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शनिवार, 5 जून 2010

होली

           
रंगों की भर आई
काला, हरा ,लाल ,गुलाबी
हर मुख रंग है
सब मुखड़ा लगता है मुखोटा
कोई नहीं पहचान आ रहा भाई
पहेले जी भर के रंग लगओ
फिट घंटो बेठे के रंग छुडाओ
फागुन है आया रे भाई
                     डंडा लगा है बीच बजरिया
                      चंदा ले खूब सजा है
                     रस रंग में इस त्यौहार ने
                      सबको अपने रंग में रंगा है
भैया ने की पिचकारी की सफाई
मामी ने पकवान बनाये
हम सब खूब जे भर के खाए
भाभी पड़ा गयी देवर पे भारी
जीजा न साली की क्लास लगा डाली
टोलियों ने धूम मचायी
होली आई होली आई

1 टिप्पणी:

Udan Tashtari ने कहा…

होली मुबारक हो. :)

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