सब एक बात कि तो बात है
मन में घर और दिल से बहार का रास्ता दिखती बात
कभी मन के कभी दिमाग कि कसरत करती यह बात
कभी सालो चुप रहो फिर कहाँ समझ में आती यह बात
बात से निकली बात घंटो बात में गप्पे बनती बात
बड़ी याद आती इसकी उसकी बात
क्या बात !!कुछ बात!!प्यारी बात बनती मधुर याद