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रविवार, 10 जनवरी 2010

दुनिया के साथ

आजकल जो हो जाये कम है ....सुधा तेरी लड़की ने तेरे सारे किये धरे पर पानी फेर दिया ...
हाँ जीजी ...
क्या हाँ हु... कर रही है जोर की डांट पिला ...याद दिला वो दिन जब जब अगर तू यहं न लाये होती तो  देखती कैसे ३ बच्चे पालती और कैसे आज अच्छी नौकरी लगाती और .................
अरे जीजी ,है तो मेरी ही बेटी अगर ...
कहे की बेटी... अगर बेटी होती तो ऐसा  काम कभी न करती............उसको बोल अगर तेरी दोनों लड़की और लड़का कल उससे  बोले की जायदाद में हिस्सा दो वर्ना तुम्हारा मकान खाली नहीं करेंगे तो कैसा लगेगा उसको ?
जीजी अगर इतना बोल पाती  तो उसके रूखे व्यव्हार का जवाब न दे देती ..हमेशा में ही फ़ोन करती हु ....में या उसके बापू बीमार होते है तो देखने तक नहीं आती ....इस बीमार बहिन पर भी तरस नहीं आता ...उससे तो बस यहे दिखता है तीनो  भाई के पास बहुत पैसा है एक के पास नहीं हम उन्हें अगर दे भी दे तो क्या हुआ ?मेरे तीनो लडको ने मेरा पैसे से किया है कभी कभी ....पर मेरे बेटा जिसके पास पैसा नहीं उसने शरीर से किया .शायद  आज यहे न होत्ता तो हम इतने बड़े पोस्ट वाले लडको पर बोझ होते  उनके रुतबे के साथ अच्छे नहीं लगते ..और अब तू उसके बच्चे इतना  कमाते  है की  इनसबको देख ले और हमे तो देख ही रहे है सब के लिए इतने मेहेंगे महंगे तोहफे लेट है पर इनका लिहाज़ करते है जबकि यहे अपनी पार्टी में बुलने पर छोटा समझते है आज भी सब का काम करते है पर काम कमाता था बेटा पर पोता ने सर्री कसार पूरी कर दी मुझे और इनका सारा इलाज करता है कोई और थोड़ी पैसा देता है खेर छोड़ो चाँद दिन कट  जाये .........
हाँ सुधा सही बात है सब दुनियादारी जानती है तो  .....बोल दे न अगर दम था तो आती तेरी  बीमारी में देती उतना पैसा जितना बाकि ने दिया ..तब क्यों नहीं दिया हिस्सा महीने के खर्च का हिस्सा दे कहाँ गया .......आज उसे तीनो बच्चे कमा  रहे है लेकिन एक ने तुझे कुछ दिया क्या ?
नहीं जीजी गरीब नानी के लिए थोड़ी कुछ है ...
कहे की  गरीब मत दे एक फूटी कौड़ी उनको कुछ नहीं कर सकते तेरा और कुछ बोले तो कह देना  इतने दिने से  मेरे मकान में रह रहे हो किराया दो .........
अरे जीजी तुम भी इस दुनिया की रीत में रंग गयी हो ..मैं अपने कोख जाने के साथ ऐसा नहीं कर सकती
आरी सुधा तू कुछ नहीं कर सकती चाहेये वो तेरा गला ही क्यों न काट  दे....... तेरी बेटी की मति ही मारी  गयी है सब भुला दिया माँ का किया हुआ ........अच्छा होत्ता २० साल  पहले गाँव में ही सड़ने देती  आज कहीं की न होत्ती वहीँ ससुराल में रहती तो
..अरे जीजी ऐसा न बोलो ...आज दुनिया  के साथ चल रही है मेरी बेटी रिश्तो से ज़यादा पैसे को समझा जाता है वर्ना मेरी तरह हार जाती .... 
भगवान करे उसके बच्चे भी माँ की तरह ही सोचे  तब शायद वो मेरी बहना का दुःख समझे
छोड़ो जीजी उसकी  उसके  साथ ............मेरा तो यही फ़र्ज़  था  हमेशा खुश रह वो ............

1 टिप्पणी:

Udan Tashtari ने कहा…

माँ का दिल है///

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