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रविवार, 12 सितंबर 2010

बीवी के entertainment

नारी तेरी यही कहानी

पति परमेश्वर समझ सब करना
उसके लिए नौकरानी से ज़यादा कुछ नहीं
बस ! तुम करो और कर करके मरो
उसके लिए करो ..जिसको उसकी अहमियत हो
किसी को गरज नहीं किसी का करने की
क्या इसलिए करो या तुम प्यारी  हो इसलिए करो
एक तारीफ सुनाने के लिए के कान  तरस जाते
पतिदेव सिर्फ गलती की तरफ उंगली उठते
जिस दिन सज साँवर कर इंतज़ार करते उस दिन बहुत लेट आते
अच्छा खाना बनते उस दिन ज़रूर बाहर से खाना खा कर  आते
पति का मोबाइल ,ईमेल और कपडे ज़रूर साफ़ करते
पर शक की निगह ज़रूर उन पर रखते 
जिस दिन पति के टिफन  में इलू लिख कर भेजते  अपना टिफन  किसी और को दे देते
यदि पति सिसकी न सुनते रात को तो बच्चो को डांटते  या गाने लगा देते
पति भी कम नहीं कहाँ गयी क्यों गयी
बड़ा बन ठान के जाती हो
पैसे और घुमाने की बोलते ही
स्वामी -एक करवट लेके सो  जाते
और तुम जूते की नोक पे रहोगी हमेशा
 २१ २२ २३  या १ सदी क्यों न आजाये
यह हमने नहीं भगवान ने नियम चलाया है
नारी --फिर गरजती है चंडी बनके
सारी राम कहनी सुना देती
कपडे प्रेस से लेकर खाना  बनाना
मुने मुनि को सँभालने से लेकर झाड़ू पोछा  लगाना
आखिर में स्वामी हमें प्यार नहीं करते
किसी और से करते है अपनी ही सहेली का नाम लेके
बेचारे स्वामी का जी दुखन
और खुद जोर जोर से रोने बेठ जाना
बड़ा ही रोचक है यह ड्रामा
जब ऊपर भगवान से पुछा तो बोले यह सब अपनी बीवी के entertainment के लिए   बनया है
वर्ना सारा दिन मेरे काम में disturb  करती है
पर भगवान हमारा क्या
अरे तुम्हरे लिए एक्ता कापुर को भेजा है न

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