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गुरुवार, 22 अप्रैल 2010

श्रृद्धांजलि

रेनू आनंद ,मेरी सहेली हम नवी क्लास से सहेली थी /बहुत ही शांत ,गंभीर और होशियार/  ३० साल की छोटी से उम्र में उसे जाना पड़ा  किसको को कभी यह नहीं बताया की उससे दिल की कोई बीमारी थी /मुझे भी नहीं ,में अपनी  को उसकी अच्छी सहेली मानती थी /डॉक्टर थी वो  हम आखिर बार एक शादी में मिले थे काफी कमजोर लग रही थी पर यह एहसास नहींथा इतना दुःख रखा है उसने अपने अन्दर /उसे पाता था उससे जाना है इसलिए कितने ही  अच्छे रिश्ते छोड़ दिए / आज उसके घर  में मुझे कौन जनता है कौन नहीं यह तो नहीं पाता पर मेरी सच्ची  श्रृद्धांजलि  है तुझे / में उससे फणीश्वर नाथ के नाम से चिढाती  थी / उसकी मासूम हँसी और मुझे मैथ में मदद करना नहीं भूलूंगी /हम ११ में अलग अलग क्लास में चले गए, पर अस्सेम्ब्ली  में मेरे पास वाली लाइन में खड़ी होती थी ...और भी बहुत कुछ सब कल की ही बात लागती  है  ..और भी बहुत कुछ है बोलने के लिए पर सुने वाले तेरे कान  नहीं ......भगवान !आप  को भी अच्छे लोग चाहिए ,मेरी सहेली का ख्याल  रखियेगा /

2 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

आपकी सहेली को श्रृद्धांजलि!

दिलीप ने कहा…

hamari taraf se bhi unko bhavpurna shradhanjali...

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