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मंगलवार, 10 अगस्त 2010

शाहरुख़ थोडा थोडा

वीर ज़रा के अंजाम के डर से कुछ कुछ  होता है
रामजाने इस दीवाने के चाहत का काल हो गया
दिल तो पागल है इसे ही बाज़ीगर चलते चलते थोड़ी बनते है
यह तो स्वदेश जाये आखिर फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी
और यह तो बादशाह का दुप्लिकाते
और एस बॉस करने वाला है
अब खुद डन हो गया है
कभी कारन अर्जुन कभी गुड्डू
सब सत्ता का चमत्कार है जीवन नहीं एक पहेली  है
पाता नहीं कल हो न हो
वसे भी कभी ख़ुशी कभी गम
पर साथिया जनता था दिल वाले दुल्हनियां ले जायेंगे
इसलिए तो राजू बन गया है gentelman
अब तो ॐ शांति ॐ है
लेकिन उसका नाम है खान

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