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गुरुवार, 22 अप्रैल 2010

हम बहुत बड़ी कवियत्री है

हमने  बहुत बड़ी कवियत्री बनाने के ख्वाब में बड़े  जतन
टूटी मेज़ कुर्सी  का आर्डर दे दिया
घर में सिर्फ धोती पहनाने लग गए हाथ में घडी
 खूब बड़ी अलमारी में ढेर  सी किताबें
एक किताब को भी हाथ न लगाया पर करीने से रखी
गपे मरने के शौक से पीछा छुटे तो कुछ पढते
पति हमारे हम पर बहुत  से फिकरे कसते
जिस महफ़िल में जाते अपने सपनो के नोवेल के प्लाट के चर्चा करते
कुछ समय बाद हम ही चर्चा का विषय हो जाते
बड़े बड़े लोगो की जीवनी पढ़  कर किसी का किस्सा किसी को सुना डालते
कुछ कुछ दबी दबी जबान से  कटाक्ष का हिस्सा बन जाते
जोर की एक फटकार दी सहेली ने
सच्चाई से अवगत कराया
नहीं ज़रूरी इतने नाटक बस करो जग हसाई
अपने को पहचान कर सही जगह इस्तेमाल करो
पूरे पसीने से तरबतर  भगवन!ऐसा  सपना किसको न दिखाए /

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