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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2013

सिसकियों

आज  पड़ोस  से  आती  सिसकियों की आवाज़ बंद हो गयी ...............अचानक ... रोज़ सिसकियाँ सुनती हु ...आपने को बहुत मुश्किल से   रोक पाती हु --- सुबह दस बाजे  के बाद और  रात को दस बजे के बाद ...आज अचानक बंद हो गयी ...मुझे अच्छा लगा ..
 लेकिन, आज यह क्या --आज सिसकियाँ रोज़ से दुगनी आवाज़ सुनायी दे  रही थी ...........आज शायद कल की  ख़ामोशी आज  के तूफान का संकेत था ....
  आज नहीं रोक पाई, जैसे ही अन्दर घुसी मुझे देख लिपट गयी ...जोर जोर से रोने लगी समझ नहीं  पाई ...क्या करू  बैठ गयी...उसे चुप     करते कराते मेरे आंसू आ गए .....शब्द कम पड़ रहे थे ..उनके आंसू के बीच में मैंने पुछा क्या हुआ ...........सिसकी ---हिचकी बनी और शब्द निकले...
मेरा रिश्ता  मेरे पति के नहीं निभा पा रही.......
 अरे इतनी सी बात सब  ....    के बीच में लड़ायी होती है क्यों परेशां होती हो .... 
 लेकिन यह क्या ---चलो चाय बना दू
   मेरे साथ एसा नहीं है ---मेरा पति के जीवन में कोई  औचित्य नहीं है ---उसको मुझेमें कोई दिलचस्पी नहीं ,अपने घर  वो मेरी बात नहीं करता .....शादी के बाद से बोलता है उसके सपने बिखर गए.... में कितनी भी बीमार हो पानी तक नहीं देता ... कैसा भी खाना  बनाऊ. कभी पसंद नहीं  करता...  कभी मेरे पास आ कर नहीं बेठता ...कभी प्यार के दो बोल नहीं बोलता ...हमेशा लड़ता है ...मूड हमेशा  उखड़ा रहता है ........मुझे  जेबखर्च नहीं देता ...दूसरो के सामने नीचा दीखता है .........    मेरी किसी भी काम में न मदद करता न तारीफ  दूसरो से  मुझे कभी मेरे घर वालो को नीचा दिखता है.....हर बात में अपने मुझ में  बुराई  ढूंढता ..............कभी मुझे किसी से नहीं मिलवाता ....
 अरे सब के साथ होता है एसा .............पर हमने लगता है सिर्फ हमरे साथ ही  ऐसा हो रहा है ..............तुम आराम से बात करके देखो .................चाय तो  पीके देखो
मुझे नहीं पाता तुम्हे क्यों बता रही हु जबकि में जानती भी नहीं  तुम अपनी लगी या जो भी समझो .....
  तुम निश्चिन्त रहो में ..किसी ..
  कोई फर्क नहीं ................
    तुम  बात करके देखो
     बात ............इतनी जोर से हँसी .......रोने.वाली हँसी
  क्या हुआ ?
    बात नहीं करते -- मेरे पति 
मतलब 
सुबह अपना  डब्बा लेके निकल जाते है ...न गुड मोर्निंग ...न रात इतनी देर क्यों जागी  ........न ऑफिस से फ़ोन ....न शाम को आने के बाद पूछना... की क्या हुआ ? न क्या किया? अपने में रहना  ....न मेरे साथ खाना न सोना न जागना....शादी के इतने टाइम बाद भी में अनजान है एक दुसरे से..........मुझे लगता है में  दिखयी नहीं देती .......मेरी आवाज़ सुनायी नहीं देती ...........कुछ भी करेंगे तो  उसका एहसान जतना नहीं भूलेंगे .............  अगर कोई  मेरी तारीफ करे तो  बोलते है तुम जन बुझ  कर करवाती हो.......में सीधा बोलू  या उल्टा कोई फर्क नहीं .......... वो उल्टा ही लेते है.............कभी जो हमारे रिश्ते में कमी है  उसे पूरा करने के बजये बढ़ाते रहते है ..............में जो कोशिश करती हु उसे नाटक लगता है ..................
 अच्छा आज तुम उनकी पसंद का खाना बनाना और टेबल  को  मोमबती से सजा देना और फिर देखना ............
   में कर चुकी हु ..
 ......फिर
       ..फिर क्या अपना  खाना ख़तम किया और उठ कर चल दिए ..........
 क्या बोलती ........
 टाइम के साथ सब ठीक हो जायेगा 
 मुझे लगता था पर इस बार नहीं..............
 ..क्यों ..
.......क्योंकि न वो मुझसे प्यार करता है न बात न अपने मन की न दूसरो की ........... बस एक खाई  है हमारे बीच   जो कभी नहीं भर सकती 
 तुम अपनी सास से बात करके देखो..............
     मेरे पति ने हमारे बीच का सम्बन्ध  कभी बनाने ही नहीं  दिया ............अपने से दूर अपने घर वालो से बात नहीं करने देते ... .....  बस अपने में रहते है  की काम मुझसे नहीं पूछते ..कल क्या ?कैसे होगा ?कुछ नहीं ?....
   मुझे समय का ध्यान ही नहीं जब घडी बोली तब याद आया घर जाना है..................शायद  वो मेरी बात समझ गयी ..........मैंने आज्ञा ली  ...उससे बोला आ जाये जब उसका मन करे ............पर मैंने दिल से नहीं बोला था  क्योंकि .......मुझे डर था ...पता नहीं मेरे घर की शांति का क्या होगा  .
में चुप चाप  बेठ गयी
में पूरा दिन अनमनी थी में किसी से कुछ कह नहीं सकती थी अपने घर की शांति नहीं भंग करना चाहती थी
पता नहीं कुछ समझ नहीं आ रहा था
कभी सोच रही थी की शाम को खाने पर बुला लू ...पर अपने घर के शांति भंग नहीं करना चाहती थी ...एक अनजाना  दर भी लग रहा था ....उसका रोता चेहरा सामने आ रहा था ..............
जैसे एक हफ्ता बीता ...कोई जयादा रोना धोना भी नहीं था .......मुझे  सब ठीक हो  गया
  मन  हुआ देख औ पर पता नहीं कुछ रोक्न्रह था
अगली सुबह कुछ आवाज़ आई पता नहीं क्यों  मैंने कीहोल  से देखा पता चला कुछ खून और स्त्रत्चुर पर कोई जा रहा है मेरी सास रुक गयी .........
पर यह क्या वो तोह पीछे जा रही है ......लगा कुछ मुक्त हुआ ...................
उसके अनसु दीखे पर दर्द नहीं था 


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