संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

शुक्रवार, 28 जून 2013

तुम मेरे भगवन बन गए..............

हर एक के जीवन में वो पल आता है जब भगवन से भरोसा उठता है और कुछ आक्रोश आता है ,अगर हम उसे जीत गए तो सब पर हो  जाता है। उम्र के साथ एक ठराह्व भी आता है। अपनी भड़ास निकल देने में ही भलाई है  ........वो हमेशा याद रहती है कभी ख़ुशी कभी गम बनके .......




मेरी परेशानियानो के दाता, क्यों तुम मेरे भगवन बन गए
मेरी आँखों में अनकहे आंसू  भर गए
अपने वर्चस्व की धक् जमा कर अपने को मर्द तो बना गए
नफरत की आग  तुम्हारेअन्दर ...कहीं और लगा देते ,तो आज अस्मा अपना लेते
सब छोड़ के मेरे सामने आ जाते हो
मनहूसियत के देवता क्यों खुश रहना तुम्हारे लिए नामुमकिन है
जब की छोटी सी  ज़िन्दगी है
अपने लिए खाई खोद रहे हो
उसमे हम भी गिरेंगे
जिस मौत का इंतज़ार कर रहे हो जब सामने आयगी तो सह नहीं पाओगे
आज जीवन  से जी चुरने वाले काल से कोई नहीं बचा है
बड़े बूढ़े बच्चे जवान सब से घिरे  हो
किसी को मुस्कान देना बहुत मुश्किल  है दर्द तो सब दे जाते है
अपने दर्द में शुमार करना असं है पर आदत न डालना नहीं तो  तमाशा बन जाता है
बहुत आदि हो अपनी ज़िन्दगी के एक ढरे  के पर किसकी को रस नहीं आएगा यह  रुख
रूखे सूखे से बीत जाती है ज़िन्दगी पर प्यार को  रेगिस्तान कर  सुख जाती है ज़िन्दगी
हर तृप्ति को अपने पास कर तुमने ठुकरा दिया
जब मैंने अपने अलीगं में लेना चाह तो ठुकरा दिया
आज मेरी ठोकर से तुम बदल लेने पे उतारू
इतनी बेशर्मी सिर्फ मर्दानगी के लिए
मेरी  उपेक्षा से क्या साबित कर पाओगे
भगवन तो तुम नहीं  रह पाओगे।


इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.