संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

सोमवार, 8 फ़रवरी 2010

हुकूमत

एक जानवर ने भी पलट के देखा , एहसास करा दिया की में खास हु
आज हम सफ़र ने यु  रुसवा किया की जार जार हो गए
महफ़िल की शान से तन्हायी की खान तक का सफ़र बन गए
हर बात को प्यार समझ के निभाते रहे
आज इल्म हुआ यह तो हुकूमत थी
एक चाह रख दी और फरमान जारी हो गया
बिन गुस्ताखी  के गुनहगार हो गए
ता उम्र सजायाफ्ता हो गए

1 टिप्पणी:

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया..

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.