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मंगलवार, 15 जून 2010

तितली

रंग बिरंगे पंखो वाली
मस्त मस्त चलो वाली
फूलो का रस पीती हो तुम
लगाती हो कितनी प्यारी
हर जान का मन मोह लेती है
हर दम अठकेली ,मस्ती करने वाली
कोमल कोमल पंख तुम्हारे
छोटा है जीवन
बगीचे की शान हो
खुबसूरत इतनी हो तुम
पर नहीं है ज़रा गुरुर
इसलिए तितली रानी
तुम सबको इतना भाती हो

3 टिप्‍पणियां:

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बढ़िया ...पढ़कर बचपना याद आ गया ...आभार

M VERMA ने कहा…

सुन्दर चित्रण

ओम प्रकाश शर्मा ने कहा…


सुन्दर बाल कविता। टंकण मे लगती के स्थान पर लगाती और जन के स्थान पर जान किया गया है बुरा न माने उसे ठीक करवा लें तब पढ़ने में अच्छ लगेगा।

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