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बुधवार, 10 फ़रवरी 2010

प्यार आता है .

आसान  नहीं है तुमसे दूर रहना
कहीं यह मन लग नहीं पाता
कोई लुभा नहीं पाता
एक लम्हा  सदी  सा  लगता है
 हर जगह तुम्हारी  महक है
हर काम तुम्हारी पसंद का होता है
तुम पर  गर्व होता है
अपनी पसंद पर रोब आता है
बिजली सी सिरहन दोड़ जाती है
एक अनोखा एहसास होता है
तुम पर बहुत प्यार आता है .
जालिम नौकरी ने दूर कर दिया
तुम्हारी   बाहों   में छिपने  को जी चाहता है /

3 टिप्‍पणियां:

RaniVishal ने कहा…

Nokari ki majburi, Virah ka dard .....Achhi rachana!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

अनिल कान्त : ने कहा…

थोड़ी बहुत मात्रा या वर्तनी की कुछ कमी रह गयी लगती है

मोहिन्दर कुमार ने कहा…

एक फ़िल्मी गाना याद आ गया आपकी रचना पढ कर.

"तेरी दो टकियां दी नोकरी मेरा लाखों का सावन जाये... हाये हाये ये मजबूरी... ये मौसम और ये दूरी"

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