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शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010

भक्ति में शक्ति

श्रद्धा और आस्था  का साथ 
शांति से किया हुआ पाठ
बिना राग द्वेष के उपवास
आस्था के साथ
पुजन की राह पर
पूजनीय भगवान कभी नहीं निराश करंगे
हर चहा पूरी होगी ,अगर भक्ति में शक्ति होगी
नहीं चाह है भगवान को  चढावा  की, नहीं चहा  फूल की
मंदिर के आंगन में बिखरे फूल की
किसी का चढ़ावा किसी के पाव के धूल
यह है भगवान के मन में शूल
हर चीज़ उसकी बनाई हुई  है
हर कण कण में है व्याप्त है
क्यों किसी ढोंग  या पैसे से टोला  जाता है
जबकि इस जीवन क ढंग से जी लो
ईमानदारी से रिश्ते और जीवन निभालो
बिना लालच और बुराई ,न गरीब न आमिर के
 सिर्फ एक दिन सोच के दिखा दो 
कौन कहता है दुआ ,प्रार्थना काबुल नहीं होती
सच्चे मन से भक्ति की शक्ति तो निभा के देखो /

1 टिप्पणी:

संगीता पुरी ने कहा…

कौन कहता है दुआ ,प्रार्थना काबुल नहीं होती
सच्चे मन से भक्ति की शक्ति तो निभा के देखो

बहुत सटीक पंक्ति !!

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.