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बुधवार, 31 मार्च 2010

मोह

आज सब चीजो  से मोह सा भंग हो गया
इतनी सुविधा पाने के लिए जी जान लगायी थी
दोस्तों के साथ जोश से हमेशा एक से रहने की कसम खायी थी 
आज कितने बदल गए हम ,जीवन की आपाधापी में खो गयी वो मटर गस्ती
तेरा मेरे के दरिया में इतना डूब गए हर सामान से लेकर सस्य्रल तक के लोगो को नहीं छोड़ा   
सब के पास सब कुछ : बस नहीं है तो वो नज़रिया
जो कभी हमेशा लुटने के बात करते थे ,आज जोड़ने  की करने लगे है 
 एक अंधी दौड़  में लगे है आज को  सुकून  से जी लो ,
पर इस मन पे नहीं है किसी  का काबू
जलन इर्षा से भर जाता है जब कोई अच्छा सामान  ले आता  है
या promotion का लैटर दिख जाता है
अगर विदेश का ट्रिप लग जाये तो नश्तर  चुभ जाते है
उलटे मंत्र पड़ने को आते है टोने टोटके से नहीं घबराते
हलकी सी छीक आने पर भी लोगो की नज़र का दोष बताते
लोगो की काबिलियत  नहीं  उसका रुतबा देखिये
तन  मन से देशी पर विदेशी की छाया का कमाल
सुट बूट टाई चश्मा के साथ atitudeका कमाल 
चाय में बिस्कुइत डुबो कर नहीं कुतर कर खायेंगे
ऐसे पोलिश लोगो को क्या बुलवायेंगे
इस जमने का नशा ही एसा है अप्प भी कही घूम हो जायेंगे 

2 टिप्‍पणियां:

Shekhar kumawat ने कहा…

कही घूम हो जायेंगे
bahut achi kavita

acha laga pad kar

http://kavyawani.blogspot.com/


good

सीमा सचदेव ने कहा…

katu sataya ko ujaagar karatihai aapki rachana , badhaaii

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