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रविवार, 20 जून 2010

अखबार

रोज़ सवेरे आ जाता है
दिन दुनिया की सेर करता
रद्दी वाले को बहुत भाता
सुबह के चाय नाश्ते का है साथी
हो चाहे बॉलीवुड तमाशा
या हो राजनेति का मुह काला
खोल देता सबकी पोल
चाहे हो सर्कार का परिक्षण
या फ़िल्मी मिर्च मसाला
बच्चो को बल पृष्ठ प्यारा
रविवार को होती आपाधापी
पहेले आये किसकी बारी
अलग है सबके नाम
पर सबका है सिर्फ एक काम
सच्ची से यह कभी न डरते
दीन दुखियों का दर्द समझते
कई घटनाओ का आधार है
सही परखना जनता का अधिकार है

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