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शनिवार, 13 फ़रवरी 2010

प्यार की परिभाषा

१४ फरवरी के लिए

प्रेम के रस में डूबा यह संसार है
सिर्फ नज़र चार नहीं
दिल का रास्ता भी साफ़ हो तभी इकरार है /

सिर्फ हमेशा तोहफे देना या लेना ही नहीं
कभी एक प्यार का हाथ
कुछ बातें सुनते हुए कान भी चाहिए /

भरोसा और हर बुराई अच्छाई अपनाई  जाती है
एक दिन का रिश्ता नहीं जनम का होता है
आज तुम कल की और का फंडा नहीं होता /

काम,बच्चो और परिवार पे भी अधिकार होता है
 कभी वक़्त नहीं दे पाते /

ताजमहल नहीं एक शांति और सुकून की जगह 
 दोनों  को समझने की चाह कुछ दिल से करने का जज्बा
कहने से पहले  समझ जाना /

हमेशा सोना चाँदी, हीरा नहीं
साथ में खाना ,घूमना ,खुश  रहना
एक दुसरे के लिए सम्मान
कुछ एसा करने की चाहत /

 जो कभी न किया
हर घटिया से लेकर  बढ़िया चीज़ के मज़े
एक दुसरे से लड़ने नोक झोक से प्यार तक के मज़े /

प्यार एक दिन का नहीं हर दिन का होता है
अगर उस  दिन इज़हार हो जाये तो
दिल बाग बाग हो उठता है /

बंधन और आज़ादी का एक समावेश होता है
घुटन और आवेश का समंदर नहीं  /

माना प्यार की कोई भाषा नहीं होती
एक दुसरे से उम्मीद होती है
कुछ काम कर देना  से प्यार काम नहीं होता
प्यार, प्यार नहीं कर्म होता है /

2 टिप्‍पणियां:

M VERMA ने कहा…

बंधन और आज़ादी का एक समावेश होता है
घुटन और आवेश का समंदर नहीं /
सुन्दर परिभाषा

勇氣 ने कहा…

婚姻對男人來說是賭他的自由,對女人而言卻是賭她的幸福。 ..................................................

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